यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर लखनऊ में बैंककर्मियों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल। 5-day banking की मांग को लेकर प्रदर्शन। जानें क्या है पूरा मामला और आम जनता पर इसका असर।
बैंक कर्मचारियों ने कहा- जब RBI और LIC में 5 दिन काम, तो बैंकों में भी होना चाहिए
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| सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारी एवं अधिकारी एसबीआई प्रधान कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए। |
| प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ |
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ सहित पूरे देश में बैंकिंग सेवाएं मंगलवार यानी आज पूरी तरह से चरमरा गईं। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर अपनी पांच दिवसीय बैंकिंग' (5-Day Banking) की मांग को लेकर बैंक कर्मचारी और अधिकारी सड़कों पर उतर आए। लखनऊ के हजरतगंज स्थित इंडियन बैंक की मुख्य शाखा के बाहर हजारों की संख्या में बैंककर्मियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और प्रदर्शन भी किया।
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| सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारी एवं अधिकारी इंडियन बैंक हजरतगंज पर प्रदर्शन करते हुए। |
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| एनसीबीई के महामंत्री डीके सिंह एसबीआई प्रधान कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए। |
प्रदर्शन के दौरान नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ बैंक एम्प्लॉइज (NCBE) के महामंत्री डीके सिंह ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में जब रिजर्व बैंक (RBI), LIC, सेबी (SEBI), नाबार्ड (NABARD) और यहाँ तक कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) जैसे विभागों में पांच कार्य दिवस की व्यवस्था लागू है, तो बैंककर्मियों के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है।
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| धरना प्रदर्शन के दौरान मौजूद बैंक कर्मचारी। |
हम अतिरिक्त समय देने को तैयार : UFBU
फोरम के जिला संयोजक अनिल श्रीवास्तव ने बताया कि हड़ताल पर जाने से पहले यूनियन ने सरकार को हर तरह से मनाने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा, "हमने धरना दिया, रैलियां निकालीं और सोशल मीडिया (X) पर बड़े स्तर पर अभियान चलाया। फिर भी सरकार हमारी उचित मांग को अनसुना कर रही है।
वहीं, कॉमरेड आरएन शुक्ला ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखते हुए कहा कि बैंक कर्मचारी महीने के सभी शनिवारों की छुट्टी के बदले प्रतिदिन 40 मिनट अतिरिक्त कार्य करने को तैयार हैं। यह समझौता बैंक प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच संतुलन बनाने का एक बेहतर रास्ता हो सकता है, लेकिन सरकार की हठधर्मिता इसमें सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।
IBA ने दी सहमति, सरकार के पास अटका प्रस्ताव
सभा को संबोधित करते हुए कॉमरेड एसके संगतानी ने बताया कि इंडियन बैंक एसोसिएशन (IBA) ने पांच दिवसीय बैंकिंग के प्रस्ताव को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया है। आईबीए ने इसे अंतिम अनुमोदन के लिए वित्त मंत्रालय (DFS) के पास भेज रखा है। इसके बावजूद, केंद्र सरकार इस पर कुंडली मारकर बैठी है, जिससे लाखों बैंककर्मियों में भारी रोष है।
लखनऊ में बैंकिंग सेवाओं पर बड़ा प्रहार
मीडिया प्रभारी अनिल तिवारी द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, लखनऊ में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की 905 शाखाओं के लगभग 16,000 कर्मचारी और अधिकारी इस हड़ताल में शामिल हुए।
क्लीयरिंग प्रभावित : लगभग 2500 करोड़ रुपये के चेक और ट्रांजेक्शन रुक गए।
शाखाएं बंद : हजरतगंज, आलमबाग, गोमती नगर और चौक जैसे प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में बैंक शाखाओं पर ताले लटके रहे।
नकदी का संकट : हालांकि एटीएम सेवाओं को हड़ताल से बाहर रखने का प्रयास किया गया, लेकिन कई स्थानों पर कैश न होने की वजह से ग्राहकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
अनिश्चितकालीन हड़ताल की ओर बढ़ सकते कदम
यूनियन नेताओं ने दो टूक शब्दों में सरकार को चेतावनी दी है। कॉमरेड मनमोहन दास ने कहा कि 5-day banking उनका संवैधानिक अधिकार है और इसके लिए वे लंबी कानूनी और सड़क की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।
संदीप सिंह, लक्ष्मण सिंह, शकील अहमद, वीके माथुर और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने संयुक्त बयान में कहा कि बैंक हड़ताल के कारण आम जनता को होने वाली असुविधा की पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है। यदि सरकार ने शीघ्र ही हमारी मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाया, तो बैंककर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल जैसे कठोर कदम उठाने को मजबूर होंगे।
तनाव और वर्क-लाइफ बैलेंस का मुद्दा
प्रदर्शन में शामिल महिला बैंककर्मियों, जिनमें विशाखा वर्मा और स्वाति सिंह शामिल थीं, ने वर्क-लाइफ बैलेंस का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बैंकों में बढ़ता स्टाफ संकट और अतिरिक्त काम का बोझ कर्मियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। वीके सेंगर और राकेश पाण्डेय ने भी जोर देकर कहा कि बेहतर कार्यक्षमता के लिए सप्ताह में दो दिन का अवकाश अनिवार्य है।
उपस्थित प्रमुख बैंक नेता
अनिल श्रीवास्तव, डीके सिंह, आरएन शुक्ला, एसके संगतानी, मनमोहन दास, शकील अहमद, संदीप सिंह, वीके माथुर, बीडी पांडेय, विभाकर कुशवाहा, आनंद सिंह, प्रीति वर्मा, अनुषा दुबे, ललित श्रीवास्तव, मनीषकांत आदि।
प्रदर्शन केंद्र सरकार के लिए एक कड़ा संदेश
लखनऊ का प्रदर्शन केंद्र सरकार के लिए एक कड़ा संदेश है। बैंकों का निजीकरण, स्टाफ की कमी और अब 5-दिवसीय बैंकिंग की मांग ने बैंककर्मियों को एकजुट कर दिया है। अब गेंद सरकार के पाले में है, क्या वह बैंकिंग क्षेत्र की इस जायज मांग को मानकर गतिरोध समाप्त करेगी या देश एक और बड़ी आर्थिक तालाबंदी की ओर बढ़ेगा।




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