Prarabdh Dharm-Aadhyatm : आज का पंचांग (16 फरवरी 2022)

0

16 फरवरी, दिन : बुद्धवार


विक्रम संवत : 2078 (गुजरात - 2077)


शक संवत : 1943



अयन : उत्तरायण


 ऋतु : शिशिर


मास : माघ (गुजरात एवं महाराष्ट्र के अनुसार - पौष)


पक्ष : शुक्ल


तिथि - पूर्णिमा रात्रि 10:25 तक तत्पश्चात प्रतिपदा


नक्षत्र - अश्लेशा शाम 03:14 तक तत्पश्चात मघा


योग - शोभन रात्रि 08-44 तक तत्पश्चात अतिगण्ड


राहुकाल - दोपहर 12:53 से दोपहर 02:19 तक


सूर्योदय - 07:09


सूर्यास्त - 18:35


दिशाशूल - उत्तर दिशा में


पंचक


पंचक का आरंभ 28 मार्च 2022, सोमवार को 23.56 पीएम से 

पंचक का समापन- 2 अप्रैल 2022, शनिवार को 29.24 मिनट पर।


एकादशी


रविवार, 26 फरवरी 2022- विजया एकादशी

सोमवार, 14 मार्च 2022- आमलकी एकादशी

सोमवार, 28 मार्च 2022- पापमोचनी एकादशी


प्रदोष


28 फरवरी, दिन: सोमवार, सोम प्रदोष व्रत, पूजा मुहूर्त: शाम 06:20 बजे से रात 08:49 बजे तक


15 मार्च, दिन: मंगलवार, भौम प्रदोष व्रत, पूजा मुहूर्त: शाम 06:29 बजे से रात 08:53 बजे तक


29 मार्च, दिन: मंगलवार, भौम प्रदोष व्रत, पूजा मुहूर्त: शाम 06:37 बजे से रात 08:57 बजे तक


पूर्णिमा


16 फरवरी, दिन: बुधवार: माघ पूर्णिमा


17 मार्च, दिन: गुरुवार: फाल्गुन पूर्णिमा


अमावस्या

 

फाल्गुन अमावस्या बुधवार 2 मार्च, 2022।


व्रत पर्व विवरण - व्रत पूर्णिमा, माघी पूर्णिमा, माघ स्नान समाप्त, संत रविदास जी जयंती


विशेष - पूर्णिमा

          

कष्ट-बाधा और पितृदोष का उपाय


 सदगुरु या इष्ट का ध्यान करते हुए निम्नलिखित शिव-गायत्री मंत्र की एक माला सुबह अथवा शाम की संध्याओं में कभी भी कुछ दिन जपने से पितृदोष, कष्ट-बाधा दूर हो जाते हैं तथा पितर भी प्रसन्न होते हैं | जब पितर प्रसन्न होते हैं तो घर में सुख-समृद्धि, वंशवृद्धि व सर्वत्र उन्नति देते हैं |


मंत्र


ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि | तन्नो रुद्र: प्रचोदयात्  ||


माघी पूर्णिमा


16 फरवरी, बुधवार माघ मास की पूर्णिमा है। धर्म ग्रंथों में इसे माघी पूर्णिमा कहा गया है। इस पूर्णिमा पर संयम से रहना, सुबह स्नान करना एवं व्रत, दान करना आदि नियम बताए  गए हैं। इस समय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। इसलिए इस समय व्रत करने से शरीर रोगग्रस्त नहीं होता एवं आगे आने वाले समय के लिए सकारात्मकता प्राप्त होती है।


माघी पूर्णिमा की सुबह स्नान आदि करने के बाद भगवान विष्णु की पूजा करें। फिर पितरों का श्राद्ध कर निशक्तजनों को भोजन, वस्त्र, तिल, कंबल, कपास, गुड़, घी, जूते, फल, अन्न आदि का दान करें। इस दिन सोने एवं चांदी का दान भी किया जाता है। गौ दान का विशेष फल प्राप्त होता है।


इसी दिन संयमपूर्वक आचरण कर व्रत करें। इस दिन ज्यादा जोर से बोलना या किसी पर क्रोध नहीं करना चाहिए। गृह क्लेश से बचना चाहिए। गरीबों एवं जरुरतमंदों की सहायता करनी चाहिए। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि आपके द्वारा या आपके मन, वचन या कर्म के माध्यम से किसी का अपमान न हो। इस प्रकार संयमपूर्वक व्रत करने से व्रती को पुण्य फल प्राप्त होते हैं।

Post a Comment

0 Comments

if you have any doubt,pl let me know

Post a Comment (0)
To Top