शासन ने चेताया फिर भी जीएसवीएम मेडिकल कालेज प्रशासन बरत रहा लापरवाही

-मुख्यमंत्री के आदेश पर शासन की दो सदस्यीय टीम देखने आई थी हालात 

-लखनऊ से आए थे प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा एवं केजीएमयू के कुलपति

प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ 

कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी स्मारक (जीएसवीएम) मेडिकल कालेज में गंदगी और अव्यवस्था से बीमारी फैलने की धमक लखनऊ में सुनाई पड़ने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासन को टीम भेजकर हालात से अवगत कराने का आदेश दिया था। इस पर लखनऊ से प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा आलोक कुमार और किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल (से.) प्रो. विपिन पुरी की दो सदस्यीय टीम मेडिकल कालेज आई थी।


परिसर व हास्टलों का निरीक्षण के दौरान टीम के सदस्यों को गंदगी, अव्यवस्था और मेडिकल कालेज के अधिकारियों के बीच समन्वय की कमी पाई थी।इस पर टीम के सदस्यों ने उन्हें चेताया था, बावजूद इसके मेडिकल कालेज प्रशासन बेपरवाह बना हुआ है।


मेडिकल कालेज के यूजी गर्ल्स हास्टल में रह रही एमबीबीएस छात्रा की स्वाइन फ्लू से मौत हो गई।हास्टलों में रह रहे 75 छात्र-छात्राएं बीमार हैं, जिसमें से 12 स्वाइन फ्लू व डेंगू पीड़ित विद्यार्थियों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा था।


लखनऊ से आई शासन की दो सदस्यीय टीम 30 सितंबर को आई थी। उसने मेडिकल कालेज परिसर व हास्टलों की स्थिति देखने के बाद आइसीयू में भर्ती पाखी और मैटरनिटी विंग में भर्ती छात्र-छात्राओं से भी मिली थी।उसकी रिपोर्ट शासन को सौंपी थी। 


इस संदर्भ में प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा आलोक कुमार का कहना है कि परिसर के आसपास अतिक्रमण है।नाले की सफाई नहीं कराई गई, जिसमें गंदा पानी भरा हुआ है।परिसर के अंदर के हास्टल के भवनों की मरम्मत का काम चल रहा है।उसका मलबा वहीं पर एकत्र किया गया है।जिला प्रशासन की मदद से सफाई एवं व्यवस्था ठीक करने के निर्देश दिए हैं।कालेज प्रशासन अगर इस पर ध्यान देता तो ऐसी घटना से बचा जा सकता था।वहीं, केजीएमयू के कुलपति डा. विपिन पुरी का कहना है कि स्वाइन फ्लू हर साल फैलता है।इसका वायरस हर साल म्यूटेंट होता है, इसलिए बचाव के लिए सभी विद्यार्थियों को वैक्सीन लगवाई जाए।समय रहते बचाव के उपायों को सख्ती के साथ किया जाना चाहिए था।

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