Dharm-Aadhyatm : आएं जानें दीपावली पूजन व शुभ मुहूर्त

दीपावली पर लक्ष्मी 
पूजा का मुहूर्त


लक्ष्मी पूजा मुहूर्त्त :17:30:04 बजे से 19:25:54 बजे तकअवधि :1 घंटे 55 मिनट


प्रदोष काल :17:27:41 बजे से 20:06:58 बजे तक वृषभ काल :17:30:04 बजे से 19:25:54 बजे तक


व्यापारिक प्रतिष्ठान, शोरूम, दुकान, गद्दी की पूजा, कुर्सी की पूजा, गल्ले की पूजा, तुला पूजा, मशीन-कंप्यूटर, कलम-दवात आदि की पूजा का सर्वश्रेष्ठ


मुहूर्त अभिजित- दोपहर 12 बजकर 09 मिनट से आरम्भ हो जाएगा।

दीपावली के दिन


घर के बाहर सरसों के तेल का दिया जलाने से गृहलक्ष्मी बढ़ती है। रात में प्रसन्नतापूर्वक सोना चाहिए। थोड़ी खीर कटोरी में डाल के और नारियल लेकर घर भर में घूमाएं और मन में "लक्ष्मी- नारायण" जप करें। इस खीर को ऐसी जगह रखें जहाँ किसी का पैर ना पड़े और गाये, कौए आदि खा जाएँ। नारियल घर के मुख्य द्वार पर फोड़ें और इसका प्रसाद आपास में बाँट कर खाएं। ऐसा करने से र में आनंद और सुख-शांति रहेगी। घर के मुख्य द्वार पर नीम व अशोक (आसोपाल ) के पत्तों का तोरण लगाएं। ऐसा करने से रोग एवं व्याधि दूर होंगे। इस दिन अगर अगर घर के लोग गाय के गोबर के जलते हुए कंडे पर 5-5 आहुतियाँ डालें तो घर में सम्पदा व संवादिता की सम्भावना बढ़ जाती है। घी, गुड़, चन्दन चूरा, देशी कपूर, गूगल, चावल, जौ और तिल को मिलाकर 5-5 आहुति इन मंत्र को पढ़कर डालें - स्थान देवताभ्यो नमः, ग्राम देवताभ्यो नमः, कुल देवताभ्यो नमः । फिर 2-5 आहुतियाँ लक्ष्मीजी के लिए ये मंत्र बोलकर डालें -श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमलवासिन्यै स्वाहा ।


दीपावली की रात मंत्र सिद्धि 


दीपावली की रात भूलना नहीं जप, ध्यान, सुमिरन सफल होता है, इसलिये स्वास्थ्य का मंत्र जप लेना और संम्पति प्राप्तिवाले संम्पति का लक्ष्मी का मंत्र अथवा श्री हरि वाला मंत्र कर जप करें।


ॐकार मंत्र गायत्री छंद परमात्मा ऋषि।

अंतर्यामी देवता, अंतर्यामी प्रीति अर्थे जपे विनियोग।

लंबा श्वास लो ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ .........


मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए अलग-अलग तरह के भोग लगाए जाते हैं। हम आपको बता रहे हैं। ऐसी चीजें जिन्हें आप दीपावली पर मां लक्ष्मी के भोग में शामिल कर मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।


फलों में आप लक्ष्मी जी की पूजा में सिघाड़ा, अनार, श्रीफल अर्पित कर सकते हैं। पूजा में सीताफल भी रखा जाता है। दीपावली की पूजा में कुछ लोग ईख रखते हैं। सिंघाड़ा नदी के किनारे पाया जाता है। मां लक्ष्मी को सिंघाड़ा पंसद है। मिष्ठान में मां लक्ष्मी को केसर भात, चावल की खीर, जिसमें केसर पड़ा हो, हलवा आदि भी पसंद हैं। बेसन के लड्डू यानी पीले रंग की मिठाई मां लक्ष्मी को अर्पित करें। माता लक्ष्मी को किशमिश, चारोली, मखाने और काजू जैसे नेवैद्य भी अर्पित करने चाहिए।

माता लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति पर मोगरे का इत्र अर्पित करें। गुलाब का इत्र चढ़ाने से रति और कामसुख की प्राप्ति होती है। माता महालक्ष्मी को केवड़े का इत्र अर्पित करने से मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। माता को चंदन का इत्र चढ़ाने से भाग्य में वृद्धि होने लगती है।


दीपावली के समय बताई गई कुछ बातें


कार्तिक अमावस्या के दिन दिवाली का पर्व मनाया जाता है, इस दिन भगवान गणेश के साथ महालक्ष्मी की भी पूजा की जाती है और उनका आह्वान भी किया जाता है। दीपावली की रात सभी साधनाओं के लिए सर्वाधिक उपयुक्त माना गया है। अमावस्या की इस रात को माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कई उपाय किए जाते हैं।


- रात लक्ष्मी पूजा के दौरान 9 गोमती चक्र और पीली कोड़ी माता के पास रख दें। फिर उनको लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रख दें। ऐसा करने से वर्षभर घर में सृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। साथ ही मां लक्ष्मी की आशीर्वाद से कभी भी पैसों की कमी नहीं होती है।


अगर लगातार आर्थिक हानि का सामना करना पड़ रहा है तो लक्ष्मी पूजन के साथ 11 अभिमंत्रित गोमती चक्रों को हल्दी से तिलक लगाएं और उनकी भी पूजा करें। इसके बाद अगली अमावस्या को बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। इसके बाद आपको जरूर फायदा शुरू हो जाएगा।


दीपावली की रात 5 साबुत सुपारी, काली हल्‍दी और 5 कौड़ी लेकर गंगाजल से धोकर लाल कपड़े में बांधकर पूजन के समय चांदी की कटोरी या थाली में रखकर पूजन करें। इसके बाद अगले दिन सुबह सारा सामान धन रखने वाली जगह पर रख दें। ऐसा करने से हमेशा मां लक्ष्‍मी आपके घर विराजी रहेंगी।


दुकानदार और कारोबारी दीपावली की रात एक साबुत फिटकरी का टुकड़ा लें। टुकड़े को दुकान के चारों तरफ घुमाएं और किसी चौराहे पर जाकर उत्तर दिशा की तरफ फेंक दें। ध्यान रहे कि फिर पीछे मुडकर न दें। ऐसा करने से ग्राहक आपकी दुकान की तरफ आकर्षित होंगे और धन लाभ में वृद्धि होगी।


लक्ष्मी पूजन में पांच गोमती चक्र पर केसर और चंदन से ‘श्री ह्रीं श्री’ लिखें और उनको पूजा में उन्हें शामिल करें। इसके बाद उनके समक्ष लक्ष्मी मंत्रों का यथाशक्ति अधिक संख्या में जाप करें। तत्पश्चात उन्हें धन के साथ रखें। वर्ष पर्यंत धन की कमी नहीं होगी,

पूजा के स्थान पर मोर-पंख रखने से लक्ष्मी-प्राप्ति में मदद मिलती है...


दीपावली की संध्या को तुलसी जी के निकट दिया जलायें, लक्ष्मीजी को प्रसन्न करने में मदद मिलती है; कार्तिक मास में तुलसीजी के आगे दिया जलाना पुण्य-दाई है, और प्रातः-काल के स्नान की भी बड़ी भारी महिमा है।


दीपावली, जन्म-दिवस, और नूतन वर्ष के दिन, प्रयत्न-पूर्वक सत्संग सुनना चाहिए। दीपावली की रात का जप हज़ार गुना फलदाई होता है; ४ महा-रात्रियाँ हैं - दिवाली, शिवरात्रि, होली, जन्माष्टमी - यह सिद्ध रात्रियाँ हैं, इन रात्रियों का अधिक से अधिक जप करके लाभ लेना चाहिए। दीपावली के अगले दिन , नूतन वर्ष होता है ; उस दिन, सुबह उठ कर थोडी देर चुप बैठ जाएँ; फिर, अपने दोनों हाथों को देख कर यह प्रार्थना करें :

कराग्रे वसते लक्ष्मी, कर-मध्ये च सरस्वती,

कर-मूले तू गोविन्दः, प्रभाते कर दर्शनं ||

अर्थात -

मेरे हाथों के अग्र भाग में लक्ष्मी जी का वास है, मेरे हाथों के मध्य भाग में सरस्वती जी हैं; मेरे हाथों के मूल में गोविन्द हैं, इस भाव से अपने दोनों हाथों के दर्शन करता हूँ...

फिर, जो नथुना चलता हो, वही पैर धरती पर पहले रखें; दाँया चलता हो, तो ३ कदम आगे बढायें, दांए पैर से ही; बाँया चलता हो, तो ४ कदम आगे बढायें, बाँए पैर से ही;

नूतन वर्ष का दिन जो व्यक्ति हर्ष और आनंद से बिताता है, उसका पूरा वर्ष आनंद से जाता है।


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