प्रारब्ध न्यूज़ ब्यूरो, लखनऊ
Lucknow University Student Protest: लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में रविवार को उस समय माहौल गर्म हो गया, जब सैकड़ों छात्रों ने 'संयुक्त छात्र मोर्चा' के बैनर तले एक बड़ा मार्च और प्रतिवाद सभा आयोजित की। छात्रों की मुख्य मांग विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर तत्काल रोक लगाने और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया शुरू करने की है।
विश्वविद्यालय के गेट नंबर 3 पर हुई इस सभा में छात्रों ने मतदाता सूची की पारदर्शिता, चुनाव आयोग (ECI) की जवाबदेही और नागरिकों के मताधिकार की रक्षा के लिए अपनी आवाज बुलंद की।
प्रदर्शन की मुख्य वजह: The Indian Express का खुलासा
छात्रों के इस उग्र विरोध की सबसे बड़ी वजह हाल ही में 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक खोजी रिपोर्ट है। इस रिपोर्ट में चुनाव आयोग के भीतर चल रहे आंतरिक मतभेदों और प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं।
रिपोर्ट में क्या सामने आया?
Form 6 में अवैध बदलाव का आरोप: मतदाता पंजीकरण, नाम जोड़ने/हटाने और मतदाता सूची के डिजिटल ढांचे (Digital Infrastructure) पर नियंत्रण को लेकर दोनों आयुक्तों ने सवाल उठाए।
"Illegal and Unauthorised"- दोनों आयुक्तों ने आंतरिक बैठकों में Form 6 से जुड़े कुछ बदलावों को "गैर-कानूनी" (Illegal) और "अनधिकृत" (Unauthorised) करार दिया था।
लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे विभिन्न छात्र संगठनों के नेताओं ने लोकतंत्र और वोटिंग अधिकारों पर गहरा संकट जताया।
शांतम निधि (अध्यक्ष, AISA लखनऊ विश्वविद्यालय): "जब खुद चुनाव आयोग के दो वरिष्ठ सदस्य प्रक्रियाओं पर सवाल उठा रहे हैं, तो इसकी स्वतंत्र जांच होना बेहद जरूरी है। मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी सीधे लोकतंत्र की बुनियाद पर चोट करती है। जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक SIR पर तुरंत रोक लगानी चाहिए।"
शुभम खरवार (महासचिव, NSUI उत्तर प्रदेश): "मतदान का अधिकार हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था की आत्मा है। किसी भी योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटाया जाना गंभीर अपराध है। आयोग से जुड़े इन सवालों की पारदर्शी जांच हो और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।"
महेंद्र यादव (उपाध्यक्ष, SCS): "मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया इतनी पारदर्शी होनी चाहिए कि कोई भी नागरिक मनमाने तरीके से अपने अधिकार से वंचित न हो। देश का युवा चुनाव प्रक्रिया में पूर्ण निष्पक्षता चाहता है।"
छात्रों ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन: 4 प्रमुख मांगें
विश्वविद्यालय परिसर में मार्च निकालने के बाद छात्रों ने भारत के राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इसमें निम्नलिखित मांगें रखी गईं:
1-मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाना: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संवैधानिक प्रक्रिया (Impeachment process) शुरू की जाए।
2-SIR पर तत्काल रोक: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया को तुरंत प्रभाव से निलंबित किया जाए।
3-इंडिपेंडेंट जांच: चुनाव आयोग के विवादित फैसलों और वोटर डेटाबेस प्रबंधन की निष्पक्ष व स्वतंत्र जांच हो।
4-कानूनी कार्रवाई: यदि जांच में किसी भी प्रकार की आपराधिक धांधली के सबूत मिलते हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों की गिरफ्तारी और अभियोजन सुनिश्चित किया जाए।
चुनाव आयोग का क्या पक्ष
जहाँ एक ओर छात्र और विपक्षी दल इन खुलासों के बाद जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने अपनी सफाई दी है।
चुनाव आयोग का कहना है कि internal नोटिंग और अलग-अलग फाइल टिप्पणियाँ किसी भी बहु-सदस्यीय संस्थागत विचार-विमर्श (Institutional Deliberation) का सामान्य और स्वस्थ हिस्सा हैं।पिछले एक साल में चुनाव आयोग द्वारा लिए गए सभी अंतिम निर्णय पूर्ण आयोग द्वारा सर्वसम्मति (Consensus) से लिए गए थे।
निष्कर्ष (Conclusion)
लखनऊ विश्वविद्यालय का यह छात्र प्रदर्शन केवल एक स्थानीय घटना नहीं है, बल्कि यह भारत की चुनाव प्रणाली की पारदर्शिता और डिजिटल वोटर डेटाबेस के सुरक्षित उपयोग पर खड़े हो रहे बड़े सवालों का प्रतीक है। जब किसी लोकतांत्रिक देश के नागरिक और छात्र चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हैं, तो संस्थाओं के लिए अपनी विश्वसनीयता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन जाता है।
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