National Tourism Day : राष्ट्रीय पर्यटन दिवस 2026 भीड़ से दूर, भारत के 5 अनछुए 'Hidden Gems' की यात्रा

National Tourism Day 2026, Hidden Gems in India, Sustainable Tourism India : राष्ट्रीय पर्यटन दिवस 2026 के अवसर पर जानें भारत के 5 अनछुए पर्यटन स्थलों (Hidden Gems) के बारे में। जीरो वैली से लेकर धनुषकोडी तक, भीड़ से दूर सुकून की तलाश करें।
प्रारब्ध न्यूज़ ब्यूरो, लखनऊ
हर साल 25 जनवरी को हम राष्ट्रीय पर्यटन दिवस मनाते हैं। इस साल की थीम ग्रामीण और टिकाऊ पर्यटन (Sustainable Tourism) पर केंद्रित है। अगर आप वही पुराने शिमला-मनाली या गोवा के शोर से थक चुके हैं, तो इस वर्ष यानी साल 2026 में अपनी 'Travel Bucket List' में इन 5 गुप्त ठिकानों को शामिल करें।


जीरो वैली (Ziro Valley), अरुणाचल प्रदेश

चावल के लहलहाते खेत और पाइन के जंगलों के बीच बसी यह घाटी 'अपातानी' जनजाति का घर है। यहाँ का जीवन प्रकृति के साथ तालमेल बिठाने की एक मिसाल है।

यहां की खासियत : यहां की टैटू वाली बुजुर्ग महिलाएं और बांस से बने घर आपको एक अलग युग में ले जाएंगे।

यहां कब जाएं : मार्च से अक्टूबर तक।

यहां ऐसे पहुंचें : निकटतम एयरपोर्ट ईटानगर (Hollongi) है। वहां से टैक्सी द्वारा 4-5 घंटे का सफर तय कर यहां पहुंचेंगे।

घूमने का प्लान

पहले दिन : ईटानगर आगमन और जीरो वैली के लिए प्रस्थान। रास्ते में 'निशी' जनजाति के गांवों का दौरा करते हुए आगे बढ़ें।

दूसरे दिन : अपातानी गांव (Hong Village) की सैर। टैटू वाली बुजुर्ग महिलाओं से मिलें और उनकी परंपराएं समझें।

तीसरे दिन : सिद्धेश्वर नाथ मंदिर (विशाल प्राकृतिक शिवलिंग) और पाइन ग्रोव की हाइकिंग।

चौथे दिन : स्थानीय बाजार से हस्तशिल्प की खरीदारी और वापसी।

मंडावा (Mandawa), राजस्थान

इसे राजस्थान की 'ओपन आर्ट गैलरी' कहा जाता है। जहां जयपुर और उदयपुर में पर्यटकों की भारी भीड़ होती है। वहीं, मंडावा अपनी पुरानी हवेलियों और उन पर बनी अद्भुत पेंटिंग्स के साथ-साथ एक शांत जगह है।


मंडावा की खासियत : यहां की हवेलियों की दीवारों पर 100 साल पुरानी कहानियां चित्रों के रूप में देख सकते हैं।

इस तरह यहां पहुंचें : जयपुर एयरपोर्ट से लगभग 170 किमी दूरी है। कार से 4 घंटे की ड्राइव के बाद पहुंचेंगे।

घूमने का प्लान

पहले दिन : मंडावा पहुंचकर ऐतिहासिक मंडावा कैसल में रुकें। शाम को हवेली की छतों से सूर्यास्त देखें।

दूसरे दिन : पैदल 'हवेली टूर' करें। हनुमान प्रसाद गोयनका हवेली और झुंझुनवाला हवेली की पेंटिंग्स जरूर देखें।

तीसरे दिन : पास के नवलगढ़ या फतेहपुर की हवेलियां देखें और जयपुर के लिए प्रस्थान।


तीर्थन वैली (Tirthan Valley), हिमाचल प्रदेश


ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के पास स्थित यह घाटी उन लोगों के लिए स्वर्ग है जो नदियों के किनारे सुकून के पल बिताना चाहते हैं।

 
तीर्थन वैली की खासियत : ट्राउट फिशिंग और कैंपिंग के लिए यह भारत की सबसे बेहतरीन जगहों में से एक है।

यहां ऐसे पहुंचें : चंडीगढ़ एयरपोर्ट/रेलवे स्टेशन से 7-8 घंटे की ड्राइव या कुल्लू एयरपोर्ट से 2 घंटे का सफर।

घूमने का प्लान

पहले दिन : गुशैनी (Gushaini) आगमन और तीर्थन नदी के किनारे रिवर-साइड कैंपिंग।

दूसरे दिन : ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क (GHNP) में छोटी ट्रेकिंग और झरने (Hippo Waterfall) की सैर।

तीसरे दिन : जलोरी पास और सरेओलसर झील की यात्रा। यह जगह सर्दियों में पूरी तरह बर्फ से ढकी रहती है।

चौथे दिन : ट्राउट फिशिंग का अनुभव लें और वापसी।


माजुली (Majuli), असम


दुनिया का सबसे बड़ा नदी द्वीप, जो धीरे-धीरे विलुप्त हो रहा है। यह असमिया संस्कृति और कला का प्रमुख केंद्र है।


माजुली की खासियत : यहां के 'सत्र' (मठ) और मुखौटा बनाने की कला दुनिया भर में प्रसिद्ध है।

यहां इस तरह पहुंचें : गुवाहाटी से पहले जोरहाट पहुंचें। फिर वहां से निमाती घाट से फेरी (नौका) के जरिए माजुली पहुँचें।

घूमने का प्लान

पहले दिन : फेरी का सफर और माजुली के किसी बाँस के घर (Bamboo Hut) में चेक-इन।

दूसरे दिन : कमलाबाड़ी और उत्तर कमलाबाड़ी सत्र का दौरा। शाम को 'मुखौटा नृत्य' (Mask Making) बनाने वाली वर्कशॉप देखें।

तीसरे दिन : ब्रह्मपुत्र के किनारे पक्षी दर्शन (Bird Watching) और स्थानीय 'मिशिंग' जनजाति के साथ दोपहर का भोजन।


धनुषकोडी (Dhanushkodi), तमिलनाडु


भारत का अंतिम छोर, जहां बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर मिलते हैं। यह एक 'घोस्ट टाउन' है जो वर्ष 1964 के चक्रवात के बाद वीरान हो गया था।


धनुषकोडी की खासियत : यहां की रहस्यमयी शांति और समुद्र का नीला विस्तार आपको चकित कर देगा।

यहां इस तरह पहुंचें : निकटतम शहर रामेश्वरम है। मदुरै एयरपोर्ट से रामेश्वरम के लिए टैक्सी लें।

घूमने का प्लान

पहले दिन : रामेश्वरम मंदिर के दर्शन और शाम को पंबन ब्रिज का नजारा।

दूसरे दिन : सुबह जल्दी धनुषकोडी के लिए निकलें। पुराने चर्च के खंडहर, रेलवे स्टेशन और राम सेतु (Adam's Bridge) का शुरुआती बिंदु देखें। शाम को मदुरै वापसी।

अगर आप कम समय में कुछ बेहतरीन देखना चाहते हैं, तो उत्तराखंड के कानाताल (Kanatal) की यात्रा करें।


यात्रा के लिए कुछ खास टिप्स

डिजिटल गाइड्स का उपयोग : अब कई ऐतिहासिक स्थलों पर QR कोड आधारित AR (Augmented Reality) गाइड्स उपलब्ध हैं, उनका लाभ उठाएं।

होमस्टे चुनें : बड़े होटलों के बजाय 'होमस्टे' (Homestays) में रुकें। इससे न सिर्फ आपको घर का खाना मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों की आय में भी मदद होगी।

ऑफ-सीजन यात्रा : भीड़ और महंगे दामों से बचने के लिए फरवरी या मार्च जैसे महीनों में यात्रा का प्लान बनाएं।

विशेष सुझाव (Pro Tip)

इनमें से अधिकतर स्थान संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र (Eco-system) का हिस्सा हैं। यात्रियों को सलाह दें कि वे 'No Trace Policy' का पालन करें, यानी पीछे कोई कचरा न छोड़ें।

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