Lucknow में ‘लोककला में श्रीगणेश’ ने बिखेरी महाराष्ट्र की लोकसंस्कृति की छटा, पारंपरिक कलाओं की प्रस्तुतियों ने मोहा दर्शकों का मन

लखनऊ के राय उमनाथ बली प्रेक्षागृह में ‘लोककला में श्रीगणेश’ कार्यक्रम में महाराष्ट्र की लोककला, लोकनृत्य, संगीत और गणेश भक्ति की शानदार प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।

प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ

महाराष्ट्र की समृद्ध लोककला, लोकपरंपरा और श्रीगणेश भक्ति की विविध रंगछटाएं सोमवार को लखनऊ के राय उमनाथ बली प्रेक्षागृह, कैसरबाग में देखने को मिलीं। महाराष्ट्र शासन के सांस्कृतिक कार्य विभाग एवं सांस्कृतिक कार्य संचालनालय, महाराष्ट्र राज्य, मुंबई के सहयोग से आयोजित विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘लोककला में श्रीगणेश’ में कलाकारों ने पारंपरिक लोककलाओं और संगीत-नृत्य की मनोहारी प्रस्तुतियों से दर्शकों को महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान तथा भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह मौजूद रहीं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग के पूर्व कार्यक्रम अधिशासी कमलेश कुमार पाठक सहित अन्य गणमान्य लोग भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

गणेश वंदना से शुरू हुआ सांस्कृतिक सफर

‘लोककला में श्रीगणेश’ कार्यक्रम में महाराष्ट्र की पारंपरिक लोककलाओं को श्रीगणेश भक्ति के साथ जोड़ते हुए विभिन्न प्रस्तुतियां दी गईं। कार्यक्रम में गणेश वंदना, नमन, ओवी, मंगलागौर, गोंधळ, बाल्या नृत्य, गौरी-गणपती की हिंदी रचना एवं भजन, संगीतमय नृत्यनाट्य और वाद्यवृंद के साथ श्रीगणेश नृत्यकलाविष्कार प्रमुख आकर्षण रहे।

कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा, लोकसंगीत, नृत्य, अभिनय और वाद्ययंत्रों के माध्यम से महाराष्ट्र के लोकजीवन और धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं को मंच पर जीवंत किया। प्रस्तुतियों के दौरान सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा और दर्शकों ने कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।

महाराष्ट्र की लोकपरंपरा को देशभर में पहुंचाने की पहल

कार्यक्रम का उद्देश्य महाराष्ट्र की लोककला और सांस्कृतिक परंपराओं को महाराष्ट्र की सीमाओं से बाहर देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाना है। इसी तरह के ‘लोककलेतील श्रीगणेश’ कार्यक्रम के माध्यम से महाराष्ट्र की पारंपरिक लोककलाओं को अन्य राज्यों में भी प्रस्तुत किया जा रहा है। हाल में कोटा में आयोजित कार्यक्रम में भी नमन, गण, जाखड़ी, धनगरी और कोली नृत्य तथा जागरण-गोंधल जैसी लोककलाओं की प्रस्तुतियां दी गई थीं।

इस सांस्कृतिक पहल का संबंध गणेशोत्सव को महाराष्ट्र में ‘राज्य महोत्सव’ के रूप में मनाए जाने के निर्णय से भी जोड़ा गया है। कार्यक्रमों के माध्यम से महाराष्ट्र की लोकसंस्कृति, लोकपरंपराओं और गणेश भक्ति को देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रस्तुत करने पर जोर दिया जा रहा है।

आशीष शेलार की संकल्पना, सांस्कृतिक विभाग का मार्गदर्शन

महाराष्ट्र के सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार की संकल्पना और सांस्कृतिक कार्य विभाग के मार्गदर्शन में महाराष्ट्र की लोककलाओं को देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने की पहल की जा रही है। कोटा में हुए इसी अभियान के कार्यक्रम के संबंध में सार्वजनिक रिपोर्टों में सांस्कृतिक कार्य विभाग के सचिव डॉ. किरण कुलकर्णी के मार्गदर्शन तथा सांस्कृतिक कार्य संचालनालय के संचालक प्रशांत खेडेकर का भी उल्लेख है।

लखनऊ के कार्यक्रम में भी महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत को स्थानीय दर्शकों तक पहुंचाने के उद्देश्य से विभिन्न पारंपरिक प्रस्तुतियां केंद्र में रहीं।

सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मिलेगा विस्तार

आयोजकों के अनुसार, इस तरह के कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल महाराष्ट्र की लोककलाओं का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि विभिन्न राज्यों के कलाकारों और कला-प्रेमियों के बीच सांस्कृतिक संवाद एवं आदान-प्रदान को बढ़ावा देना भी है।

महाराष्ट्र की लोकपरंपराओं के संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी तक उनके हस्तांतरण के साथ-साथ देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोगों को महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने की दिशा में ऐसे आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

श्रीकृष्ण कला फाउंडेशन ने किया समन्वय

लखनऊ में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम का समन्वय श्रीकृष्ण कला फाउंडेशन द्वारा किया गया। फाउंडेशन से जुड़े कलाकारों ने महाराष्ट्र की लोककला और परंपराओं को अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से मंच पर साकार किया।

कार्यक्रम में शामिल अतिथियों ने महाराष्ट्र शासन के सांस्कृतिक कार्य विभाग, सांस्कृतिक कार्य संचालनालय, आयोजकों और कलाकारों के प्रयासों की सराहना की। पवन सिंह चौहान, प्रो. मांडवी सिंह और कमलेश कुमार पाठक सहित उपस्थित गणमान्य लोगों ने महाराष्ट्र की लोककला को लखनऊ के दर्शकों तक पहुंचाने की पहल का स्वागत किया।

लखनऊ के दर्शकों की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के बीच सांस्कृतिक संवाद एवं मैत्री को और मजबूत करने का संदेश दिया। श्रीगणेश भक्ति, लोकसंगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक कलाओं से सजा ‘लोककला में श्रीगणेश’ कार्यक्रम इसी सांस्कृतिक आदान-प्रदान की एक प्रभावी प्रस्तुति के रूप में संपन्न हुआ।

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