Ayurvedic Medicine : ऋतु के हिसाब से आहार-विहार करे रोगों से बचाव

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  • सर्दियों के मौसम में कफ अधिक बनने लगता है, पित का भी होता है समन 

    सेहत के लिए लाभकारी है मौसम, पाचन क्षमता यानी जठराग्नि भी बढ़ जाती 

 




प्रारब्ध न्यूज डेस्क, लखनऊ


मौसम में तेजी से बदलाव हो रहा है। गर्मी का मौसम खत्म हो रहा है और सर्दी दस्तक देने की तैयारी में है। सुबह और शाम गुलाबी ठंड पड़ रही है, जबकि दिनभर गर्मी रहती है।तापमान की इस उठापटक में बैक्टीरिया व वायरस तेजी से सक्रिय हो जाते हैं, जो तरह-तरह की बीमारियों की वजह बनते हैं। ऊपर से प्रदूषण, गंदगी और दूषित पानी और खानपान में जरा सी चूक होने पर शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने से बैक्टीरिया वायरस हमला कर देते हैं। इसलिए हर घर में खांसी, जुकाम, बुखार और सांस की समस्या से बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक पीड़ित हैं। आयुर्वेद में ऋतु के अनुसार आहार-विहार अपना कर मौसमी रोगों से बचाव कर सकते है। इसके लिए हम प्रकृति प्रदत्त जड़ी-बूटियों का सेवन, पथ्य व अपथ्य का पालन करते हुए स्वयं और स्वजन को सेहतमंद रख सकते हैं।

सर्दियों में खानपान बेहतर कर बनें तंदरुस्त

हेमंत, शिशिर और शीत ऋतु का मौसम नवंबर से फरवरी तक होता है, जो सेहत के लिए उपयोगी है। इस ऋतु में कफ अधिक बनता है और पित का समन होता है। इस दौरान पाचन की अग्नि यानी जठराग्नि बढ़ने से पौष्टिक आहार आसानी से पचते हैं। रात लंबी होने से भोजन को पचने में पर्याप्त समय मिलता है। सर्दियों में खानपान बेहतर कर अपने को तंदरुस्त रख सकते हैं। सुबह नाश्ते में रात को भीगोए चने लें। गुनगुना पानी पीएं और ताजा भोजन करें। ऐसा करने से सर्दी-जुकाम, नजला, खांसी-श्वांस रोग, दमा और कफ का प्रकोप कम होता है। ध्यान रहे, मधुमेह पीड़ित परहेज करते रहें।

ऐसा करना लाभकारी

सुबह सूर्य नमस्कार करें, टहलने जाएं, अश्वगंधा की जड़ से बने पाक चूर्ण, टेबलेट या कैप्सूल्स का सेवन करें। शिलाजीत, बादाम पाक, मूसली, सतावर, आंवला से बने पाक और बादाम तेल या अलसी का तेल लाभकारी होता है।


इन जड़ी बूटियों के काढ़े का नियमित करें सेवन


गुर्च, कच्ची हल्दी, कालमेघ, चिरायता, अडूसा, मुलेठी, नागर मोथा, छोटी पीपल, सोंठ, तुलसी, काली मिर्च, कुटकी, पित्त पापड़ा सभी को मिलाकर चूर्ण तैयार कर लें। इसका चूर्ण बाजार में भी मिलता है। इस चूर्ण की सही मात्रा से ताज़ा काढ़ा बनाकर नियमित सुबह ले सकते हैं। काढ़ा नहीं पसंद है तो शहद के साथ सेवन कर सकते हैं। इसके सेवन से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

गुलोय में अधिक मात्रा में एंटीआक्सीडेंट


गुलोय (गुर्च) में अधिक मात्रा में एंटीआक्सीडेंट पाए जाते हैं।इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और कैंसर रोधी गुण भी होते हैं।इस वजह से बुखार, पीलिया, गठिया, मधुमेह, कब्ज़, एसिडिटी, अपच, मूत्र संबंधी बीमारियों में सेवन उपयोगी व राहत प्रदान करने वाला होता है।


कालमेघ में एंटीबैक्टीरियल गुण


कालमेघ में एंटीबैक्टीरियल के साथ-साथ एंटी आक्सीडेंट गुण हैं। यह सामान्य बुखार से लेकर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर है। इसके अलावा गैस की समस्या, पेट के कीड़े, कब्ज, लिवर की समस्याओं के इलाज में उपयोगी है। कालमेघ पेट में जलन, सूजन कम करने एवं लिवर की सुरक्षा संबंधी गुण भी होते हैं।


कच्ची हल्दी इंफेक्शन व एलर्जी में कारगर


खांसी-जुकाम दूर करने में कच्ची हल्दी बेहद फायदेमंद है।कच्ची हल्दी दूध में उबालकर पीने से खांसी-जुकाम, गले व फेफड़े में इंफेक्शन भी दूर होते हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में कारगर घरेलू उपाय है।


नागरमोथा भूख बढ़ाए-पाचन विकार दूर करे 


भूख बढ़ाने और पाचन विकार को ठीक करने में नागरमोथा कारगर जड़ी बूटी है। अधिक प्यास लगने, बुखार और पेट में कीड़े होने पर नागरमोथा के सेवन से लाभ मिलता है।


अडूसा हृदय व श्वसन रोग में उपयोगी


अडूसा वातकारक और कफ पित्त कम करने वाली जड़ी बूटी है।हृदय रोग एवं श्वसन तंत्र की उपयोगी औषधि है। इसका उपयोग स्वर के लिए उत्तम, हृदय रोग से जुड़ी बीमारियों, रक्त संबंधी बीमारी, प्यास, श्वांस संबंधी बीमारी, बुखार, वमन, प्रमेह, कोढ़ तथा क्षय रोग में भी लाभप्रद है।


फेफड़ों के लिए शहद व सोंठ बेहतर


फेफड़ों से जुड़ी समस्या में शहद में सोंठ मिलाकर सेवन करना बेहतर होता है। गले की खराश दूर करने में भी उपयोगी है।इसका सेवन कमजोरी दूर करने के साथ वजन भी कम करता है।खांसी-जुकाम, बुखार और हड्डियों से जुड़ी समस्या में भी फायदेमंद है।


तुलसी नैचुरल इम्यूनिटी बूस्टर

तुलसी विटामिन सी और जिंक से भरपूर होती है, इसलिए इसे नैचुरल इम्यूनिटी बूस्टर (प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली) कहते हैं।खांसी और कम कम होता है।कैंसर रोधी, त्वचा और बालों के लिए भी उपयोगी है।मुंह की सेहत के लिए बेहतरीन है।इसके सेवन से तनाव और थकान कम होती है। किडनी स्टोन में भी इसका सेवन उपयोगी है।

मुलेठी भी एक आयुर्वेदिक औषधि

मुलेठी कैल्शियम, ग्लिसराइजिक एसिड, एंटीआक्सिडेंट, एंटीबैक्टीरियल और प्रोटीन से भरपूर जड़ीबूटी है।इसे चूसने से खांसी और गले की खराश दूर होती है। खांसी, जुकाम से लेकर वायरल फ्लू में बचाने के भी गुण होते हैं।

छोटी पीपल में बड़े-बड़े गुण

छोटी पीपल में बड़े औषधीय गुण हैं। छोटी पीपल में मोटापे को कम करने में सहायक है। इसके अलावा छुआ-छूत यानी संक्रामक रोगों से बचाव कारगर है। यह टीबी, दिल की बीमारी, सांस रोग और सिरदर्द, खांसी-जुकाम में भी लाभकारी है।

कब्ज दूर भगाएं सौंफ, सोंठ व मेथी

सौंफ के साथ सोंठ का सेवन कब्ज को दूर भगाने के साथ पाचन क्रिया को भी दुरुस्त करता है। पाचन तंत्र की समस्या में कमाल की औषधि है। खाना खाने के बाद पेट फूलने पर इसका सेवन रामवाण साबित होता है। कब्ज की जटिल समस्या में सौंफ, सोंठ के साथ मेथी के दानों का सेवन दूध के साथ करना फायदेमंद होता है।

इनका भी करें सेवन

दूध-घी, राबड़ी-मलाई, गाजर का हलवा, पनीर-छेना, मौसमी फल, शहद, खजूर, तिल, अलसी बीज, मूंगफली, गाजर, गुड़, सिंघाड़ा, आंवला, शक्करकंद, मेवा मखाना का सेवन फायदेमंद साबित होता है।

राजेश शुक्ला।

मौसम में परिवर्तन से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में रोगों से बचाव के लिए बड़ी हरड़ के चूर्ण में आधा भाग सोंठ मिलाएं, उसमें पीपर का आठवां भाग मिला कर सुबह एक ग्राम लें। खाने से पहले सोंठ और गुड़ मिला कर सेवन करें। घर में बना आयुर्वेद काढ़ा बना लें। जडी-बूटी मुलेठी, अडूसा, पिपली, लौंग, इलायची, दालचीनी, गिलोय, काली मिर्च, अश्वगंधा, सोंठ मिलाकर कर सेवन करें। सुबह तेल की मालिश के साथ उबटन लगाने के बाद स्नान करना लाभकारी होता है।


राजेश शुक्ला, वैद्य एवं जड़ी-बूटी विशेषज्ञ।  




डॉ. ब्रजेश कटियार।

सर्दियों के मौसम में भूख को नहीं मारना चाहिए, क्योंकि पाचन शक्ति प्रबल होती है। समय पर भोजन नहीं करने से स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। शरीर की जरूरत के अनुसार पौष्टिक आहार नहीं मिलने पर बढ़ी हुई जठराग्नि शरीर की धातुओं को जलाने लगती है। इस वजह से वात प्रभावित होता है। इस मौसम में उपवास कम करें।

डाॅ. ब्रजेश सिंह कटियार, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी।

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