प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, नई दिल्ली/चेन्नई
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के साथ ही राज्य में सियासी पारा चढ़ने लगा है। दिल्ली में हुई कांग्रेस आलाकमान की अहम बैठक के बाद गठबंधन और सीटों के बंटवारे को लेकर बड़ी खबरें छनकर बाहर आ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, सत्तारूढ़ DMK और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत तो जारी है, लेकिन सीटों और सत्ता में भागीदारी को लेकर फिलहाल 'डेडलॉक' (गतिरोध) की स्थिति बनी हुई है।
DMK का ऑफर बनाम कांग्रेस की जिद
बैठक से निकलकर आ रही जानकारी के मुताबिक, DMK ने कांग्रेस को एक नया प्रस्ताव दिया है, जिसमें संख्या और भविष्य के समीकरणों का मेल है:
DMK का प्रस्ताव : DMK ने कांग्रेस को 28 विधानसभा सीटें देने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही 2 राज्यसभा सीटों का लालच भी दिया गया है (जिसमें से एक तुरंत और दूसरी भविष्य में दी जाएगी)।
कांग्रेस की डिमांड : कांग्रेस इस बार 'जूनियर पार्टनर' के तौर पर दबकर रहने के मूड में नहीं है। पार्टी ने साफ़ तौर पर 40 सीटों की मांग रखी है।
सत्ता में हिस्सेदारी का पेंच : कांग्रेस की सबसे बड़ी शर्त कैबिनेट में हिस्सेदारी को लेकर है। कांग्रेस चाहती है कि यदि गठबंधन जीतता है, तो उसे सरकार में मंत्री पद दिए जाएं।
सियासी मोड़ : फिलहाल DMK ने सत्ता में हिस्सेदारी (Power Sharing) के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। DMK का मानना है कि तमिलनाडु के चुनावी इतिहास में गठबंधन की सरकारों का चलन नहीं रहा है।
विजय की TVK: क्या कांग्रेस ने बंद किए दरवाजे
इस पूरी चर्चा में सबसे बड़ा ट्विस्ट तमिल सुपरस्टार थलपति विजय की पार्टी TVK (Tamizhaga Vettri Kazhagam) को लेकर आया है। पिछले कुछ समय से कयास लगाए जा रहे थे कि अगर DMK के साथ बात नहीं बनी, तो कांग्रेस विजय के साथ हाथ मिला सकती है।
ताजा अपडेट के मुताबिक, कांग्रेस आलाकमान ने TVK के साथ गठबंधन की संभावनाओं पर लगभग पूर्णविराम लगा दिया है। पार्टी फिलहाल अपने पुराने सहयोगी DMK के साथ ही सौदेबाजी को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
आगे क्या अपनाएंगे रणनीति
फिलहाल दोनों दलों के बीच बातचीत का दौर थमा नहीं है। कांग्रेस के दिग्गज नेता जल्द ही चेन्नई में DMK प्रमुख एम.के. स्टालिन के साथ दूसरे दौर की बैठक कर सकते हैं।
कई अहम सवाल बने चुनौती
कांग्रेस 28 सीटों पर समझौता करेगी।
DMK 'सत्ता में हिस्सेदारी' न देने की अपनी जिद पर अड़ी।
विपक्षी दल इस खींचतान का फायदा उठा पाएंगे।
गठबंधन का एकजुट रहना अनिवार्य
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव के करीब आते-आते दोनों दल किसी बीच के रास्ते पर सहमत हो सकते हैं, क्योंकि तमिलनाडु में भाजपा और अन्नाद्रमुक की चुनौती से निपटने के लिए इस गठबंधन का एकजुट रहना अनिवार्य है।

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