यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने 5 दिवसीय बैंकिंग लागू करने की मांग को लेकर 27 जनवरी को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। लखनऊ में बैंककर्मियों ने सरकार के अड़ियल रवैये के खिलाफ हुंकार भरी। जानें पूरी रिपोर्ट।
पांच दिवसीय बैंकिंग की मांग ने पकड़ा जोर, 27 जनवरी को देशव्यापी बैंक हड़ताल, लखनऊ में बैंककर्मियों ने भरी हुंकारप्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ
देश के बैंकिंग क्षेत्र में एक बार फिर आंदोलनों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। 'यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस' (UFBU) की लखनऊ जिला इकाई ने स्पष्ट कर दिया है कि बैंककर्मी अब अपनी मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। शुक्रवार को भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के स्थानीय प्रधान कार्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेसवार्ता के दौरान यूनियन पदाधिकारियों ने 27 जनवरी को होने वाली राष्ट्रव्यापी हड़ताल का औपचारिक ऐलान किया।
अन्य संस्थानों की तर्ज पर 5-डे बैंकिंग की मांगप्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए एनसीबीई (NCBE) के महामंत्री कामरेड दिनेश कुमार सिंह ने कहा कि बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों पर काम का दबाव और मानसिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC), सेबी (SEBI), नाबार्ड (NABARD) और जीआईसी (GIC) जैसे वित्तीय संस्थानों के साथ-साथ केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में 5 दिवसीय कार्य सप्ताह (5-Day Week) की व्यवस्था वर्षों से लागू है, तो बैंककर्मियों के साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है।
श्री सिंह ने कहा कि 5 दिवसीय बैंकिंग की मांग पूरी तरह से व्यावहारिक है और इसका उद्देश्य बैंककर्मियों के कार्य-जीवन संतुलन (Work-Life Balance) को सुधारना है।
बैंककर्मियों का प्रस्ताव : छुट्टी के बदले 40 मिनट अतिरिक्त काम
आमतौर पर यह धारणा बनाई जाती है कि कार्य दिवस कम होने से ग्राहकों को असुविधा होगी, लेकिन यूनियन ने इसका समाधान पहले ही दे दिया है। वर्तमान में बैंकों में दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश रहता है। यूनियन का प्रस्ताव है कि महीने के सभी शनिवारों को अवकाश घोषित किया जाए।
इसके बदले में बैंक कर्मचारी प्रत्येक कार्य दिवस (सोमवार से शुक्रवार) पर 40 मिनट अतिरिक्त कार्य करने को तैयार हैं।
इंडियन बैंक एसोसिएशन (IBA) और UFBU के बीच इस मुद्दे पर सैद्धांतिक सहमति तो बनी थी, लेकिन सरकार की ओर से अंतिम अधिसूचना जारी न होने के कारण बैंककर्मियों में भारी रोष है।
विफल वार्ता और सरकार की हठधर्मिता
हड़ताल के निर्णय पर प्रकाश डालते हुए पदाधिकारियों ने बताया कि बीते कल मुख्य श्रमायुक्त के साथ हुई समझौता वार्ता बेनतीजा रही। यूनियन का आरोप है कि सरकार इस मुद्दे पर टालमटोल की नीति अपना रही है और बैंककर्मियों की जायज मांग को नजरअंदाज कर रही है।
फोरम के जिला संयोजक अनिल श्रीवास्तव ने बताया कि बैंककर्मियों ने अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए हर संभव लोकतांत्रिक रास्ता अपनाया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर बड़े स्तर पर अभियान चलाया गया, रैलियां निकाली गईं और धरना-प्रदर्शन किए गए, लेकिन सरकार के अड़ियल रवैये ने उन्हें सड़क पर उतरने को मजबूर कर दिया है।
लखनऊ में 27 जनवरी को बड़ा प्रदर्शन
मीडिया प्रभारी अनिल तिवारी ने जानकारी दी कि 27 जनवरी को होने वाली हड़ताल के दौरान बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह ठप रहेंगी। लखनऊ में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंककर्मी एकजुट होकर हजरतगंज स्थित इंडियन बैंक के समक्ष सुबह 11:30 बजे से विशाल सभा और प्रदर्शन करेंगे।
इन पदाधिकारियों ने किया संबोधित
प्रेसवार्ता में लक्ष्मण सिंह, आरएन शुक्ला, शकील अहमद, वीके माथुर, संदीप सिंह, विभाकर कुशवाहा, प्रभाकर अवस्थी और बीडी पाण्डेय सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया और बैंककर्मियों से हड़ताल को सफल बनाने की अपील की।
आमजन को होने वाली असुविधा का जिम्मेदार कौन
यूनियन ने स्पष्ट किया है कि 27 जनवरी को होने वाली हड़ताल से चेक क्लियरिंग, नकद निकासी और जमा जैसी सेवाओं पर असर पड़ सकता है। फोरम ने कहा कि आम जनता को होने वाली किसी भी असुविधा के लिए पूरी तरह से केंद्र सरकार जिम्मेदार है, जिसने वार्ता के मेज पर समाधान निकालने के बजाय हठधर्मिता का रास्ता चुना।
चुप्पी नहीं तोड़ी तो उग्र होगा आंदोलन
5 दिवसीय बैंकिंग की यह मांग केवल बैंककर्मियों की छुट्टी से नहीं, बल्कि बैंकिंग प्रणाली की आधुनिकता और कर्मचारियों की कार्यक्षमता से जुड़ी है। अब देखना यह होगा कि 27 जनवरी की हड़ताल के बाद सरकार अपनी चुप्पी तोड़ती है या आंदोलन और उग्र रूप धारण करता है।


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