Ayodhya : Shri Ram mandir मानस पाठ में भक्तिभाव में झूमे श्रद्धालु

मानस पाठ करते सदस्य।

प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, अयोध्या 

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र द्वारा आयोजित द्वितीय प्रतिष्ठा द्वादशी महोत्सव के तीसरे दिन अयोध्याकाण्ड में सुंदर बालकों को देख कर उनके सौन्दर्य वर्णन व सीता के सकुचाने से नह्वान के चौथे विश्राम के बाद पाठ शुरू हुआ। कार्यक्रम में मानस प्रेमी श्रोता भी गायक टीम के साथ रामचरितमानस का पाठ करते रहे।

पाठ करते भक्त।
श्री श्री मां आनंदमयी मानस परिवार कानपुर द्वारा "सीता राम चरण रति मोरे, अनुदिन बढ़उं अनुग्रह तोरे" संपुट के साथ व्यास कानपुर के योगेश भसीन ने श्रीरामचरितमानस के दूसरे सोपान अयोध्याकाण्ड के चौथे नह्वान विश्राम "कोटि मनोज लजावनि हारे। सुमुखि कहहु को अहहिं तुम्हारे।।" के स्वर से पूरा पंडाल भक्ति रस से ओतप्रोत हो गया। इसी तरह पांचवे नह्वान के अंतिम दोहा "राम सैल सोभा निरखि भरत ह्रदय अति पेमु। तापस तपफलु पाइ जिमि सुखी सिरानें नेमु।।" तक सभी श्रोता औऱ वाचक मानस के रस में आकंठ डूबे रहे। पांचवे नह्वान विश्राम के बाद चौपाई "तब केवट ऊँचे चढि धाई। कहेउ भरत सन भुजा उठाई।।" से दूसरे व्यास स्वामी विज्ञानानन्द ने मानस के तीसरे सोपान अरण्यकाण्ड में प्रवेश करते हुए नह्वान के छठे विश्राम के दोहा "हारि परा खल बहु विधि भय अरु प्रीति देखाइ। तब असोक पादप तर राखिसि जतन कराइ।।"तक सस्वर परायण कर सबको विभोर किया। 

मानस पाठ करते भक्त।

संगीतमय श्रीरामचरितमानस पाठ 23 सदस्यों द्वारा क्रमशः प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम संयोजक प्रेम प्रकाश मिश्र के अनुसार समन्वयक व्यास योगेश भसीन, कुमार गौरव शुक्ला, ऋषिकेश निवासी स्वामी विज्ञानानंद, मुरैना के राजेश ठाकुर की देख रेख में मानस पाठी शास्त्रीय एवं सामान्य स्वरों में पाठ करते रहे। कार्यक्रम का सहयोगी मुख्यरूप से सत्येंद्र श्रीवास्तव, अजय कुमार मिश्रा, धनंजय पाठक, रामशंकर उर्फ़ टिन्नू, अश्वनी अग्रवाल आदि ने किया।


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