लखनऊ मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर (चारबाग से बसंतकुंज) के लिए उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) ने बसंतकुंज डिपो का टेंडर जारी कर दिया है। 5,801 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट में 12 स्टेशन होंगे। पूरी जानकारी यहां पढ़ें। Lucknow Metro Phase 2 East-West Corridor.
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| सौजन्य यूपी मेट्रो। |
प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ
उत्तर प्रदेश की राजधानी में यातायात को सुगम बनाने के लिए लखनऊ मेट्रो (Lucknow Metro) के विस्तार को एक बड़ा बूस्ट मिला है। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) ने सेकंड फेज यानी ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए बसंतकुंज डिपो के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अप्रैल से शुरू हो सकता है निर्माण कार्य
विभागीय सूत्रों के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया को फाइनल होने में लगभग 1 से 1.5 महीने का समय लगेगा। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो अप्रैल 2026 से जमीन पर निर्माण कार्य शुरू हो सकता है। यह कॉरिडोर शहर के सबसे घने इलाकों जैसे अमीनाबाद और चौक को सीधे मेट्रो कनेक्टिविटी से जोड़ेगा।
प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएं (At a Glance)
ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर न केवल दूरी कम करेगा, बल्कि पुराने लखनऊ की ट्रैफिक समस्या का बड़ा समाधान बनेगा।
कुल लंबाई : 12 किलोमीटर
अनुमानित लागत : 5,801 करोड़ रुपये
बजट प्रावधान (वर्तमान) : 550 करोड़ रुपये
फंडिंग मॉडल : लगभग 2,900 करोड़ रुपये केंद्र और राज्य सरकार द्वारा वहन किए जाएंगे, जबकि शेष राशि के लिए लोन लिया जाएगा।
कैसा होगा स्टेशनों का जाल
इस 12 किमी लंबे रूट पर कुल 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं, जिन्हें दो हिस्सों में बांटा गया है।
सात भूमिगत (Underground) स्टेशन
पुराने लखनऊ की घनी आबादी और ऐतिहासिक इमारतों को देखते हुए इस हिस्से को अंडरग्राउंड रखा गया है।
गौतमबुद्ध मार्ग
अमीनाबाद
पांडेयगंज
सिटी रेलवे स्टेशन
मेडिकल चौराहा
नवाजगंज
चौक
पांच एलिवेटेड (Elevated) स्टेशन
जैसे ही मेट्रो घने इलाकों से बाहर निकलेगी, यह एलिवेटेड ट्रैक पर आ जाएगी।
ठाकुरगंज
बालागंज
सरफराजगंज
मूसाबाग
बसंतकुंज
क्यों खास है यह कॉरिडोर
यह कॉरिडोर चारबाग रेलवे स्टेशन (इंटरचेंज) से शुरू होकर बसंतकुंज तक जाएगा। यह न केवल अमीनाबाद जैसे बड़े व्यापारिक केंद्रों को जोड़ेगा, बल्कि केजीएमयू (KGMU) जाने वाले मरीजों और चौक के पर्यटन स्थलों पर आने वाले लोगों के लिए भी लाइफलाइन साबित होगा।
नोट : बसंतकुंज में बनने वाला डिपो इस पूरे रूट की ट्रेनों के रखरखाव और संचालन का मुख्य केंद्र होगा।

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