अयोध्या के राजघाट पर आयोजित लक्ष्मी नारायण महायज्ञ में अंतिम आहुति से पहले भीषण आग लग गई। 1251 हवन कुंड जलकर राख, सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल। पढ़ें पूरी ग्राउंड रिपोर्ट।
प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, अयोध्या
राम नगरी अयोध्या के राजघाट (बाटी वाले बाबा घाट) पर चल रहे लक्ष्मी नारायण महायज्ञ में शनिवार को उस समय मातम पसर गया जब यज्ञ की पूर्णाहुति से ठीक पहले पूरी यज्ञशाला भीषण आग की चपेट में आ गई। इस हादसे में 1251 हवन कुंड जलकर खाक हो गए हैं और वहां मौजूद हजारों श्रद्धालुओं में भगदड़ मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों और ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, हादसे के वक्त सुरक्षा और प्रबंधन के इंतजाम नगण्य थे।
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अंतिम आहुति से पहले मचा तांडव
यज्ञ का आज सातवां और अंतिम दिन था। शाम 6:00 बजे अंतिम आहुति दी जानी थी, लेकिन उससे पहले ही अचानक उठी चिंगारियों ने विकराल रूप ले लिया। हवा के तेज झोंकों के कारण आग की लपटें मुख्य यज्ञशाला से होते हुए अन्य पंडालों तक फैल गईं। बताया जा रहा है कि यज्ञशाला के भीतर उस समय 1000 से 1200 लोग मौजूद थे, जिनमें से कई लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं।
सुरक्षा इंतजामों की खुली पोल: न एंबुलेंस, न फायर ब्रिगेड
ग्राउंड जीरो से मिली जानकारी के अनुसार, इतने बड़े आयोजन के बावजूद मौके पर शुरुआत में एक भी फायर ब्रिगेड की गाड़ी या एंबुलेंस मौजूद नहीं थी। आग लगने के करीब 25 मिनट बाद दमकल की पहली गाड़ी मौके पर पहुंची। तब तक यज्ञशाला पूरी तरह स्वाहा हो चुकी थी। घायलों को अस्पताल ले जाने के लिए भी कोई सरकारी वाहन उपलब्ध नहीं था, जिससे स्थिति और भयावह हो गई।
मौके पर मौजूद थे वीआईपी, कवरेज पर लगा पहरा
हादसे के वक्त उत्तर प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्री दया शंकर सिंह, गोसाईगंज विधायक अभय सिंह और अयोध्या के पूर्व महापौर ऋषिकेश उपाध्याय पंडाल में ही मौजूद थे। आरोप है कि अव्यवस्थाओं को छिपाने के लिए वहां मौजूद कार्यकर्ताओं ने मीडियाकर्मियों के साथ अभद्रता की और वीडियो बनाने से रोका। यहां तक कि कवरेज कर रहे पत्रकारों के साथ मारपीट और मोबाइल छीनने की कोशिश की भी खबरें सामने आई हैं।
असहाय बुजुर्ग और ग्रामीण श्रद्धालु
आग लगने के बाद पंडालों को आनन-फानन में खाली कराया गया। आयोजन में भारी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों के बुजुर्ग और महिलाएं शामिल थीं, जिन्हें सही रास्ता दिखाने या मदद करने वाला कोई नहीं था। बदहवास लोग राजघाट की दीवारों और पुलों पर शरण लेने को मजबूर दिखे। पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि संकट की घड़ी में श्रद्धालुओं को "भगवान भरोसे" छोड़ दिया गया।
घटनाक्रम के बारे में अहम तथ्य
स्थान : राजघाट, बाटी वाले बाबा घाट के निकट, अयोध्या।
नुकसान : 1251 हवन कुंड और मुख्य यज्ञशाला पूरी तरह नष्ट।
हताहत : कई श्रद्धालुओं के झुलसने की सूचना, अस्पताल में भर्ती।
प्रशासनिक विफलता : आयोजन स्थल पर प्राथमिक चिकित्सा और अग्नि सुरक्षा के इंतजामों का अभाव।
दमकल की चार गाड़ियां आग पर काबू पाने में लगीं
वर्तमान में दमकल की चार गाड़ियां आग पर पूरी तरह काबू पाने का प्रयास कर रही हैं। आग लगने के स्पष्ट कारणों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन प्राथमिक दृष्टि में इसे शॉर्ट सर्किट या हवन की चिंगारी से जोड़कर देखा जा रहा है।



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