शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने विवाद के बाद 18 दिन पहले ही प्रयागराज Prayagraj माघ मेला Magh Mela छोड़ दिया है। प्रशासन की पालकी और पुष्प वर्षा के प्रस्ताव को ठुकरा कर वे काशी रवाना हो गए। पढ़ें पूरी खबर।
व्यथित मन से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने छोड़ा माघ मेला, प्रशासन का 'शाही स्नान' का प्रस्ताव भी ठुकरायाप्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, प्रयागराज
संगम की रेती पर चल रहे आस्था के सबसे बड़े केंद्र 'माघ मेला' से बड़ी खबर सामने आई है। ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने माघ मेला क्षेत्र को अलविदा कह दिया है। बुधवार सुबह एक भावुक प्रेसवार्ता के बाद वे प्रयागराज से काशी (वाराणसी) के लिए रवाना हो गए।
बिना स्नान किए जा रहा हूं : शंकराचार्य का दर्द
शंकराचार्य ने प्रेसवार्ता के दौरान अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि आज मेरा मन इतना व्यथित है कि बिना स्नान किए ही प्रयागराज माघ मेला क्षेत्र से विदा ले रहा हूं। मैं यहाँ श्रद्धा और शांति की उम्मीद लेकर आया था, लेकिन जो हुआ उसकी मैंने कभी कल्पना नहीं की थी। उन्होंने कहा कि इस घटना ने उनकी आत्मा को झकझोर दिया है। न्याय व मानवता के प्रति उनका विश्वास कमजोर हुआ है।
प्रशासन के प्रस्ताव को किया अस्वीकार
विवाद को शांत करने के लिए माघ मेला प्रशासन ने शंकराचार्य को एक प्रस्ताव भेजा था, जिसमें उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ पालकी में बैठाकर संगम स्नान कराने और उन पर पुष्प वर्षा करने की बात कही गई थी।
शंकराचार्य का कड़ा रुख
कल प्रशासन की ओर से प्रस्ताव मिला था, लेकिन मैंने उसे ठुकरा दिया। जब दिल में दुख और गुस्सा हो, तो पवित्र पानी भी आत्मा को शांति नहीं दे पाता।
विवाद की मुख्य वजह और घटनाक्रम
शंकराचार्य का यह निर्णय अचानक नहीं था, बल्कि पिछले कुछ दिनों से प्रशासन के साथ चल रही तनातनी का परिणाम है।
मौनी अमावस्या विवाद
विवाद की शुरुआत मौनी अमावस्या के दिन हुई, जब प्रशासन के साथ कुछ मुद्दों पर तीखी नोकझोंक हुई। इसके विरोध में उन्होंने उस दिन स्नान नहीं किया था।
वसंत पंचमी स्नान का किया त्याग
विरोध स्वरूप शंकराचार्य ने वसंत पंचमी के महत्वपूर्ण पर्व पर भी संगम में डुबकी नहीं लगाई।
18 दिन पहले रवानगी
माघ मेला 15 फरवरी तक चलना है, लेकिन विवाद के चलते शंकराचार्य ने समय से 18 दिन पहले ही मेला क्षेत्र छोड़ दिया।
अब दो प्रमुख स्नानों में नहीं होंगे शामिल
शंकराचार्य के जाने से अब वे मेले के अंतिम दो प्रमुख स्नान पर्वों में शामिल नहीं होंगे।
माघी पूर्णिमा : 1 फरवरी
महाशिवरात्रि : 15 फरवरी
प्रयागराज माघ मेला प्रशासन के लिए शंकराचार्य का इस तरह बीच में मेला छोड़कर जाना एक बड़ी चुनौती और चर्चा का विषय बना हुआ है।

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