मध्य प्रदेश कैडर के वर्ष 2013 बैच के IPS अधिकारी अभिषेक तिवारी ने इस्तीफा दे दिया है। NTRO में प्रतिनियुक्ति के बाद अब वह अपना साइबर सिक्योरिटी स्टार्टअप शुरू करेंगे। जानें उनका पूरा सफर।
![]() |
| आईपीएस अधिकारी अभिषेक तिवारी। |
सरकारी सिस्टम की 'पावर' और रुतबे वाली नौकरी छोड़कर जोखिम भरे स्टार्टअप की दुनिया में कदम रखना हर किसी के बस की बात नहीं होती। परंतु मध्य प्रदेश कैडर के वर्ष 2013 बैच के IPS अधिकारी अभिषेक तिवारी ने यह साहसी फैसला लेकर सबको चौंका दिया है। पिछले दो सालों से नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (NTRO) में डेपुटेशन पर तैनात अभिषेक तिवारी ने अब अपनी सेवाओं से इस्तीफा दे दिया है।
तकनीक और अनुभव का अनूठा संगम
अभिषेक तिवारी केवल एक पुलिस अधिकारी ही नहीं, बल्कि एक उच्च शिक्षित तकनीकी विशेषज्ञ भी हैं। उन्होंने जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से 'इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशंस' में बीटेक किया है। उनके पास IIM इंदौर से PGDM (फाइनेंस) की डिग्री भी है। उनकी यह तकनीकी और प्रबंधकीय पृष्ठभूमि ही उन्हें आज के दौर की सबसे बड़ी चुनौती साइबर सिक्योरिटी से लड़ने के लिए प्रेरित कर रही है।
मैदानी अनुभव से स्टार्टअप तक का सफर
अभिषेक तिवारी का पुलिसिंग करियर बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने मध्य प्रदेश के रतलाम, सागर और बालाघाट जैसे चुनौतीपूर्ण जिलों में पुलिस अधीक्षक (SP) के रूप में अपनी सेवाएं दीं। जमीनी स्तर पर अपराधों को सुलझाने और NTRO जैसी संस्था में तकनीकी खुफिया जानकारी पर काम करने के बाद, उन्होंने महसूस किया कि साइबर अपराधों की बढ़ती लहर को रोकने के लिए सरकारी तंत्र से बाहर निकलकर तकनीकी नवाचार (Innovation) की जरूरत है।
क्यों अहम है यह कदम
आज के दौर में जब भारत डिजिटल क्रांति की ओर बढ़ रहा है, साइबर हमले देश की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरे हैं। एक अनुभवी अधिकारी का यह समझना कि "वे अब टेक स्टार्टअप के जरिए देश को बेहतर योगदान दे सकते हैं", युवाओं के लिए एक बड़ा संदेश है।
यह केवल एक इस्तीफे की खबर नहीं है, बल्कि यह 'न्यू इंडिया' की उस तस्वीर को दिखाता है जहां मेधावी युवा अधिकारी केवल पद के मोह में नहीं बंधे हैं, बल्कि वे वहां जाना चाहते हैं जहां उनकी विशेषज्ञता की ज्यादा मांग है।

0 Comments
if you have any doubt,pl let me know