Prarabdh Dharm-Aadhyatm : आज का पंचांग (14 फरवरी 2022)


14 फरवरी, दिन : सोमवार


विक्रम संवत : 2078 (गुजरात - 2077)


शक संवत : 1943



अयन : उत्तरायण


 ऋतु : शिशिर


मास : माघ (गुजरात एवं महाराष्ट्र के अनुसार - पौष)


पक्ष : शुक्ल


तिथि - त्रयोदशी रात्रि 08:28 तक तत्पश्चात चतुर्दशी


नक्षत्र - पुनर्वसु सुबह 11:53 तक तत्पश्चात पुष्य


योग - आयुष्मान रात्रि 09:29 तक तत्पश्चात सौभाग्य


राहुकाल - सुबह 08:36 से सुबह 10:01 तक


सूर्योदय - 07:10


सूर्यास्त - 18:34


दिशाशूल - पूर्व दिशा में


व्रत पर्व विवरण -सोमप्रदोष व्रत,विश्वकर्मा जयंती, मातृ पितृ पूजन दिवस


विशेष - त्रयोदशी 

        

प्रदोष व्रत


हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक महिने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है। ये व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। इस बार 14 फरवरी, सोमवार को सोमप्रदोष व्रत है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। प्रदोष पर व्रत व पूजा कैसे करें और इस दिन क्या उपाय करने से आपका भाग्योदय हो सकता है।


 व्रत व पूजा


- प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान शंकर, पार्वती और नंदी को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराएं।

- इसके बाद बेल पत्र, गंध, चावल, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य (भोग), फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची भगवान को चढ़ाएं।

- पूरे दिन निराहार रहें और शाम को दुबारा इसी तरह से शिव परिवार की पूजा करें।

- भगवान शिवजी को घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाएं। आठ दीपक आठ दिशाओं में जलाएं।

- भगवान शिवजी  की आरती करें। भगवान को प्रसाद चढ़ाएं और उसी से अपना व्रत भी तोड़ें।उस दिन  ब्रह्मचर्य का पालन करें। 


सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद तांबे के लोटे से सूर्यदेव को अर्ध्य देें। पानी में आकड़े के फूल जरूर मिलाएं। आंकड़े के फूल भगवान शिवजी  को विशेष प्रिय हैं । ये उपाय करने से सूर्यदेव सहित भगवान शिवजी  की कृपा भी बनी रहती है और भाग्योदय भी हो सकता है।

              

माघ मास के महत्त्वपूर्ण 3 दिन


पूरे माघ मास के पुण्यो की प्राप्ति सिर्फ तीन दिन में 

 माघ मास में त्रयोदशी से पूनम तक के तीन दिन  सोमवार, मंगलवार और बुधवार को अत्यंत पुण्यदायी तिथियाँ हैं।

माघ मास में सभी दिन अगर कोई स्नान ना कर पाए तो त्रयोदशी, चौदस और पूनम ये तीन दिन सुबह सूर्योदय से पूर्व स्नान कर लेने से पूरे माघ मास के स्नान के पुण्यो की प्राप्ति होती है l

सकाम भावना से माघ महीने का स्नान करने वाले को मनोवांछित फल प्राप्त होता है लेकिन निष्काम भाव से कुछ नही चाहिए खाली भागवत प्रसन्नता, भागवत प्राप्ति के लिए माघ का स्नान करता है, तो उसको भगवत प्राप्ति में भी बहुत-बहुत आसानी होती है |

‘पद्म पुराण’ के उत्तर खण्ड में माघ मास के माहात्म्य का वर्णन करते हुए कहा गया है कि व्रत, दान व तपस्या से भी भगवान श्रीहरि को उतनी प्रसन्नता नहीं होती, जितनी माघ मास में ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नानमात्र से होती है।

इन तीन दिन विष्णु सहस्रनाम पाठ और गीता का पाठ भी अत्यंत प्रभावशाली और पुण्यदायी है l

माघ मास का इतना प्रभाव है की सभी जल गंगा जल के तीर्थ पर्व के समान हैं |

पुष्कर, कुरुक्षेत्र, काशी, प्रयाग में 10 वर्ष पवित्र शौच, संतोष आदि नियम पालने से जो फल मिलता है माघ मास में 3 दिन स्नान करने से वो मिल जाता है, खाली ३ दिन | माघ मास प्रात:स्नान सब कुछ देता है | आयु, आरोग्य, रूप, बल, सौभाग्य, सदाचरण देता है |

अतः माघ मास की त्रयोदश  चौदस  पूर्णिमा  को सूर्योदय से पूर्व स्नान ,विष्णु सहस्रनाम और श्रीमद भागवत गीता का पाठ विशेषतः करें और लाभ लें l

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