प्रारब्ध न्यूज़ ब्यूरो, लखनऊ
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में एक बार फिर आंदोलन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। अपनी लंबित मांगों और सरकार के "एकतरफा" फैसलों के विरोध में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) के आह्वान पर बैंककर्मियों ने देशव्यापी प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
लखनऊ जिला इकाई के नेतृत्व में आज राजधानी के बैंककर्मियों ने विरोध का एक नया तरीका अपनाया, जिससे बैंकिंग सेवाओं पर असर डाले बिना अपनी आवाज बुलंद की जा सके।
मुख्य विवाद और मांगें
यूनाइटेड फोरम के जिला संयोजक अनिल श्रीवास्तव के अनुसार, बैंककर्मियों के इस संघर्ष के दो मुख्य बिंदु हैं:
- 5-दिवसीय बैंकिंग (5-Day Banking): राष्ट्रीय स्तर पर लंबे संघर्ष और एक दिवसीय हड़ताल के बावजूद केंद्र सरकार ने अभी तक 5-दिवसीय कार्य सप्ताह को लागू करने की अनुमति नहीं दी है।
- PLI योजना में विसंगति: सरकार द्वारा स्केल-4 और उससे ऊपर के अधिकारियों व शीर्ष प्रबंधन के लिए मनमाने तरीके से 'परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव' (PLI) लागू करने का निर्देश दिया गया है। यूनियन का कहना है कि यह मौजूदा समझौतों की स्पष्ट अवहेलना है।
विरोध का स्वरूप: 'काला बैज' और प्रदर्शन
आज लखनऊ की विभिन्न बैंक शाखाओं और कार्यालयों के बाहर माहौल गरमाया रहा।
- कार्य शैली: सभी बैंककर्मियों ने अपनी ड्यूटी के दौरान काला बैज पहनकर विरोध दर्ज कराया
- शक्ति प्रदर्शन: भोजनावकाश (Lunch Break) के दौरान डी.के. सिंह, लक्ष्मण सिंह, एस.के. संगतानी और अन्य वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में जोरदार नारेबाजी और प्रदर्शन किया गया।
- 16 मई (तीसरा शनिवार): इस दिन सभी पदाधिकारी और सक्रिय सदस्य काले वस्त्र पहनकर अपना विरोध जताएंगे।
- विरोध सभाएं: सभी प्रमुख केंद्रों पर सभाएं आयोजित की जाएंगी।
- चेतावनी: यदि केंद्र सरकार ने इन दो प्रमुख मांगों पर जल्द संज्ञान नहीं लिया, तो फोरम आने वाले दिनों में पूर्ण हड़ताल जैसे कड़े कदम उठाने पर मजबूर होगा।
"जब तक हमारी जायज मांगें नहीं मानी जातीं, संघर्ष का यह रास्ता जारी रहेगा। हम समझौते का सम्मान चाहते हैं, अवहेलना नहीं।"
— अनिल श्रीवास्तव, जिला संयोजक
आगे की रणनीति: 16 मई को 'ब्लैक आउट'
मीडिया प्रभारी अनिल तिवारी ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी साझा करते हुए बताया कि आंदोलन अब और उग्र होगा:
नेतृत्वकर्ता: इस प्रदर्शन में मुख्य रूप से मनमोहन दास, वी.के. माथुर, संदीप सिंह, विभाकर कुशवाहा, बी.डी. पाण्डेय, विशाखा वर्मा और स्वाति सिंह जैसे जुझारू नेताओं ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।
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