अखिलेश यादव ने इटावा में भाजपा और चुनाव आयोग पर फॉर्म-07 के जरिए PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वोट काटने का आरोप लगाया। जानें क्या है दशरथ और नंदलाल वाला पूरा मामला।
प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, इटावा
समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा BJP) पर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा, प्रशासन और चुनाव आयोग मिलकर सुनियोजित तरीके से 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग के वोट कटवा रहे हैं। अखिलेश यादव ने दावा किया कि प्रदेश में फॉर्म-07 का दुरुपयोग कर विपक्षी समर्थकों को मतदाता सूची से बाहर किया जा रहा है।
फॉर्म-07 के जरिये वोट काटने का खेल
इटावा में पूर्व मंत्री बलराम सिंह यादव के पुत्र अजय यादव के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचे अखिलेश यादव ने पत्रकारों से बातचीत में कुछ चौंकाने वाले आंकड़े रखे:
अज्ञात लोगों की भूमिका : अखिलेश ने कहा कि जांच में पता चला है कि लगभग 1.14 लाख फॉर्म-07 अज्ञात लोगों द्वारा भरे गए थे।पार्टी वार आंकड़े : उन्होंने दावा किया कि सपा की ओर से केवल 47 और भाजपा की ओर से 1000 फॉर्म भरे गए, लेकिन अज्ञात द्वारा भरे गए भारी संख्या में फॉर्मों का उद्देश्य PDA वोटर्स को निशाना बनाना था।
प्रशासनिक ढिलाई : सपा प्रमुख ने नाराजगी जताई कि ताखा (इटावा) समेत प्रदेश के कई हिस्सों में गड़बड़ियां सामने आईं, लेकिन चुनाव आयोग ने अब तक एक भी DM या SDM पर कार्रवाई नहीं की।
"अगर चुनाव आयोग एक भी जिलाधिकारी पर सख्त कार्रवाई कर देता, तो वोटर लिस्ट में हेराफेरी करने की हिम्मत किसी की नहीं होती। सरकार, प्रशासन और चुनाव आयोग तीनों इस खेल में मिले हुए हैं।" अखिलेश यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी।
अखिलेश यादव ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि द्वापर और त्रेता युग के 'दशरथ' और 'नंदलाल' के नामों का भला हो, जिन्होंने पोल खोल दी। उन्होंने बताया कि कई विधानसभाओं में इन नामों से फर्जी फॉर्म भरकर वोट कटवाने की कोशिश की गई, जिससे साबित होता है कि यह एक सोची-समझी साजिश है।
मुख्यमंत्री पर निजी हमला, "गेरुआ पहनने से कोई संत नहीं होता"
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए अखिलेश यादव ने उन्हें 'मिस्टर बिष्ट' कहकर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि केवल गेरुआ वस्त्र धारण करने या कान छिदवाने से कोई संत नहीं बन जाता।विधानसभा के सदन में जिस तरह की भाषा का प्रयोग किया जा रहा है, वह मर्यादित नहीं है। एक सच्चा संत हमेशा अपनी मर्यादा में रहकर बात करता है।

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