बिहार की राजनीति में बड़ा भूचाल! नीतीश कुमार के CM पद छोड़ने और राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच पटना स्थित JDU कार्यालय पर विधायकों और कार्यकर्ताओं ने किया जोरदार प्रदर्शन। जानें पूरा मामला।
प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, पटना
बिहार की सियासत में उस वक्त हड़कंप मच गया जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पद छोड़ने और राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने की खबरें सामने आईं। इन खबरों के फैलते ही जनता दल यूनाइटेड (JDU) के विधायक, पार्टी पदाधिकारी और हजारों की संख्या में कार्यकर्ता पटना स्थित प्रदेश कार्यालय पर इकट्ठा हो गए। कार्यकर्ताओं ने अपनी ही पार्टी के फैसले के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और कार्यालय का घेराव किया।
कार्यकर्ताओं की मांग: "नीतीश ही रहेंगे बिहार के कप्तान"
प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं का कहना है कि बिहार की कमान नीतीश कुमार के हाथों में ही सुरक्षित है। प्रदर्शनकारियों ने साफ तौर पर चेतावनी दी कि यदि नीतीश कुमार राज्य की राजनीति छोड़कर दिल्ली जाते हैं, तो पार्टी के लिए यह बड़ा झटका होगा।
प्रदर्शन की मुख्य बातें
नारेबाजी : कार्यकर्ताओं ने "नीतीश कुमार जिंदाबाद" और "बिहार का नेतृत्व नहीं बदलेंगे" जैसे नारे लगाए।
घेराव : जेडीयू कार्यालय के मुख्य द्वार को कार्यकर्ताओं ने घेर लिया, जिससे वरिष्ठ नेताओं का अंदर जाना मुश्किल हो गया।
विधायकों का विरोध : कई विधायकों ने दबी जुबान में नाराजगी जाहिर की है कि ऐसे बड़े फैसले से पहले उन्हें विश्वास में नहीं लिया गया।
पूरा मामले के तथ्यों का विश्लेषण
पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज थी कि नीतीश कुमार अपनी भूमिका बदल सकते हैं और केंद्र की राजनीति में सक्रिय होने के लिए राज्यसभा का रुख कर सकते हैं। हालांकि, पार्टी की ओर से अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि (Official Confirmation) नहीं की गई है।
"नीतीश जी हमारे सर्वमान्य नेता हैं। कार्यकर्ताओं की भावनाएं उनके साथ जुड़ी हैं। यह प्रदर्शन उनके प्रति प्रेम और विश्वास का प्रतीक है।" - नाम न छापने की शर्त पर एक जेडीयू पदाधिकारी
सुरक्षा के किए गए कड़े इंतजाम
हंगामे को देखते हुए पटना पुलिस ने जेडीयू कार्यालय के बाहर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिया है। सचिवालय जाने वाली सड़कों पर भी यातायात प्रभावित हुआ है। प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
आगे की रणनीति पर निगाहें
अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री आवास '1 अणे मार्ग' पर टिकी हैं। क्या नीतीश कुमार खुद सामने आकर इन अटकलों पर विराम लगाएंगे या बिहार की राजनीति में वाकई किसी बड़े बदलाव की पटकथा लिखी जा चुकी है।




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