Ayodhya श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की प्रतिष्ठा द्वादशी : देश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आजादी का दिन है

बालक राम' की कथा करते जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य।

प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, अयोध्या

अयोध्या की पावन धरती 'बालक राम' की कथा के दौरान आध्यात्मिक चेतना से गूंज उठी। जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य ने व्यास गद्दी से समाज को संबोधित करते हुए कहा कि प्रतिष्ठा द्वादशी केवल एक तिथि नहीं है, बल्कि देश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आजादी का दिवस है।  

"अब सोए तो पुनः समाप्त हो जाएंगे मंदिर"  

स्वामी जी ने कहा कि आज रामलला अपने भव्य मंदिर में विराजमान हैं, लेकिन यह गौरव लंबे संघर्ष और बलिदान के बाद मिला है। उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज ने अब भी निद्रा नहीं त्यागी और जागृत नहीं हुआ, तो आने वाले समय में मंदिरों पर संकट आ सकता है। इसलिए वर्तमान पीढ़ी को अपनी परंपराओं के प्रति सजग और गतिमान रहना होगा।

भजन के साथ सत्संग की अनिवार्यता  

कथा के दौरान स्वामी जी ने भक्ति मार्ग पर प्रकाश डालते हुए कहा कि केवल एकांत में भजन करना पर्याप्त नहीं है। सज्जनों की संगति और साधु-संगति के बिना भजन करने से व्यक्ति में अहंकार आ सकता है।  

उन्होंने उदाहरण देकर समझाया कि निर्गुण और सगुण में उतना ही अंतर है, जितना बर्फ और पानी में। जब अधर्म बढ़ता है, तब निराकार ईश्वर 'बालक राम' के रूप में सगुण देह धारण कर सज्जनों की पीड़ा हरने आते हैं।  

असुर प्रवृत्ति की पहचान  

स्वामी रामदिनेशाचार्य ने समाज में 'असुरों' की परिभाषा स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि जो लोग अपने माता-पिता और देवताओं का सम्मान नहीं करते हैं।  साधु-संतों और सज्जनों से अपनी सेवा करवाते हैं।  वे मनुष्य देह में होते हुए भी असुर प्रवृत्ति के हैं। उन्होंने कहा कि जिसने अपने मन का मंथन कर उसे 'भक्ति रूपी मक्खन' बना लिया, वह फिर संसार के बंधनों में नहीं फँसता है।

अयोध्या में गूंजा 'भय प्रकट कृपाला'  

कथा के दौरान श्रीराम जन्मोत्सव का भव्य आयोजन हुआ। जैसे ही राम जन्म का प्रसंग आया, पूरा वातावरण उल्लास से भर गया। भक्तों के बीच कॉपियां, चॉकलेट और खिलौने बांटे गए। श्रोता "जो करते रहोगे भजन धीरे-धीरे..." जैसे भजनों पर मंत्रमुग्ध होकर झूम उठे।  

कार्यक्रम में राम मंदिर ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र, धनंजय पाठक, टिन्नू, और डॉ. चंद्रगोपाल पाण्डेय सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने व्यास गद्दी का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।  


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