Lucknow में पर्वतीय शैली की होली: 'हां-हां मोहन गिरधारी' के सुरों से गूँजा गोमती नगर

लखनऊ के गोमती नगर में पर्वतीय महापरिषद के रजत जयंती वर्ष पर पारंपरिक कुमाऊँनी और गढ़वाली होली गायन का आयोजन हुआ। महापौर सुषमा खर्कवाल ने 900 महिला कलाकारों को साड़ियां भेंट कीं।

पर्वतीय महापरिषद के 'रजत जयंती वर्ष' पर लखनऊ में बिखरे लोक संस्कृति के रंग, 43 दलों ने दी मनमोहक प्रस्तुतियां

प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ 

गोमती नगर स्थित पर्वतीय महापरिषद भवन आज यानी रविवार को 'बैठकी' और 'खड़ी' होली के पारंपरिक स्वरों से सराबोर हो उठा। पर्वतीय महापरिषद उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में आयोजित इस भव्य होली गायन कार्यक्रम ने न केवल उत्तराखंड की समृद्ध विरासत की झलक पेश की, बल्कि परिषद के "रजत जयंती वर्ष" के उल्लास को भी दोगुना कर दिया।

पारंपरिक गीतों से जीवंत हुई उत्तराखंड की संस्कृति

कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक वंदना और लोक प्रसिद्ध होली गीतों के साथ हुआ। कलाकारों ने अपनी सुरीली प्रस्तुतियों से समां बांध दिया, जिनमें मुख्य आकर्षण सिद्धि के दाता विघ्न विनाशन..., होली खेलें गिरिजापति नन्दन..., शिव के मन माही बसे काशी..., हां-हां मोहन गिरधारी... के होली गीत रहे।

होली गायन के 43 दलों की भागीदारी 

इस उत्सव में लखनऊ के विभिन्न क्षेत्रों से आए 43 होली गायन दलों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि इसमें उत्तराखंड के विभिन्न अंचलों की झलक देखने को मिली।

लोहाघाट (चंपावत) की होली का नेतृत्व हरीश सिंह बोरा ने किया। वहीं, कुमाऊँ, गढ़वाल, जौनसार के साथ-साथ रं समाज, जौहार और मुनस्यार क्षेत्रों के विशिष्ट होली गीतों की शानदार प्रस्तुतियां दी गईं।

महापौर ने 900 महिला कलाकारों का किया सम्मान

इस अवसर पर मुख्य अतिथि, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने महिला सशक्तीकरण और सांस्कृतिक संरक्षण की मिसाल पेश की। उन्होंने उत्तरायणी कौथिग (मेला)-2026 के झोड़ा नृत्य में भाग लेने वाली 45 टीमों की 900 महिला कलाकारों को उपहार स्वरूप साड़ियां वितरित कीं।

नेताओं का संदेश, युवा पीढ़ी को सौंपें विरासत

परिषद के पदाधिकारियों ने समाज को एकजुटता और परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया।

गणेश चन्द्र जोशी (अध्यक्ष) : उन्होंने सभी के लिए सुख-शांति की कामना करते हुए होली की बधाई दी।

महेन्द्र सिंह रावत (महासचिव) : उन्होंने होली को प्रेम और सौहार्द का पर्व बताते हुए अपील की कि इस विशिष्ट गायन शैली को युवा पीढ़ी को हस्तांतरित करना अनिवार्य है।

टीएस मनराल (मुख्य संयोजक) : उन्होंने जन समुदाय को इस भव्य आयोजन की सफलता पर शुभकामनाएं दीं।

इनकी रही गरिमापूर्ण उपस्थिति

इस ऐतिहासिक आयोजन में पर्वतीय महापरिषद की केन्द्रीय कार्यकारिणी, सलाहकार, संरक्षक, महिला प्रकोष्ठ, युवा प्रकोष्ठ, सैनिक प्रकोष्ठ, धार्मिक, सांस्कृतिक प्रकोष्ठों के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रीय ईकाइयों और रामलीला समितियों के पदाधिकारी एवं भारी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

ये पदाधिकारी व सदस्य मौजूद रहे 

इस अवसर पर संरक्षक प्रो. आरसी पन्त, नवीन जोशी, पीसी पन्त, हरीश काण्डपाल, महेन्द्र पन्त, सुमन रावत, प्रेम सिंह फस्र्वाण, गोविन्द सिंह बोरा, रमेश चन्द्र उपाध्याय, शंकर पाण्डेय, ख्याली सिंह कड़ाकोटी, आनन्द सिंह कपकोटी, पुष्कर सिंह नयाल, कमल सिंह नेगी, गोविन्द पाठक, आनन्द सिंह भण्डारी, एन के उपाध्याय, गीरीश चन्द कोठारी, त्रिभुवन बोरा, गोपाल सिंह गैलाकोटी, बलवंत वाँणगी,  किशन सिह, भुवन पाण्डेय, डॉ. बीएस नेगी, मयंक खर्कवाल, शुभम जोशी, मंजू शर्मा पडेलिया, चित्रा काण्डपाल, बीना रावत, दमयंती नेगी, नंदा रावत, भारती काण्डपाल, नवीन चन्द्र जोशी, लक्ष्मण सिंह भण्डारी, मेहता, कैलाश बिनवाल, दिलीप सिंह, तारा काण्डपाल, दिनेश पाण्डेय, सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

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