लोकसभा (Loksabha) नेता प्रतिपक्ष (Leader Of Opposition) राहुल गांधी ने संसद में 17 किसान संगठनों से मुलाकात की। मोदी सरकार की अमेरिका के साथ ट्रेड डील को किसानों के खिलाफ बताते हुए देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी। पूरी सूची यहां देखें।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संसद भवन में देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रमुख किसान संगठनों और उनके नेताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस मुलाकात का मुख्य एजेंडा केंद्र सरकार द्वारा अमेरिका के साथ हाल ही में की गई प्रस्तावित ट्रेड डील और उससे भारतीय किसानों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव रहे।
राहुल गांधी का आरोप, "किसानों का सौदा कर दिया"
बैठक के दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने "सरेंडर" कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस ट्रेड डील के जरिये भारतीय किसानों के भविष्य को अंधेरे में धकेल कर उनका सौदा किया गया है।
बैठक में जताईं गईं मुख्य चिंताएं
अमेरिकी मुनाफ़ा, भारतीय घाटा : इस डील से अमेरिकी किसान अपना माल आसानी से भारतीय बाजारों में बेचकर मुनाफा कमाएंगे।
बढ़ती मुसीबतें : विदेशी उत्पादों की बाढ़ से स्थानीय किसानों के उत्पादों की मांग और दाम कम होने की आशंका है।
आंदोलन की चेतावनी : राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने इस "देशविरोधी" फैसले को वापस नहीं लिया, तो विपक्षी दल किसान संगठनों के साथ मिलकर एक देशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे।
चर्चा में शामिल रहे इन किसान संगठनों के नेता
इस बैठक में भारत के कोने- कोने से आए 17 प्रमुख किसान प्रतिनिधि शामिल हुए, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र की समस्याओं और ट्रेड डील के खतरों को साझा किया है। उसमें अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के सुखपाल सिंह खैरा, राजस्थान से ग्रामीण किसान मजदूर समिति (GKS) के रणजीत सिंह संधू, हरियाणा से भारतीय किसान मजदूर यूनियन के एडवोकेट अशोक बलहारा, केरल से KMM के पीटी जॉन, BKU क्रांतिकारी के बलदेव सिंह ज़ीरा, प्रोग्रेसिव फार्मर्स फ्रंट के आर. नंदकुमार, BKU शहीद भगत सिंह के अमरजीत सिंह मोहरी, ऑल इंडिया किसान कांग्रेस के अखिलेश शुक्ला, आम किसान यूनियन के केदार सिरोही, पंजाब से किसान कांग्रेस के किरणजीत सिंह संधू, राजसभा के गुरप्रीत सिंह संघा, किसान मजदूर मोर्चा (इंडिया) के गुरमनीत सिंह मंगत, जम्मू-कश्मीर ज़मीदारा फोरम के हमीद मलिक, KMM के तेजवीर सिंह, हरियाणा किसान संघर्ष समिति के धर्मवीर गोयत, कृषक समाज के ईश्वर सिंह नैन, दक्षिण हरियाणा किसान यूनियन के सतबीर खटाना मौजूद रहे।
भावी रणनीति, अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुटता
किसान नेताओं ने एकजुट होकर कहा कि वे अपनी जमीनों और आजीविका की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएंगे। विपक्षी नेतृत्व और किसान संगठनों के बीच बनी यह सहमति आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक एक बड़े राजनीतिक संग्राम का संकेत दे रही है।
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