Health & Fitness : मधुमेह से नसों में कमजोरी से नपुंसकता

मधुमेह पीड़ितों में से 10-15 फीसद में नसों की कमजोरी से हो रही समस्या
जीएसवीएम मेडिकल काॅलेज की एथिक्स कमेटी से मिली शोध की अनुमति


प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, कानपुर



मधुमेह की वजह से पुरुषाें में नपुंसकता बढ़ रही है। मधुमेह पीड़ितों में से 10-15 फीसद में नसों की कमजोरी की वजह से यह समस्या हो रही है। हैलट अस्पताल के डायबिटीज क्लीनिक में लोग समस्या लेकर आ रहे हैं। इसे देखते हुए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में शोध की तैयारी है, जिसे कॉलेज की एथिक्स कमेटी से अनुमति मिल चुकी है। कोरोना महामारी के चलते शोध कार्य टल गया है।


शहर की आबादी 50 लाख है, जिसमें से 10 फीसद आबादी मधुमेह की चपेट में हैं। इन 5 लाख मधुमेह पीड़तों में से 10-15 फीसद नसों की कमजोरी की वजह से नपुंसकता की चपेट में है। मधुमेह पीड़ितों की संख्या को देखते हुए हैलट अस्पताल में मेडिसिन विभाग की ओर सप्ताह में एक दिन स्पेशल ओपीडी चलाई जाती है, जिसमें मधुमेह पीड़ित देखे जाते हैं। हालांकि कोविड काल में ओपीडी बंद चल रही है।


10-15 फीसद को समस्या


ओपीडी में 100-125 मरीज हर सप्ताह देखे जाते हैं, उनमें से 10-15 फीसद सेक्स संबंधी समस्याएं लेकर आते हैं। उसमें नसों में कमजोर एवं संबंध बनाने में दिक्कत जैसी समस्याएं हैं। कइयों में सेक्स करने की क्षमता की कमी और संबंध बनाने की इच्छा न होना है। इस वजह से वैवाहिक जीवन में भी तनाव बढ़ रहा है।


कोविड से अटका काम


एसोसिएट प्रोफेसर एवं मुख्य गाइड डॉ. सौरभ अग्रवाल का कहना है कि लगातार ऐसी समस्याएं लेकर मरीज आ रहे थे। इसलिए उत्तर भारत खासकर कानपुर समेत आसपास के 10-12 जिलों के मरीज यहां इलाज के लिए आते हैं। इस समस्या को जानने के लिए एथिक्स कमेटी से अनुमति लेकर शोध शुरू किया, हालांकि कोराेना की वजह से शुरूआत में ही अटक गया।


यह है वजह


डॉ. अग्रवाल के मुताबिक कुछ मरीजों के आंकड़े जुटाए थे, जिसमें यह पता चला है कि शरीर में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ने से हार्मोनल बदलाव होने लगता है। इससे कोशिशएं क्षतिग्रस्त होती हैं जिससे खून की नलिकाएं और नसें दोनों प्रभावित होती हैं। वहीं धमनियों में कोलेस्ट्राल जमा होने से रुकावट आने लगती है, जिससे एथिरो स्क्लोरोसिस होने लगती है। इस वजह से नसों एवं धमनियों में कड़ापन आने से रक्त प्रवाह ठीक से नहीं होता है, जो नसों में कमजोरी यानी ऑटोनोमिक न्यूरोपैथी की वजह बनती है। इसमें मूल तंत्रिका तंत्र जो दूसरी चीजों से प्रभावित होने वाले तंत्रिका तंत्र की नसों को नुकसान पहुंचाने लगता है। इसका असर मूत्राशय, फेफड़े, पेट, आँख व अन्य अंगों की नसें प्रभावित होने लगती हैं।


हार्टअटैक का भी खतरा


डॉ. सौरभ का कहना है कि ऐसे मधुमेह पीड़तों में हार्ट अटैक का खतरा भी आम मरीजों से 50 गुना अधिक होता है। धमनी में रुकावट से यह नसों की कमजोरी की तरफ ध्यान देते हैं, जबकि उनकी दिल की नसों में भी ब्लाॅकेज रहता है। जिससे इन्हें हार्ट अटैक का खतरा रहता है। इसके अलावा ब्रेन स्ट्रोक भी पड़ सकता है।


मधुमेह के लक्षण

  • प्यास अधिक लगना
  • बार-बार पेशाब लगना
  • आंखों पर असर
  • चोट या जख्म देर से भरना
  • हाथों, पैरों व गुप्तांग में खुजली
  • बार-बार फोड़े-फुंसियां होना
  • चक्कर एवं कमजाेरी होना
  • चिड़चिड़ापन एवं तनाव


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