आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर हुए भीषण हादसे में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 'फरिश्ता' बनकर घायलों की मदद की। अपनी फॉर्च्यूनर गाड़ी देकर घायलों को अस्पताल पहुंचाया। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ/फिरोजाबाद
राजनीति के मैदान में अक्सर वार-पलटवार देखने को मिलते हैं, लेकिन कभी-कभी कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आती हैं जो राजनीति की सीमाओं को लांघकर सीधे इंसानियत के दिल तक पहुंचती हैं। शुक्रवार की शाम आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक सड़क हादसे के पीड़ितों की मदद कर मानवता की एक नई मिसाल पेश की।
कैसे हुआ एक्सप्रेस-वे पर हादसा
हादसा जिला फिरोजाबाद के अंतर्गत आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के चैनल नंबर 41+500 पर हुआ। लखनऊ के रहने वाले सुनील मिश्रा अपने परिवार के साथ किसी जरूरी काम से आगरा की ओर जा रहे थे। शाम के लगभग 6 बजे थे, तभी अचानक उनकी टाटा सफारी कार अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि गाड़ी के परखच्चे उड़ गए और भीतर सवार परिवार में चीख-पुकार मच गई।
जब काफिला रोककर खुद उतर आए अखिलेश यादव
उसी दौरान समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव का काफिला आगरा की ओर बढ़ रहा था। सड़क पर पलटी हुई गाड़ी और लोगों की भीड़ देख उन्होंने बिना एक पल की देरी किए अपना काफिला रुकवा दिया। सुरक्षा घेरे की परवाह किए बिना अखिलेश यादव खुद घायलों के पास पहुंचे।
मौके पर अफरा-तफरी का माहौल था और सुनील मिश्रा का परिवार दहशत में था। अखिलेश यादव ने न केवल उन्हें ढांढस बंधाया, बल्कि तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू करने के निर्देश दिए।
अपनी ही फॉर्च्यूनर दे दी मदद के लिए
हादसे की गंभीरता को देखते हुए समय पर अस्पताल पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती थी। संवेदनशीलता का परिचय देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने वीआईपी प्रोटोकॉल की परवाह नहीं की और अपने काफिले में चल रही फॉर्च्यूनर गाड़ी घायलों की मदद के लिए सौंप दी। उन्होंने सुनिश्चित किया कि घायल सुनील मिश्रा और उनके परिवार को तत्काल बेहतर इलाज मिले और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सके।
"यह दृश्य किसी राजनीतिक अभियान का हिस्सा नहीं था, बल्कि यह शुद्ध इंसानियत का परिचय था। एक नेता जब जनता के दर्द को अपना समझकर सड़क पर उतरता है, तो वही लोकतंत्र की असली ताकत होती है।"
सड़क सुरक्षा पर भावुक अपील, 'जीवन अनमोल'
हादसे के बाद अखिलेश यादव ने वहां मौजूद लोगों और सोशल मीडिया के माध्यम से आम जनता से एक भावुक अपील भी की।
वाहन की गति पर नियंत्रण : वाहन चलाते समय हमेशा गति सीमा का पालन करें। तेज रफ्तार अक्सर जानलेवा साबित होती है।
सड़क पर सावधानी जरूरी : सड़क पर आपकी एक छोटी सी लापरवाही पूरे परिवार को संकट में डाल सकती है।
घर पर हो रहा इंतजार : याद रखें, घर पर कोई आपका इंतजार कर रहा है। आपका जीवन सिर्फ आपका नहीं, आपके अपनों का भी है।
पहले भी पेश की है मानवता की मिसाल
यह पहली बार नहीं है जब अखिलेश यादव ने इस तरह का कदम उठाया हो। बीते वर्ष 8 अगस्त 2025 को भी उन्होंने इटावा-मैनपुरी रोड पर हुए एक हादसे में घायलों की जान बचाई थी। उस समय उन्होंने अपने काफिले के साथ चल रही एंबुलेंस को घायलों के लिए रवाना कर दिया था और उन्हें सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी के इमरजेंसी ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया था।
सोशल मीडिया पर हो रही सराहना
इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। लोग दलगत राजनीति से ऊपर उठकर अखिलेश यादव के इस कदम की सराहना कर रहे हैं। नेटीजन्स का कहना है कि संकट के समय में आम आदमी के साथ खड़े होना ही एक सच्चे जनप्रतिनिधि की पहचान है।
पद और प्रतिष्ठा से बड़ा धर्म 'परोपकार'
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर हुई यह घटना हमें दो बातें सिखाती है। पहली, सड़क पर सावधानी हटी तो दुर्घटना घटी, इसलिए यातायात नियमों का पालन अनिवार्य है। दूसरी, पद और प्रतिष्ठा से बड़ा इंसान का धर्म 'परोपकार' है। सपा मुखिया अखिलेश यादव द्वारा घायलों को अपनी गाड़ी उपलब्ध कराना यह संदेश देता है कि मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है।
एक्सप्रेसवे पर ड्राइविंग के 10 गोल्डन रूल्स
लेन अनुशासन (Lane Discipline) का पालन करें
एक्सप्रेसवे पर तीन या चार लेन होती हैं। बाएं (Left) लेन धीमी गति के लिए, मध्य (Middle) लेन सामान्य गति के लिए और दाएं (Right) लेन केवल ओवरटेकिंग के लिए होती है। ओवरटेक करने के बाद वापस अपनी लेन में आ जाएं।
टायर प्रेशर और कंडीशन की जांच
लंबी दूरी और तेज रफ्तार में टायर गर्म होकर फट सकते हैं (जैसा कि अक्सर एक्सप्रेसवे हादसों में होता है)। यात्रा से पहले टायर में हवा का दबाव सही रखें और घिसे हुए टायरों के साथ सफर न करें।
सुरक्षित दूरी (The 3-Second Rule)
अपने आगे चल रहे वाहन से कम से कम 100 मीटर या 3 सेकंड की दूरी बनाकर रखें। तेज रफ्तार में अचानक ब्रेक लगाने पर गाड़ी रुकने में समय लेती है।
क्रूज कंट्रोल और स्पीड लिमिट
उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे पर सामान्यतः अधिकतम गति सीमा 100 किमी/घंटा है। गति सीमा का उल्लंघन न करें, क्योंकि कैमरों से ऑटोमैटिक चालान कटते हैं और यह जानलेवा भी हो सकता है।
इंडिकेटर का सही उपयोग
लेन बदलते समय कम से कम 5-10 सेकंड पहले इंडिकेटर दें। अचानक लेन बदलना पीछे से आ रहे तेज वाहनों के लिए घातक हो सकता है।
हाइवे हिप्नोसिस (Highway Hypnosis) से बचें
लगातार सीधी सड़क पर गाड़ी चलाने से दिमाग सुन्न होने लगता है और नींद आने लगती है। हर 2 घंटे या 150 किमी के बाद किसी ढाबे या 'वे-साइड एमेनिटी' पर रुककर चाय पिएं या हाथ-मुँह धोएं।
रुकने के लिए शोल्डर लेन का प्रयोग
अगर गाड़ी खराब हो जाए या इमरजेंसी हो, तो गाड़ी को सबसे बाईं ओर 'इमरजेंसी शोल्डर' पर खड़ी करें और 'हैजर्ड लाइट' जला दें। एक्सप्रेसवे के बीच में गाड़ी कभी न रोकें।
रात में हाई-बीम का विवेकपूर्ण उपयोग
सामने से आ रही गाड़ियों की आँखों में रोशनी न चुभे, इसके लिए लो-बीम का प्रयोग करें। हालांकि एक्सप्रेसवे पर डिवाइडर ऊंचे होते हैं, फिर भी सावधानी जरूरी है।
सीट बेल्ट: जीवन रक्षक
न केवल ड्राइवर, बल्कि गाड़ी में बैठे सभी यात्रियों को सीट बेल्ट लगानी चाहिए। एयरबैग्स तभी काम करते हैं जब आपने सीट बेल्ट पहनी हो।
ओवरटेकिंग के नियम
हमेशा दाहिनी ओर (Right Side) से ओवरटेक करें। ओवरटेक करने से पहले 'डिपर' (लाइट फ्लैश) या हॉर्न का प्रयोग करें।
आपातकालीन स्थिति में क्या करें
अगर एक्सप्रेसवे पर कोई दुर्घटना हो जाए या गाड़ी खराब हो जाए। सबसे पहले हेल्पलाइन नंबर 1033 (National Highway) या एक्सप्रेसवे के विशिष्ट नंबर पर कॉल करें। साथ ही सुरक्षा के लिए रिफ्लेक्टिव ट्रायंगल गाड़ी के पीछे रख दें, ताकि दूर से आ रहे वाहनों को पता चल सके।


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