प्रारब्ध न्यूज़ ब्यूरो, दिल्ली
भारत में कचरा प्रबंधन (Waste Management) हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। हम सभी घरों में सूखा और गीला कचरा अलग-अलग रखने की कोशिश तो करते हैं, लेकिन डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचते-पहुंचते अक्सर सब मिल जाता है। लेकिन, दिल्ली की एक 12वीं कक्षा की छात्रा ने इस समस्या का एक बेहद स्मार्ट समाधान ढूंढ निकाला है।
माही मल्हाणी (Mahi Malhani), जो अभी सिर्फ 12वीं में पढ़ रही हैं, ने TRASHbot नाम का एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित रोबोट विकसित किया है। यह कोई साधारण डस्टबिन नहीं है, बल्कि एक ऐसा स्मार्ट रोबोट है जो कचरे को खुद पहचान कर उसे 90% तक की सटीकता (Accuracy) के साथ अलग कर सकता है।
AI TRASHbot और कार्यप्रणाली
TRASHbot एक स्मार्ट कचरा छंटाई प्रणाली (Smart Waste Sorting System) है। इसके अंदर कैमरे और सेंसर लगे होते हैं, जो AI और मशीन लर्निंग एल्गोरिदम का उपयोग करते हैं।
काम करने का तरीका
1-कचरा डालना: जब आप TRASHbot के अंदर कोई कचरा डालते हैं, तो इसके इनबिल्ट कैमरे उसकी तस्वीर खींचते हैं।
2-AI एनालिसिस: रोबोट का AI सिस्टम तुरंत उस तस्वीर का विश्लेषण करता है और कचरे की प्रकृति (प्लास्टिक, कागज, धातु, कांच या जैविक/गीला कचरा) की पहचान करता है।
3-ऑटोमैटिक छंटाई: पहचान होने के बाद, TRASHbot के अंदर लगी मोटर उस कचरे को संबंधित डिब्बे (Bin) में डाल देती है।
सबसे खास बात यह है कि मशीन लर्निंग की वजह से यह रोबोट जितना ज्यादा इस्तेमाल होता है, कचरा पहचानने में यह उतना ही ज्यादा स्मार्ट और सटीक होता जाता है।
दिल्ली की सोसायटियों में शुरू हुआ इस्तेमाल
माही का यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक स्कूल साइंस फेयर तक सीमित नहीं रहा। दिल्ली-NCR की कई रिहायशी सोसायटियों ने वेस्ट मैनेजमेंट के लिए इस TRASHbot को अपनाना शुरू कर दिया है।
90% सटीकता: शुरुआती परीक्षणों में TRASHbot ने कचरे को अलग करने में 90 प्रतिशत से अधिक की सटीकता दिखाई है, जो मानवीय छंटाई की तुलना में कहीं बेहतर है।
सफाईकर्मियों के लिए वरदान: मैनुअल कचरा छंटाई सफाईकर्मियों के लिए स्वास्थ्य जोखिम पैदा करती है। TRASHbot इस जोखिम को कम करता है और काम को सुरक्षित व तेज बनाता है।
रीसाइक्लिंग में मददगार: कचरे के सही तरीके से अलग होने पर उसे रीसायकल करना बहुत आसान हो जाता है, जिससे लैंडफिल में जाने वाला कचरा कम होता है।
युवा वैज्ञानिकों से उम्मीद की किरण
माही मल्हाणी का यह आविष्कार साबित करता है कि आज का युवा सिर्फ AI के इस्तेमाल तक सीमित नहीं है, बल्कि वह इसके जरिए असल दुनिया की समस्याओं (Real-world problems) को सुलझा रहा है। TRASHbot जैसी पहल सस्टेनेबल और स्मार्ट सिटी की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है।
अगर सरकार और प्राइवेट सेक्टर ऐसी पहलों का समर्थन करें, तो भारत की कचरा समस्या को हमेशा के लिए खत्म किया जा सकता है।
यह आर्टिकल पर्यावरण संरक्षण और टेक इनोवेशन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिखा गया है। भारत के
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