गर्भावस्था में हीमोग्लोबिन सामान्य होने पर भी सांस फूलना दिल की बीमारी का संकेत हो सकता है। केजीएमयू के कॉर्डियोकॉन-2026 में विशेषज्ञों ने महिलाओं में बढ़ते हार्ट अटैक के खतरों और बचाव के तरीकों पर दी महत्वपूर्ण जानकारी।
प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ
अक्सर माना जाता है कि गर्भावस्था के दौरान सांस फूलने की वजह खून की कमी (लो-हीमोग्लोबिन) होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हीमोग्लोबिन रिपोर्ट नॉर्मल होने के बावजूद सांस फूलना किसी गंभीर खतरे की घंटी हो सकता है? लखनऊ के केजीएमयू (KGMU) में आयोजित कॉर्डियोकॉन-2026 में विशेषज्ञों ने इस चौंकाने वाले तथ्य से पर्दा उठाया है।
गर्भावस्था के चौथे महीने के बाद बढ़ता है जोखिम
लारी कॉर्डियोलॉजी विभाग की डॉ. मोनिका भंडारी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए बताया कि गर्भावस्था के चौथे महीने के बाद महिला के शरीर में रक्त की मात्रा (Blood Volume) बढ़ जाती है। इस बढ़े हुए रक्त को पंप करने के लिए दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
वॉल्व की समस्या : यदि किसी महिला के दिल के वॉल्व में पहले से ही सिकुड़न या लीकेज है, तो इस दौरान लक्षण उभरने लगते हैं।
प्रमुख लक्षण : थकान, धड़कन तेज होना और सांस फूलना।
विशेषज्ञ की सलाह : ऐसे लक्षणों को सामान्य 'प्रेगनेंसी डिस्कम्फर्ट' समझकर नजरअंदाज न करें। तुरंत हृदय रोग विशेषज्ञ या स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।
महिलाओं में हार्ट अटैक का खतरा दोगुना, एस्ट्रोजन का बिगड़ता संतुलन
सम्मेलन में डॉ. प्रवेश विश्वकर्मा ने एक चिंताजनक पहलू पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने बताया कि अब महिलाओं में भी पुरुषों की तरह हार्ट अटैक के मामले दोगुने हो गए हैं।
तनाव और हार्मोन : कामकाजी जीवन और बढ़ते मानसिक तनाव के कारण महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन का संतुलन समय से पहले बिगड़ रहा है। अमूमन यह समस्या मीनोपॉज (रजोनिवृत्ति) के बाद आती थी, लेकिन अब युवा महिलाओं में भी देखी जा रही है।
जीवन शैली : शराब, धूम्रपान और जंक फूड का बढ़ता चलन महिलाओं के दिल की सेहत को सीधा नुकसान पहुंचा रहा है।
युवाओं के लिए चेतावनी, बढ़ रहे हार्ट फेलियर के मामले
विभागाध्यक्ष डॉ. ऋषि सेठी के अनुसार, आज की सुस्त जीवनशैली (Sedentary Lifestyle) दिल की बीमारियों की सबसे बड़ी जड़ है। घंटों बैठकर काम करना और शारीरिक व्यायाम की कमी युवाओं को दिल का मरीज बना रही है। उन्होंने बचाव के लिए '30 मिनट का मंत्र' साझा किया।
रोजाना 30 मिनट व्यायाम करें।
तली-भुनी चीजों और फास्ट फूड से तौबा करें।
सीने में हल्का दर्द या असामान्य थकान होने पर तुरंत जांच कराएं।
20 की उम्र के बाद ये जांच हैं अनिवार्य
डॉ. अखिल शर्मा ने सुझाव दिया कि दिल की बीमारियों से बचने के लिए केवल लक्षणों का इंतजार न करें। 20 वर्ष की आयु पार करने के बाद हर व्यक्ति को साल में एक बार निम्नलिखित जांचें जरूर करानी चाहिए।
लिपिड प्रोफाइल (कोलेस्ट्रॉल की जांच)
डायबिटीज और थायराइड स्क्रीनिंग
हार्मोन स्क्रीनिंग और हीमोग्लोबिन टेस्ट
वॉकथान के जरिए दिया सेहत का संदेश
सम्मेलन की शुरुआत में डॉ. अक्षय प्रधान के नेतृत्व में एक भव्य वॉकथान का आयोजन किया गया। घंटा घर से केजीएमयू तक आयोजित इस पैदल यात्रा में डॉक्टरों और कर्मचारियों ने हिस्सा लिया और 'स्वस्थ दिल, स्वस्थ जीवन' का संदेश दिया।
महत्वपूर्ण टिप : समय पर पहचान और सही जीवनशैली ही दिल की बीमारियों से बचने का एकमात्र प्रभावी तरीका है।
प्रतिदिन 30 मिनट व्यायाम
दिल को मजबूत करने के लिए 'कार्डियो' व्यायाम सबसे अच्छे होते हैं।
तेज चलना (Brisk Walking) : रोजाना कम से कम 20-30 मिनट तेज चलें। यह सबसे सुरक्षित और प्रभावी व्यायाम है।
योग और प्राणायाम : 'अनुलोम-विलोम' और 'भ्रामरी' प्राणायाम तनाव कम करने में बहुत सहायक हैं। 10 मिनट योग को जरूर दें।
स्ट्रेचिंग : मांसपेशियों को लचीला बनाए रखने के लिए सुबह उठने के बाद 5 मिनट हल्की स्ट्रेचिंग करें।
सीढ़ियों का प्रयोग : यदि संभव हो, तो लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें।
हृदय के लिए स्वस्थ आहार (Diet Tips)
फाइबर युक्त भोजन : अपने खाने में ओट्स, दलिया, और साबुत अनाज शामिल करें। यह कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है।
फल और सब्जियां : दिन में कम से कम 2 तरह के फल (जैसे सेब, पपीता या संतरा) और हरी पत्तेदार सब्जियां खाएं।
नमक और चीनी पर नियंत्रण : खाने में ऊपर से नमक न डालें और प्रोसेस्ड शुगर (मिठाई, कोल्ड ड्रिंक) से बचें।
स्वस्थ वसा (Healthy Fats) : बादाम, अखरोट और अलसी के बीज (Flax seeds) दिल के लिए बहुत अच्छे होते हैं।
पानी का भरपूर सेवन : दिन भर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं।
जीवनशैली में बदलाव
तनाव प्रबंधन : गहरी सांस लेने का अभ्यास करें और पर्याप्त (7-8 घंटे) नींद लें।
बैठने का समय घटाएं : यदि आपका काम डेस्क जॉब है, तो हर एक घंटे में 5 मिनट के लिए उठकर टहलें।
नियमित जांच : जैसा कि विशेषज्ञों ने सलाह दी है, साल में एक बार लिपिड प्रोफाइल और शुगर लेवल की जांच जरूर कराएं।
महत्वपूर्ण सुझाव : यदि आपको पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है या आप गर्भवती हैं, तो कोई भी नया व्यायाम शुरू करने से पहले एक बार अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।



0 Comments
if you have any doubt,pl let me know