UP Exports in Problem : ईरान के बाद ग्रीनलैंड व क्यूबा से कारोबारी संकट; यूपी के निर्यातक परेशान

उत्तर प्रदेश के निर्यातकों के लिए साल 2026 चुनौतियों भरा साबित हो रहा है। ईरान, वेनेजुएला के बाद अब ग्रीनलैंड और क्यूबा के साथ भी व्यापार ठप होने की कगार पर है। जानें अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक भू-राजनीति का यूपी के कारोबार पर क्या असर पड़ रहा है।

प्रारब्ध न्यूज डेस्क, लखनऊ 

उत्तर प्रदेश, जो अपनी विविध विनिर्माण क्षमताओं और कृषि उत्पादों के लिए जाना जाता है, इस समय एक गंभीर व्यापारिक संकट के दौर से गुजर रहा है। कानपुर से लेकर लखनऊ और नोएडा तक के निर्यातक वैश्विक राजनीति की बिसात पर खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं। पहले वेनेजुएला और ईरान के साथ व्यापारिक बाधाएं आईं, और अब ग्रीनलैंड तथा क्यूबा जैसे देशों के साथ भी कारोबारी रास्ते बंद होते दिख रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2025 की तरह वर्ष 2026 भी अमेरिकी टैरिफ नीतियों और युद्ध जैसी स्थितियों के कारण निर्यातकों के लिए "अग्निपरीक्षा" साबित हो रहा है।

प्रमुख देशों के साथ क्यों बिगड़ रहे हैं हालात

अमेरिकी विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने उत्तर प्रदेश के निर्यात बाजार को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (FIEO) के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव के अनुसार, इसके मुख्य कारण निम्न हैं।

ईरान व वेनेजुएला : युद्ध जैसे हालात और प्रतिबंध

ईरान और वेनेजुएला के साथ अमेरिका के तनावपूर्ण रिश्तों ने बैंकिंग और शिपिंग चैनलों को लगभग ठप कर दिया है। ईरान के साथ बढ़ते युद्ध के खतरों ने निर्यातकों को करोड़ों रुपये के ऑर्डर रोकने पर मजबूर कर दिया है।

ग्रीनलैंड और क्यूबा : नया संकट

हैरानी की बात यह है कि संकट का असर अब ग्रीनलैंड और क्यूबा जैसे छोटे लेकिन महत्वपूर्ण बाजारों तक भी पहुंच गया है। यहां से न तो नए ऑर्डर मिल रहे हैं और न ही वहां के व्यापारी पुरानी पेमेंट या भविष्य के सौदों पर बात करने को तैयार हैं।

अमेरिकी टैरिफ का प्रहार

अमेरिका ने जिस तरह के नए टैरिफ और प्रतिबंध लगाए हैं, उससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) चरमरा गई है। यूपी के निर्यातक, जो कल तक अमेरिका को एक सुरक्षित बाजार मानते थे, अब फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं।

यूपी के निर्यात पर पड़ने वाला वित्तीय प्रभाव

उत्तर प्रदेश के लिए ईरान एक बड़ा बाजार रहा है। यहां से होने वाले निर्यात के आंकड़े स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं।

क्षेत्र/उत्पाद : वार्षिक निर्यात : प्रभावित शहर

ईरान को : 1000 करोड़ : नोएडा, मेरठ, लखनऊ, कानपुर

कानपुर से : 15 - 20 करोड़ : कानपुर (लेदर और टेक्सटाइल)

प्रमुख उत्पाद : बासमती चावल, दवाइयां, सुगंधित उत्पाद : प्रदेश के कृषि क्षेत्र और औद्योगिक क्षेत्र।


आईआईए (IIA) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील वैश्य ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले साल तक अमेरिकी बाजार से जो उम्मीदें थीं, वे अब धूमिल हो रही हैं। निर्यात कारोबार लगभग ठप होने की कगार पर है।

कौन से उत्पाद सबसे ज्यादा प्रभावित

यूपी से होने वाले निर्यात की टोकरी बहुत विविध है, लेकिन वर्तमान संकट ने विशेष रूप से इन क्षेत्रों को चोट पहुंचाई है।

बासमती चावल : ईरान यूपी के बासमती चावल का सबसे बड़ा खरीदार रहा है। भुगतान के संकट ने चावल मिलों को परेशानी में डाल दिया है।

लेदर और फुटवियर : कानपुर के लेदर उत्पादों की मांग में भारी गिरावट आई है।

रेडीमेड गारमेंट्स और टेक्सटाइल : अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता के कारण नए फैशन ऑर्डर्स अटक गए हैं।

दवाइयां और सुगंध (Perfumes) : उत्तर प्रदेश के कन्नौज और अन्य क्षेत्रों से जाने वाले सुगंधित उत्पाद और फार्मास्युटिकल सप्लाई चेन बाधित हुई है।

विशेषज्ञों की राय और : समाधान पर राय

काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट (CLE) के क्षेत्रीय अध्यक्ष असद इराकी का कहना है कि जब तक अमेरिका के साथ स्थितियां सामान्य नहीं होतीं, तब तक निर्यातकों की राह आसान नहीं होगी। पिछले एक साल से चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं।

निर्यातकों की प्रमुख मांगें

सरकारी हस्तक्षेप : केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों (जैसे रुपया व्यापार) को बढ़ावा देना चाहिए।

नए बाजारों की तलाश : केवल पारंपरिक देशों पर निर्भर रहने के बजाय अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के अन्य देशों में नए बाजार खोजने की जरूरत है।

वित्तीय सहायता : संकट के इस समय में निर्यातकों को कम ब्याज पर ऋण और टैरिफ में छूट मिलनी चाहिए।

फूंक-फूंक कर कदम रख रहे निर्यातक

वैश्विक भू-राजनीति ने यूपी के छोटे और मंझोले निर्यातकों को दोराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। एक तरफ उत्पादन की लागत बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ सुरक्षित बाजारों का दायरा सिमटता जा रहा है। यदि जल्द ही कूटनीतिक स्तर पर समाधान नहीं निकला, तो प्रदेश के निर्यात राजस्व में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है।

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