Prarabdh Dharm-Aadhyatm : आज का पंचांग (14 मार्च 2024)

दिनांक - 14 मार्च 2024,दिन - गुरूवार

विक्रम संवत - 2080

शक संवत -1945

अयन - उत्तरायण

ऋतु - वसंत ॠतु

मास - फाल्गुन

पक्ष - शुक्ल

तिथि - पंचमी रात्रि 11:25 तक तत्पश्चात षष्ठी

नक्षत्र - भरणी  शाम 04:56 तक तत्पश्चात कृत्तिका

योग - वैधृति रात्रि 10:00 तक तत्पश्चात विष्कंभ

राहुकाल - दोपहर 02:18 से शाम 03:48 तक

सूर्योदय-06:49

सूर्यास्त- 18:46

दिशाशूल - दक्षिण दिशा में

व्रत-उपवास - षडशीति-मीन संक्राति (पुण्यकाल:दोपहर 12:46 से सूर्यास्त तक)

विशेष - पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
             

गरुड़ पुराण के अनुसार 


गरुण पुराण, वेदव्यास जी द्वारा रचित 18 पुराणो में से एक है। गरुड़ पुराण में 279 अध्याय तथा 18000 श्र्लोक हैं। इस ग्रंथ में मृत्यु पश्चात की घटनाओं, प्रेत लोक, यम लोक, नरक तथा 84 लाख योनियों के नरक स्वरुपी जीवन आदि के बारे में विस्तार से बताया गया है। इसके अलावा भी इस ग्रन्थ में कई मानव उपयोगी बातें लिखी है जिनमे से एक है कि किस तरह के लोगों के घर भोजन नहीं करना चाहिए।

क्योंकि एक पुरानी कहावत है, जैसा खाएंगे अन्न, वैसा बनेगा मन। यानी हम जैसा भोजन करते हैं, ठीक वैसी ही सोच और विचार बनते हैं।

 इसका सबसे सशक्त उदाहरण महाभारत में मिलता है जब तीरों की शैय्या पर पड़े भीष्म पितामह से द्रोपदी पूंछती है- "आखिर क्यों उन्होंने भरी सभा में मेरे चीरहरण का विरोध नहीं किया जबकी वो सबसे बड़े और सबसे सशक्त थे।" तब भीष्म पितामह कहते है की मनुष्य जैसा अन्न खाता है वैसा ही उसका मन हो जाता है। उस वक़्त मैं  कौरवों का अधर्मी अन्न खा रहा था इसलिए मेरा दिमाग भी वैसा ही हो गया और मुझे उस कृत्य में कुछ गलत नज़र नहीं आया।


हमारे समाज में एक परंपरा काफी पुराने समय से चली आ रही है कि लोग एक-दूसरे के घर पर भोजन करने जाते हैं। कई बार दूसरे लोग हमें खाने की चीजें देते हैं। वैसे तो यह एक सामान्य सी बात है, लेकिन इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि किन लोगों के यहां हमें भोजन नहीं करना चाहिए।

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