Kanpur में किडनी ट्रांसप्लांट करवाने वाले रैकेट का भंडाफोड़: नर्सिंग होम में चल रहा था अवैध खेल, CMO और पुलिस की छापेमारी

Kanpur Kidney Racket Exposed : कानपुर में CMO और पुलिस की संयुक्त टीम ने अवैध किडनी रैकेट का पर्दाफाश किया है। मसवानपुर के आहूजा अस्पताल सहित कई नर्सिंग होम जांच के दायरे में हैं। पढ़ें पूरी रिपोर्ट। Kanpur Kidney Smuggling Racket.

प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, कानपुर 

उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ स्वास्थ्य विभाग (CMO) और पुलिस की संयुक्त टीम ने किडनी खरीद-फरोख्त के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय तार वाले रैकेट को बेनकाब किया है। शहर के वेस्ट जोन स्थित नर्सिंग होम में लंबे समय से चल रहे इस अवैध कारोबार की सूचना मिलने पर प्रशासन ने देर रात बड़ी कार्रवाई की है। Kanpur CMO Police Raid.

कई निजी अस्पतालों में छापेमारी 

पुलिस और सीएमओ की संयुक्त टीम ने कल्याणपुर के मेड लाइफ हॉस्पिटल, रावतपुर स्थित आहूजा हॉस्पिटल और पनकी रोड के प्रिया हॉस्पिटल में ताबाड़तोड़ छापेमारी की। जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस ने आहूजा हॉस्पिटल की मालकिन डॉ. प्रीति आहूजा, उनके पति डॉ सुरजीत सिंह आहूजा और एक सक्रिय दलाल शिवम अग्रवाल उर्फ 'काना' को हिरासत में लिया है।

मसवानपुर का आहूजा अस्पताल जांच के दायरे में

पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मसवानपुर स्थित आहूजा अस्पताल और आसपास के कुछ नर्सिंग होम में छापेमारी की। जांच में सामने आया है कि यहाँ गुप्त रूप से किडनी निकालने और अवैध प्रत्यारोपण (Transplant) का नेटवर्क संचालित हो रहा था। टीम ने मौके से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, मेडिकल रिकॉर्ड और उपकरण बरामद किए हैं।

सामने आया लखनऊ कनेक्शन

जांच में पता चला है कि किडनी ट्रांसप्लांट की जटिल सर्जरी करने लखनऊ से डॉक्टरों की विशेष टीम कानपुर आती थी। आहूजा हॉस्पिटल के ऑपरेशन थिएटर का उपयोग किया जाता था। इसके लिए डॉक्टरों को लाखों रुपये दिए जाते थे। किडनी लेने वाले से कई लाख रुपये लिए जाते थे, जबकि किडनी देने वाले को बहुत कम पैसे मिलते थे। मोटी रकम डॉक्टरों, अस्पताल प्रबंधन और बिचौलिए के बीच बंट जाती थी।

मरीज से 60 लाख लेते, डोनर को 9.5 लाख देते 

किडनी लेने वाला युवक आयुष उत्तराखंड का है। वह प्रिया हॉस्पिटल में भर्ती मिला। वहीं, किडनी देने वाला युवक मेरठ का है। वह मेड लाइफ हॉस्पिटल में भर्ती है। डोनर को किडनी के बदले करीब 9.5 लाख रुपये दिए गए, जबकि किडनी लेने वाले मरीज से 60 लाख रुपये वसूल किए गए।

माफिया में खलबली, बिचौलियों से पूछताछ जारी

इस छापेमारी के बाद शहर के चिकित्सा जगत में हड़कंप मच गया है। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने कई संदिग्ध मेडिकल स्टाफ, वार्ड बॉय और बिचौलियों को हिरासत में लिया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस रैकेट के तार किन-किन बड़े अस्पतालों और डॉक्टरों से जुड़े हैं।

बड़ी कार्रवाई के मुख्य बिंदु

वेस्ट जोन के कई नर्सिंग होम पर एक साथ छापेमारी।

किडनी निकालने और फर्जी कागजात तैयार करने वाले गिरोह का खुलासा।

आहूजा अस्पताल के दस्तावेजों की बारीकी से जांच।

कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ जारी।

आधिकारिक बयान का इंतज़ार

कानपुर पुलिस कमिश्नर इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, "हमें लंबे समय से अवैध अंग प्रत्यारोपण की शिकायतें मिल रही थीं। साक्ष्यों के आधार पर CMO टीम के साथ मिलकर यह कार्रवाई की गई है। जल्द ही मुख्य सरगनाओं के नाम सार्वजनिक किए जाएंगे।"

स्वास्थ्य महकमे में मची खलबली

स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता ने शहर में सक्रिय 'मेडिकल माफिया' की कमर तोड़ दी है। पुलिस की अगली कार्रवाई अब उन सफेदपोश चेहरों पर टिकी है, जो इस काले कारोबार को संरक्षण दे रहे थे। शहर की जनता अब पुलिस कमिश्नर के आधिकारिक खुलासे का इंतज़ार कर रही है। ताकि इस घिनौने अपराध की पूरी सच्चाई सामने आ सके।

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