लखनऊ में आयोजित उत्तरायणी कौथिग 2026 के चौथे दिन 'भाना गंगनाथ' नृत्य नाटिका और झोड़ा नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। पढ़ें रजत जयंती वर्ष के इस भव्य आयोजन की पूरी रिपोर्ट।
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| लोक कलाकारों के साथ उत्तराखंड महापरिषद के पदाधिकारी। |
लखनऊ के गोमती तट स्थित पंडित गोविन्द बल्लभ पंत पर्वतीय सांस्कृतिक उपवन में आयोजित 'उत्तरायणी कौथिग-2026' में उत्तराखंडी संस्कृति, लोक आस्था, स्थानीय प्रतियोगिताएं और उत्तराखंडी खान-पान की रंग-बिरंगी छंटा बिखर रही है। ऐसा लग रहा है जैसे उत्तराखंड की बस गया है। जैसे जैसे मेले के समापन के दिन निकट आ रहे हैं, उत्तराखण्डियों का उत्साह और उमंग चरम पर पहुंचता जा रहा है। शनिवार को मेले के चौथे दिन आस्था, संस्कृति और लोक कला का अनूठा संगम देखने को मिला।
ऐसा प्रतीत हो रहा है कि पूरा परिसर 'मिनी उत्तराखंड' के रूप में जीवंत हो उठा है। रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित इस कौथिग के मंच पर जब उत्तराखंड की अमर लोकगाथा ‘‘भाना गंगनाथ’’ का मंचन हुआ, तो वहां मौजूद हजारों दर्शक भावुक और अभिभूत हो उठे।![]() |
| कार्यक्रम की प्रस्तुति देते लोक कलाकार। |
चतुर्थ दिवस की मुख्य प्रस्तुति उत्तराखंड जनकल्याण समिति, विकास नगर (लखनऊ) द्वारा पेश की गई नृत्य नाटिका ‘भाना गंगनाथ’ रही। चंचल सिंह बोरा के कुशल निर्देशन में कलाकारों ने गंगनाथ देवता और भाना की पौराणिक कथा को जीवंत कर दिया। लोक संगीत की धुनों और भावपूर्ण अभिनय ने दर्शकों को उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ दिया।
झोड़ा दलों का सैलाब और रंगबिरंगी लहरेंदिन के प्रथम सत्र में कौथिग मैदान का नजारा किसी उत्सव जैसा था। कल्याणपुर, एलडीए कानपुर रोड और वृंदावन जैसे क्षेत्रों से आए पुष्पा जोशी, वीना रावत, बसन्ती बिष्ट व प्रेम सिंह बिष्ट के नेतृत्व में झोड़ा दलों ने मंच संभाला। गढ़वाली, जोनसारी, रं समाज, जोहारी, कुमाँऊनी और थारू परिधानों व पारंपरिक आभूषणों से सजी लगभग 200 महिलाओं के दलों ने जब सामूहिक झोड़ा नृत्य शुरू किया, तो ऐसा लगा मानो मैदान में रंगबिरंगी लहरें हिलोरे ले रही हों। इस दौरान विभिन्न दलों के बीच झोड़ा प्रतियोगिता भी आयोजित की गई।
हास्य और मनोरंजन: 'पहाड़ी धुनों पर देशी ठुमका'सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच मनोरंजन का तड़का भी लगा। कवि भुवन जहाँवासी ने अपनी हास्य कविता ‘मार बेलन की...’ सुनाई, जिससे पूरा पांडाल ठहाकों से गूंज उठा। वहीं, एक अनूठी प्रतियोगिता ‘‘पहाड़ी धुनों पर देशी ठुमका’’ के पहले संस्करण की शुरुआत हुई, जिसने युवाओं को खूब आकर्षित किया। मंच संचालन नीलम जोशी और गोविन्द बोरा ने अपनी वाकपटुता से बखूबी संभाला।
आर्गेनिक उत्पाद व स्वास्थ्य शिविर पर विशेष जोरकौथिग केवल नाच-गाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पहाड़ की सेहत और स्वाद को भी लखनऊ तक पहुंचा रहा है।
पहाड़ी आर्गेनिक उत्पाद : स्टाल नंबर 89 पर नैनीताल के रामगढ़ से आए हरीश बिष्ट ने शुद्ध आर्गेनिक उत्पाद प्रदर्शित किए। यहाँ खुमानी, पुलम, सेब के जैम और बुरांश, माल्टा व कीवी के जूस की भारी मांग रही। साथ ही हृदय और किडनी के लिए लाभकारी हर्बल टी, थाईम और रोजमेरी भी आकर्षण का केंद्र रहे।निःशुल्क चिकित्सा शिविर : पर्वतीय महापरिषद चिकित्सा प्रकोष्ठ और मुख्य चिकित्सा कार्यालय के सहयोग से शिविर लगाया गया। डॉ. राहुल तिवारी को उनकी सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। डॉ. बी.एस. नेगी ने बताया कि यह शिविर मेले के अंत तक प्रतिदिन चलेगा।
सम्मान और गौरव के क्षणयुवा प्रकोष्ठ द्वारा प्रतिदिन विशेष सम्मान दिए जा रहे हैं।
मिस्टर उत्तरायणी : दीपक सिंह परवाल
मिसेज उत्तरायणी : महिमा सिंह
इस अवसर पर भारत सरकार द्वारा सम्मानित प्रसिद्ध रंगकर्मी ललित पोखरिया, साहित्यकार धन सिंह मेहता सहित पर्वतीय महापरिषद के वरिष्ठ पदाधिकारी जैसे मंजू भास्कर शर्मा, सुमन रावत, और के.एस. रावत उपस्थित रहे।
सुरीली शाम : लोकगायक गोविंद दिगारी और मनोज सामंत के नाम रही। जैसे-जैसे शाम ढली, उत्तराखंड से आए प्रसिद्ध कलाकारों ने सुरों की वर्षा की।गोविन्द दिगारी के लोकप्रिय गीत ‘ओ लाली हो लाली’ और ‘पहाड़ छुटि गो’ ने प्रवासियों को अपनी जड़ों की याद दिला दी।
संजय पथनी ने ‘दरमा घाटी षौक बैठ्यो...’ और ‘रिमझिम पानी...’ जैसे गीतों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
लोकगायक मनोज सामंत की मधुर आवाज़ ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके साथ ही गायन प्रतियोगिता ‘पहाड़ की आवाज’ और छपेली प्रतियोगिता ‘झुमिगो सीजन-4’ का रोमांच भी बरकरार रहा।
आज के कार्यक्रम यानी 18 जनवरी के मुख्य आकर्षण
उत्तरायणी कौथिग में रविवार को भी उत्साह का माहौल रहेगा। कार्यक्रम की रूपरेखा इस प्रकार है।
लोक गायन : उत्तराखंड के मशहूर कलाकार गोविन्द दिगारी की विशेष प्रस्तुतियां।
प्रतियोगिताएं : झोड़ा प्रतियोगिता और ‘पहाड़ी धुनों पर देशी ठुमका’।
प्रतिभा खोज : ‘पहाड़ की आवाज’ (गायन) और ‘झुमिगो सीजन-4’ (छपेली)।









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