Prarabdh Dharm-Aadhyatm : आज का पंचांग एवं व्रत-त्योहार (9 जून, 2021)

दिनांक : 9 जून 2021, दिन : बुद्धवार


विक्रम संवत : 2078 (गुजरात - 2077)


शक संवत : 1943


अयन : उत्तरायण


ऋतु : ग्रीष्म


मास : ज्येष्ठ 


पक्ष : कृष्ण


तिथि - चतुर्दशी दोपहर 01:57 तक तत्पश्चात अमावस्या


नक्षत्र - कृत्तिका सुबह 08:44 तक तत्पश्चात रोहिणी


योग - सुकर्मा सुबह 06:48 तक तत्पश्चात धृति


राहुकाल - दोपहर 12:38 से दोपहर 02:18 तक


दिशाशूल - उत्तर दिशा में


सूर्योदय : प्रातः 05:57 बजे


सूर्यास्त : संध्या 19:18 बजे


व्रत पर्व विवरण - 

विशेष

चतुर्दशी और अमावस्या के दिन ब्रह्मचर्य पालन करे तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
               

पंचक


28 जून प्रात: 12.57 बजे से 3 जुलाई प्रात: 6.15 बजे तक


व्रत-त्योहार


एकादशी


21 जून, सोमवार : निर्जला एकादशी


प्रदोष


22 जून, मंगलवार : भौम प्रदोष


अमावस्या


10 जून, बृहस्पतिवार : ज्येष्ठ अमावस्या


नकारात्मक ऊर्जा मिटाने के लिए

10 जून 2021 गुरुवार को अमावस्या है ।

घर में हर अमावस अथवा हर १५ दिन में पानी में खड़ा नमक (१ लीटर पानी में ५० ग्राम खड़ा नमक) डालकर पोछा लगायें । इससे नेगेटिव एनेर्जी चली जाएगी । अथवा खड़ा नमक के स्थान पर गौझरण अर्क भी डाल सकते हैं ।
      

अमावस्या

अमावस्या के दिन जो वृक्ष, लता आदि को काटता है अथवा उनका एक पत्ता भी तोड़ता है, उसे ब्रह्महत्या का पाप लगता है  (विष्णु पुराण)

          
अगर किसी ने आपके व्यवसाय में टोटका कर दिया है या दुकान को बांध दिया है तो उसे दूर करने के लिए रविवार के दिन दोपहर में पांच नींबू काटकर व्यापारिक प्रतिष्ठान में रख दें। इसके साथ एक मुट्ठी काली मिर्च और एक मुट्ठी पीली सरसों रख दें। अगले दिन सुबह दुकान खोलने के बाद इन सभी सामानों को उठाकर किसी सूनसान स्थान पर ले जाकर रख आएं।ऐसा ५ रविवार करे तो
बुरी नजर और बंदिश दोनों दूर हो जाएंगी।

धन-धान्य व सुख-संम्पदा के लिए

हर अमावस्या को घर में एक छोटा सा आहुति प्रयोग करें।

सामग्री : १. काले तिल, २. जौं, ३. चावल, ४. गाय का घी, ५. चंदन पाउडर, ६. गूगल, ७. गुड़, ८. देशी कर्पूर, गौ चंदन या कण्डा।

विधि: गौ चंदन या कण्डे को किसी बर्तन में डालकर हवनकुंड बना लें, फिर उपरोक्त ८ वस्तुओं के मिश्रण से तैयार सामग्री से, घर के सभी सदस्य एकत्रित होकर नीचे दिये गये देवताओं की १-१ आहुति दें।

आहुति मंत्र

ॐ कुल देवताभ्यो नमः
 ॐ ग्राम देवताभ्यो नमः
ॐ ग्रह देवताभ्यो नमः
ॐ लक्ष्मीपति देवताभ्यो नमः
ॐ विघ्नविनाशक देवताभ्यो नम

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