यूपी विधानसभा में कांग्रेस नेता आराधना मिश्रा 'मोना' ने सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ती मौतों पर चिंता जताई। जानें ब्लैक स्पॉट्स, ट्रैफिक पुलिस की कमी और सड़क सुरक्षा को लेकर उनके बड़े सुझाव।
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| कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा 'मोना'। |
उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज सड़क सुरक्षा और लगातार हो रही दुर्घटनाओं का मुद्दा गरमाया रहा। कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा 'मोना' ने नियम 56 के तहत इस गंभीर विषय को सदन के पटल पर रखा। उन्होंने आंकड़ों के जरिये योगी सरकार के सड़क सुरक्षा दावों की पोल खोलते हुए कहा, यह चिंताजनक है कि प्रदेश आज सड़क दुर्घटनाओं में 'नंबर वन' बनने की ओर अग्रसर है।
हर 20 मिनट में उजड़ रहा है एक परिवार
सदन को संबोधित करते हुए आराधना मिश्रा 'मोना' ने बेहद संवेदनशील आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश, जो 25 करोड़ की आबादी वाला देश का सबसे बड़ा राज्य है, वहां सड़कों पर होने वाली मौतें किसी महामारी से कम नहीं हैं।
मौतों के आंकड़े बताते हैं भयावह स्थिति
प्रदेश में हर साल 24,000 से अधिक लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवा देते हैं। अगर दैनिक औसत निकाला जाए, तो यूपी में प्रतिदिन लगभग 65 मौतें हो रही हैं। अगर समय के हिसाब से देखें तो हर एक घंटे में 3 मौतें और औसतन हर 20 मिनट में एक परिवार उजड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में यह आंकड़ा 16,000 था, जो वर्ष 2024 तक बढ़कर 24,000 के पार निकल गया है।
सड़क हादसों में मरने वालों में 50% से अधिक युवा
आराधना मिश्रा ने विशेष जोर देते हुए कहा कि मरने वालों में 50% से अधिक युवा हैं। उन्होंने कहा कि जो युवा देश का भविष्य बन सकते थे, वे सड़कों पर दम तोड़ रहे हैं। सरकार केवल प्रतीकात्मक अभियानों में व्यस्त है।
हादसों के मुख्य कारण, रफ्तार, नशा और गलत दिशा
कांग्रेस नेता ने सड़क दुर्घटनाओं के पीछे के तकनीकी और व्यावहारिक कारणों का विश्लेषण करते हुए सरकार को आईना दिखाया। आंकड़ों के मुताबिक, तेज रफ्तार (Over Speeding) 56% दुर्घटनाओं का मुख्य कारण है। वहीं, गलत दिशा (Wrong Side Driving) में वाहन चलाने से 12% मौतों की वजह बन रही है। इसी तरह नशे में ड्राइविंग की वजह से 8% हादसे होते हैं।
सरकार की अनदेखी सबसे बड़ा कारण
उन्होंने कहा कि इन कारणों के अलावा सरकार की अनदेखी सबसे बड़ा कारण है। प्रत्येक दुर्घटना के बाद उसके मूल कारणों (Root Cause Analysis) पर ध्यान नहीं दिया जाता, जिससे एक ही स्थान पर बार-बार हादसे होते हैं।
'ब्लैक स्पॉट्स' के साथ आगरा व बाराबंकी की चर्चा
आराधना मिश्रा ने विशिष्ट जिलों का उदाहरण देते हुए बताया कि सरकार के प्रयास जमीनी स्तर पर क्यों विफल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अकेले आगरा जिले में 44 ब्लैक स्पॉट (दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र) चिह्नित किए गए हैं। वर्ष 2024 में यहां 586 लोगों की जान गई, लेकिन सुधार के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं की गईं। इसी तरह बाराबंकी, यह जिला देश के 100 मुख्य ब्लैक स्पॉट्स में शामिल है।
यमुना और गंगा एक्सप्रेस-वे
मथुरा में यमुना एक्सप्रेस-वे पर बस से उतर रहे 10 लोगों को डंफर ने कुचल दिया। वहीं, रायबरेली में गंगा एक्सप्रेस-वे पर भीषण हादसा हुआ, जबकि वह अभी पूरी तरह शुरू भी नहीं हुआ है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार सड़कों के एलाइनमेंट और तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए गंभीर है। उन्होंने कहा कि हद है 5 करोड़ से अधिक वाहन हैं, जबकि ट्रैफिक पुलिस मुट्ठी भर है। आज तक मैनपावर की भारी कमी दूर करने के प्रयास ही नहीं हुए।
सड़क सुरक्षा की बदहाली का कारण, पुलिस बल की कमी
सड़क सुरक्षा की बदहाली का एक बड़ा कारण आराधना मिश्रा ने पुलिस बल की कमी को बताया। उन्होंने तुलनात्मक आंकड़े भी पेश किए। उन्होंने कहा कि जब सड़कों पर निगरानी करने वाले ही नहीं होंगे, तो नियम कौन लागू करवाएगा।
प्रदेश में वाहनों की संख्या : 5 करोड़ से अधिक।
वर्तमान ट्रैफिक पुलिस बल : मात्र 9,000।
स्वीकृत पद : 11,930।
सुप्रीम कोर्ट की समिति के अनुसार आवश्यकता : 30,000 से अधिक।
सरकार को आराधना मिश्रा 'मोना' के 5 बड़े सुझाव
कांग्रेस नेता ने केवल आलोचना नहीं की, बल्कि सरकार के सामने सड़क सुरक्षा सुधारने के लिए एक ठोस ब्लूप्रिंट भी रखा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले के ब्लैक स्पॉट्स पर विशेषज्ञों द्वारा इंजीनियरिंग ऑडिट कराया जाए। उनके सुझाव पर सड़कों की संरचना व डिजाइन में तुरंत सुधार भी कराएं।सभी संवेदनशील जिलों में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम सॉफ्टवेयर यानी आईटीएमएस (ITMS) तत्काल लागू किया जाए। साथ ही स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में "सड़क सुरक्षा शिक्षा" को अनिवार्य विषय के रूप में शामिल किया जाए।
रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती कराएं
ट्रैफिक पुलिस और होमगार्ड के रिक्त पदों पर युद्धस्तर पर भर्तियां की जाएं ताकि मैनपावर की कमी दूर हो।
पूरे ट्रैफिक सिस्टम की डिजिटल निगरानी
पूरे प्रदेश में डिजिटल ट्रैफिक निगरानी व्यवस्था को सशक्त बनाया जाए ताकि नियम तोड़ने वालों पर लगाम लग सके।
प्रचार नहीं, पारदर्शी कार्रवाई की जरूरत
अंत में आराधना मिश्रा 'मोना' ने योगी सरकार को नसीहत दी कि करोड़ों रुपये होर्डिंग्स और प्रचार पर खर्च करने से सड़कें सुरक्षित नहीं होंगी। उन्होंने मांग की कि दुर्घटना पीड़ित परिवारों के लिए एक प्रभावी और पारदर्शी स्थाई सहायता योजना लागू की जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा राजनीति का नहीं, बल्कि प्रदेश के करोड़ों नागरिकों की जान बचाने का है। अब देखना यह है कि क्या सरकार इन सुझावों पर अमल करती है या उत्तर प्रदेश की सड़कें इसी तरह 'रक्त रंजित' होती रहेंगी।

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