लखनऊ में आयोजित उत्तरायणी कौथिग 2026 के नौवें दिन श्रीराम भक्ति और पहाड़ी संस्कृति का अद्भुत संगम दिखा। खुशी जोशी दिगारी और राकेश पनेरू की प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमती तट पर आयोजित हो रहे ऐतिहासिक 'उत्तरायणी कौथिग 2026' का नौवां दिन पूरी तरह से आस्था, परंपरा और उल्लास के नाम रहा। रजत जयंती वर्ष (Silver Jubilee Year) के उपलक्ष्य में इस बार का आयोजन विशेष है, लेकिन नौवें दिन की महत्ता तब और बढ़ गई जब इसे भगवान श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा दिवस के रूप में मनाया गया। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की भक्ति और उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के मिलन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
खासकर उत्तराखण्ड की लोक गायिका खुशी जोशी दिगारी की आवाज के जादू ने लखनऊ के गोमती तट पर पहाड़ की वादियों का अहसास करा दिया। उनकी गायकी की सबसे बड़ी खूबी यही है कि वे पारंपरिक लोक गीतों की मिठास को बनाए रखते हुए उसे भक्ति के रस में पिरो देती हैं।विशेष रूप से जब उन्होंने ‘‘तू रूंछी मैया...’’ और राम भजन गाए, तो पूरा वातावरण आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ऊर्जा से भर गया था। रजत जयंती वर्ष में उनकी उपस्थिति ने कौथिग की चमक को दोगुना कर दिया।श्रीराम भक्ति और लोक संस्कृति का अनूठा संगमउत्तरायणी कौथिग के मंच पर नौवें दिन की शुरुआत ही राममयी भजनों से हुई। कार्यक्रम के विशेष सत्रों में नृत्य, गायन और प्रतियोगिताओं का विषय 'मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम' पर आधारित रखा गया।
खुशी जोशी दिगारी की सुरीली प्रस्तुतियांउत्तराखंड से आईं प्रसिद्ध मेहमान कलाकार खुशी जोशी दिगारी ने अपनी कोकिल कंठ से जब श्रीराम और मां भगवती की स्तुति शुरू की, तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उन्होंने 'राम सिया राम सिया राम जय जय राम...' के साथ आध्यात्मिक वातावरण बनाया। इसके बाद कुमाऊंनी और गढ़वाली संस्कृति को पिरोते हुए उन्होंने गाने गाए।
- ‘‘तू रूंछी मैया, तू रूंछी, ऊँचा ऊँचा पहाड़ों मा...’’
- ‘‘गाड़ा धूरों गध्यारों मा...’’
- ‘‘दुर्गे मैया वे नौ दिन नौरात्र तेरी ज्योत जगी रे...’’ जैसे गीतों से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। वहीं लोकगायक राकेश पनेरू ने अपने हिट गीतों 'पतलोट की सुनीता' और 'मेरी हिमूली मैत नहतो' से युवाओं के बीच जबरदस्त उत्साह भरा।
प्रथम सत्र के दौरान आयोजित संगीत प्रतियोगिता में लखनऊ के विभिन्न क्षेत्रों की टोलियों ने भाग लिया। श्रीराम के प्राण प्रतिष्ठा दिवस को समर्पित इन प्रस्तुतियों में कलाकारों ने शास्त्रीय नृत्य और सुगम संगीत का बेहतरीन प्रदर्शन किया।
प्रमुख प्रतिभागी और प्रस्तुतियां
विभिन्न ग्रुप्स ने ‘‘दीप जलाओ मंगल गाओ राम आए हैं अयोध्या’’, ‘‘मंगल भवन अमंगल हारी’’ और ‘‘श्रीराम चन्द्र कृपालु भजुमन’’ जैसे कालजयी भजनों पर नृत्य पेश किया। इसमें प्रमुख रूप से शामिल रहे:
- शांता ग्रुप (गोमती नगर) - किरन चौबे
- वीणा वरदायणी ग्रुप - विकास गुप्ता
- ब्रह्मकमल सांस्कृतिक समिति - दीपा पांडेय
- मंदाकिनी बहुगुणा ग्रुप, एकम श्रीजन ग्रुप और अन्य।
प्रतियोगिता का सफल संचालन सांस्कृतिक प्रभारी महेंद्र पंत और सांस्कृतिक सचिव गोविंद बोरा ने किया, जबकि निर्णायक मंडल में आकांक्षा आनंद, कीर्ति राणा और अदिति थपलियाल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुख्य अतिथियों का आगमन और सम्मान समारोह
उत्तरायणी कौथिग का मंच केवल कला ही नहीं, बल्कि विशिष्ट विभूतियों के सम्मान का भी केंद्र बना रहा। प्रथम सत्र के मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री अनंत मिश्रा ‘अंटू’ रहे। कौथिग आयोजन समिति के कोषाध्यक्ष के.एस. रावत, महेंद्र सिंह मेहता और संगठन मंत्री चंचल सिंह बोरा सहित अन्य पदाधिकारियों ने उनका भव्य स्वागत किया। वहीं, द्वितीय सत्र की मुख्य अतिथि प्रोफेसर एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री रीता बहुगुणा जोशी रहीं। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि उत्तरायणी कौथिग लखनऊ में मिनी उत्तराखंड की जीवंत तस्वीर पेश करता है।
- गोविन्द नयाल समाज सेवा सम्मान : इस वर्ष यह प्रतिष्ठित सम्मान पूर्व पार्षद नरेन्द्र देवड़ी को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए प्रदान किया गया।
- विशेष सम्मान : हिमांशु भट्ट को पर्वतीय समाज का नाम रोशन करने और समाज हित में सराहनीय कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया।
'मिस्टर और मिस उत्तरायणी' की घोषणा
युवाओं के आकर्षण का केंद्र रही 'मिस्टर और मिस उत्तरायणी' प्रतियोगिता के परिणाम भी घोषित किए गए।
- मिस उत्तरायणी : परिजा
- मिस्टर उत्तरायणी : नीरज युवा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष पुष्कर नयाल और महासचिव जितेंद्र उपाध्याय के सहयोग से विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।
प्रतियोगिताएं : 'पहाड़ की आवाज' और 'छपेली'
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की कड़ी में ‘‘पहाड़ की आवाज’’ प्रतियोगिता के दूसरे चरण में दीपक पोरवाल, पंकज वारंगी और ललिता जोशी जैसे उभरते कलाकारों ने अपनी प्रतिभा दिखाई। वहीं, ‘‘छपेली’’ प्रतियोगिता (सीजन-4) में मुनस्यारी और गोमती नगर की टीमों ने उत्तराखंड के पारंपरिक नृत्य 'छपेली' से दर्शकों को अपनी जड़ों से जोड़े रखा।
उत्तरायणी कौथिग : मेला ही नहीं, सभ्यता व संस्कारों का भी उत्सव
लखनऊ का उत्तरायणी कौथिग 2026 अपने रजत जयंती वर्ष में नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। नौवें दिन श्रीराम भक्ति और पहाड़ी धुनों के मेल ने यह सिद्ध कर दिया कि यह केवल एक मेला नहीं, बल्कि सभ्यता और संस्कारों का उत्सव है। आयोजन को सफल बनाने में अध्यक्ष गणेश जोशी, संयोजक के.एन. चंदोला, संरक्षक एन.के. उपाध्याय और डॉ. आर.सी. पंत का विशेष योगदान रहा।






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