RSS के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में लखनऊ के भागीदारी भवन में 'स्वरों से राष्ट्रसाधना' गोष्ठी आयोजित हुई। मालिनी अवस्थी और जगदीश प्रसाद सहित कई दिग्गज रहे मौजूद। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
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| स्वरों से राष्ट्र साधना कार्यक्रम में प्रस्तुति देते कलाकार। |
RSS शताब्दी वर्ष पर संगीत साधकों का समागम, 'स्वरों से राष्ट्रसाधना' का किया गया भव्य आयोजन
प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ
लखनऊ: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के गौरवमयी अवसर पर राजधानी लखनऊ के गोमती नगर स्थित भागीदारी भवन प्रेक्षागृह में सुरों और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। संघ के घोष कार्य विभाग द्वारा आयोजित “स्वरों से राष्ट्रसाधना” संगीत गोष्ठी में संगीत साधकों ने अपनी प्रस्तुतियों से राष्ट्र साधना और सामाजिक समरसता का संदेश दिया।
सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रभक्ति का संगम
सोमवार सायं 6 बजे शुरू हुए इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संगीत के माध्यम से सांस्कृतिक चेतना को जागृत करना और समाज में समरसता की भावना को सुदृढ़ करना था। कार्यक्रम में मुख्य रूप से RSS के अखिल भारतीय शारीरिक प्रमुख जगदीश प्रसाद उपस्थित रहे। गोष्ठी की अध्यक्षता संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष प्रो. जयंत खोखर ने की।
शास्त्रीय संगीत से लेकर संघ घोष तक की गूंज
इस गोष्ठी की सबसे बड़ी विशेषता संगीत के विविध स्वरूपों का एक मंच पर आना रहा। कार्यक्रम में निम्नलिखित विधाओं की प्रभावशाली प्रस्तुतियां दी गईं।
भक्ति संगीत : भजन एवं कीर्तन मंडलियों द्वारा भावपूर्ण प्रस्तुति।
आधुनिक वादन : ऑर्केस्ट्रा पार्टी, ब्रास बैंड और मार्चिंग बैंड।
अनुशासन का प्रतीक : स्कूल बैंड और संघ घोष की अनुशासित टोलियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
प्रमुख अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
लखनऊ महानगर द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में राजनीति, कला और संघ के कई बड़े नाम शामिल हुए।
असीम अरुण : राज्य मंत्री, समाज कल्याण विभाग।
पद्मश्री मालिनी अवस्थी : प्रख्यात लोक गायिका।
पद्मश्री विद्या बिंदु : प्रख्यात शास्त्रीय गायिका (दूरदर्शन एवं आकाशवाणी कलाकार)।
कौशल जी : प्रांत प्रचारक, अवध प्रांत।
अखिलेश जी : शारीरिक प्रमुख, पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र।
विनोद द्विवेदी : प्रख्यात कलाकार।
इसके अलावा प्रांत घोष प्रमुख नीलकंठ, सह घोष प्रमुख संतोष, विभाग प्रचारक अनिल, विभाग कार्यवाह अमितेश और अखिल सहित संघ के अन्य दायित्ववान कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में नागरिक व विद्यार्थी उपस्थित रहे। वक्ताओं ने कहा कि यह आयोजन केवल एक संगीत संध्या नहीं, बल्कि शताब्दी वर्ष के संकल्पों को स्वरों के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने की एक प्रेरणादायी पहल है।
यह कार्यक्रम सांस्कृतिक इतिहास में एक स्मरणीय अध्याय
संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित यह 'स्वरों से राष्ट्रसाधना' गोष्ठी लखनऊ के सांस्कृतिक इतिहास में एक स्मरणीय अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है। संगीत साधकों की इस सहभागिता ने यह सिद्ध कर दिया कि राष्ट्र निर्माण में कला और संस्कृति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।


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