Prarabdh Dharm-Aadhyatm : आज का पंचांग (14 अक्टूबर 2022)

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दिनांक - 14 अक्टूबर  2022,


दिन - शुक्रवार 


विक्रम संवत - 2079 (गुजरात-2078)


शक संवत -1944


अयन - दक्षिणायन


ऋतु - शरद ॠतु


मास - कार्तिक (गुजरात एवं महाराष्ट्र के अनुसार अश्विन)


पक्ष - कृष्ण


तिथि -  पंचमी 15 अक्टूबर प्रातः 04:52 तक तत्पश्चात षष्ठी


नक्षत्र - रोहिणी रात्रि 08:47 तक तत्पश्चात मृगशिरा


योग - व्यतीपात दोपहर 01:58 तक तत्पश्चात वरीयान


राहुकाल - सुबह 10:57 से दोपहर 12:25 तक


सूर्योदय - 06:34


सूर्यास्त - 18:14


दिशाशूल - पश्चिम दिशा में


व्रत पर्व विवरण - 


विशेष - पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

             

कार्तिक में दीपदान


गतांक से आगे......


पाँच दिन जरूर जरूर करें दीपदान


अगर किसी विशेष कारण से कार्तिक में प्रत्येक दिन आप दीपदान करने में असमर्थ हैं तो पांच विशेष दिन जरूर करें।


पद्मपुराण, उत्तरखंड में स्वयं महादेव कार्तिकेय को दीपावली, कार्तिक कृष्णपक्ष के पाँच दिन में दीपदान का विशेष महत्व बताते हैं:


कृष्णपक्षे विशेषेण पुत्र पंचदिनानि च

पुण्यानि तेषु यो दत्ते दीपं सोऽक्षयमाप्नुयात्


विशेषतः कृष्णपक्ष में 5 दिन (रमा एकादशी से दीपावली तक) बड़े पवित्र हैं। उनमें जो भी दान किया जाता है, वह सब अक्षय और सम्पूर्ण कामनाओं को पूर्ण करने वाला होता है।


तस्माद्दीपाः प्रदातव्या रात्रावस्तमते रवौ

गृहेषु सर्वगोष्ठेषु सर्वेष्वायतनेषु च

देवालयेषु देवानां श्मशानेषु सरस्सु च

घृतादिना शुभार्थाय यावत्पंचदिनानि च

पापिनः पितरो ये च लुप्तपिंडोदकक्रियाः

तेपि यांति परां मुक्तिं दीपदानस्य पुण्यतः


रात्रि में सूर्यास्त हो जाने पर घर में, गौशाला में, देववृक्ष के नीचे तथा मन्दिरों में दीपक जलाकर रखना चाहिए। देवताओं के मंदिरों में, शमशान में और नदियों के तट पर भी अपने कल्याण के लिए घृत आदि से पाँच दिनों तक दीप जलाने चाहिए। ऐसा करने से जिनके श्राद्ध और तर्पण नहीं हुए हैं, वे पापी पितर भी दीपदान के पुण्य से परम मोक्ष को प्राप्त होते हैं।


शालिग्राम का दान


स्कन्दपुराण के अनुसार


सप्तसागरपर्यंतं भूदानाद्यत्फलं भवेत् ।।

शालिग्रामशिलादानात्तत्फलं समवाप्नुयात् ।।

शालिग्रामशिलादानात्कार्तिके ब्राह्मणी यथा ।।


सात समुद्रों तक की पृथ्वी का दान करने से जो फल प्राप्त होता है, शालिग्राम शिला के दान से मनुष्य उसी फल को पा लेता है । अतः कार्तिक मास में स्नान तथा श्रध्दा पूर्वक शालिग्राम शिला का दान अवश्य करना चाहिए।

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