Prarabdh Dharm-Aadhyatm : आज का पंचांग (10 अगस्त 2022)

दिनांक : 10 अगस्त, दिन :  बुधवार 


विक्रम संवत : 2079


शक संवत : 1944


अयन - दक्षिणायन


ऋतु - वर्षा ऋतु


मास - श्रावण (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार आषाढ़)


पक्ष - शुक्ल


तिथि - त्रयोदशी दोपहर 02:15 तक तत्पश्चात चतुर्दशी


नक्षत्र - पूर्वाषाढा सुबह 09:40 तक तत्पश्चात उत्तराषाढा


योग - प्रीति शाम 07:36 तक तत्पश्चात आयुष्मान


राहुकाल - दोपहर 12:44 से दोपहर 02:21 तक


सूर्योदय - 06:16


सूर्यास्त - 19:11


दिशाशूल - उत्तर दिशा में


पंचक


पंचक का आरंभ- 12 अगस्त 2022 शुक्रवार 14.49 मिनट से 16 अगस्त 2022, मंगलवार को 21.05 मिनट पर पंचक का समापन


एकादशी


-23 अगस्त, 2022 को अजा एकादशी है। अजा एकादशी की तिथि 22 अगस्त को देर रात में 3 बजकर 35 मिनट पर शुरू होकर 23 अगस्त को सुबह में 6 बजकर 6 मिनट पर समाप्त होगी।


प्रदोष


श्रावण शुक्ल त्रयोदशी, भौम प्रदोष व्रत

मंगलवार, 09 अगस्त 2022

09 अगस्त शाम 05:46 बजे - 10 अगस्त दोपहर 02:16 बजे


भाद्रपद, कृष्ण त्रयोदशी, बुद्ध प्रदोष व्रत

बुधवार, 24 अगस्त 2022

24 अगस्त सुबह 08:31 बजे - 25 अगस्त सुबह 10:38 बजे


अमावस्या


भाद्रपद, कृष्ण अमावस्या, शनि अमावस्या

शनिवार, 27 अगस्त 2022

अमावस्या प्रारंभ: 26 अगस्त 2022 दोपहर 12:24 बजे

अमावस्या समाप्त: 27 अगस्त 2022 को दोपहर 01:47 बजे


पूर्णिमा


श्रावणी पूर्णिमा, 12 अगस्त 2022

इस वर्ष श्रावण महीने की पूर्णिमा 12 अगस्त दिन, शुक्रवार को पड़ रही है। इस दिन पूर्णिमा तिथि 11 अगस्त की सुबह 10 बजकर 40 मिनट से शुरू होकर 12 अगस्त की सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक रहेगी।


व्रत पर्व विवरण - 

विशेष - त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)


रक्षाबंधन की डेट पर न हो कंफ्यूज, 11और 12 दोनों दिन पर राखी बांधने का शुभ मुहूर्त है।


श्रावण पूर्णिमा 11 अगस्त 2022 को सुबह 10 बजकर 38 मिनट पर शुरु होगी और अगले दिन 12 अगस्त 2022 को सुबह 7 बजकर 5 मिनट पर समाप्त होगी। 11 अगस्त को भद्रा काल दिनभर रहेगा। भद्रा की समाप्ती रात में 8.51 पर होगी। ऐसे में कई लोग 12 अगस्त को राखी मना सकते हैं।


रक्षाबंधन 11 अगस्त 2022 मुहूर्त - को जो रक्षाबंधन मना रहे हैं वो प्रदोष काल में रात्रि 08.52 मिनट से रात्रि 09.20 मिनट तक राखी बांध सकते हैं। इस दिन राखी बांधने के लिए ये सबसे उत्तम मुहूर्त है।


11 अगस्त 2022 को भद्रा सुबह से रात तक रहेगी, भद्रा में राखी बांधना अशुभ होता है, लेकिन समय के अभाव में जो लोग इस काल में राखी बांधने को मजबूर हैं वो प्रदोषकाल में शुभ, लाभ या अमृत का चौघड़ियां देखकर राखी बांधना सकते हैं।


पूर्णिमा तिथि का समापन 12 अगस्त के दिन 07.05 मिनट पर ही हो रहा है। इस दिन राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 05 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर 7 बजकर 05 मिनट तक ही है।



अगर 12 अगस्त को राखी बांध रहे हैं तो शुभ मुहूर्त का ध्यान जरूर रखें, क्योंकि इसी दिन से पंचक भी लग रहे हैं। 12 अगस्त 2022 शुक्रवार को पंचकी की शुरुआत दोपहर 2.49 मिनट से होगी जो 16 अगस्त, मंगलवार को रात्रि 9.07 बजे तक रहेगा।


रक्षाबंधन के पर्व पर दस प्रकार का स्नान


 श्रावण महिने में रक्षाबंधन की पूर्णिमा 11 अगस्त 2022 गुरुवार वाले दिन वेदों में दस प्रकार का स्नान बताया गया है |


गतांक से आगे....

5-गोरज स्नान – गायों के पैरों की मिट्टी थोड़ी ले ली, और वो लगा ली | गवां ख़ुरेंम ये वेद में आता है इसका नाम है दशविद स्नान | रक्षाबंधन के दिन किया जाता है | गवां ख़ुरेंम निर्धुतं यद रेनू गग्नेगतं | सिरसा तेल सम्येते महापातक नाशनं || अपने सिर पर वो गाय की खुर की मिट्टी लगा दी तो महापातक नाशनं | ये वेद भगवान कहते हैं  |

6-धान्यस्नान – जो हमारे गुरुदेव सप्तधान्य स्नान की बात बताते हैं | वो सब आश्रमों में मिलता है | गेंहूँ, चावल, जौ, चना, तिल, उड़द और मुंग ये सात चीजे | ये धान्यस्नान बताया | धान्योषौधि मनुष्याणां जीवनं परमं स्मरतं तेन स्नानेन देवेश मम पापं व्यपोहतु | सप्तधान स्नान ये भी पूनम के दिन लगाने का विधान है |

7-फल स्नान – वेद भगवान कहते हैं फल स्नान मतलब कोई भी फल का थोडा रस लगा दिया | और कोई नहीं तो आँवला बढियाँ फल है | आँवला हरा तो मिलेगा नहीं तो थोडा आँवले का पाऊडर  ले लिया और लगा दिया  गया हो फल स्नान | मतलब हमारे जीवन में अनंत फल की प्राप्ति हो और सांसारिक  फल की आसक्ति छूट जाय | इसलिए आज पूर्णिमा को हे भगवान फल के  रस से थोडा स्नान कर रहें हैं | किसी को और फल मिल जाये और थोडा लगा दिये जाय तो कोई घाटा नहीं हैं |

8+सर्वोषौधि स्नान – सर्वोषौधि माना आयुर्वेदिक औषधि खाना नहीं | इस स्नान में कई जड़ीबूटी आती हैं  | उसमे दूर्वा, सरसों, हल्दी, बेलपत्र ये सब डालते हैं  उसमें वो थोडासा पाऊडर  लेके शरीर पर रगड के स्नान किया जाता है | मेरी सब इन्द्रियाँ आँख, कान, नाक, जीभ,त्वचा ये सब पवित्र हो | इसमें सर्वोषौधि स्नान, और मेरा मन पवित्र रहें| मेरे मन में किसी के प्रति बुरे विचार न आये |

9-कुशोधक स्नान – कुश होता है वो थोडा पानी में मिला दिया और थोडा पानी हिला दिया | क्योंकि जो अपने घर में कुश रखते हैं ना तो उनके पास कोई मलिन आत्माएँ नहीं आ सकती | भूत, प्रेत आदि का जोर नहीं चलता | कुश क्या है ? जब भगवान का धरती पर वराह अवतार हुआ था | तो उनके शरीर से वो उखणकर जमीन पर गिरने लगे वही आज कुश के रूप में पाये जाते हैं, वो परम पवित्र है | वो कुश जहाँ पर हो वहाँ पर मलिन आत्मा नहीं आती हो तो भाग जाती हैं | तो कुश  पानी में थोडा हिला दिया और प्रार्थना कर दी की, मेरे मन में जो मलिन विचार हैं, गंदे विचार हैं  या कभी कभी आ जाते हैं वो सब भाग जाये | हरि ॐ ... हरि ॐ ... ॐ ,... करके उसे पानी में नहा दिया |*

10-हिरण्य स्नान – हिरण्य स्नान माने अगर अपने पास कोई सोने की चीज है | कोई सोने का गहना वो बाल्टी में डाल दिया, हिला दिया और स्नान कर लिया | हिलाने के बाद वो निकाल लेना बाल्टी में पड़ा नहीं रहे |


तो ये दशविद स्नान वेद में बताया | श्रावण मास के पूर्णिमा का दिन किया जाता है | आप इसमें से आप जितने कर सकते हो उतने कर लेना |1-2 न कर पाये तो जय सियाराम ... कह दें प्रभु ! हमसे जितना हो सकता था वो किया और जब शरीर पर पानी डाल रहे हैं तो ये श्लोक बोलना –


नमामि गंगे तव पाद पंकजं सुरासुरैः वंदित दिव्यरूपं |

भुक्तिचं मुक्तिचं ददासनित्यं भावानुसारें न सारे न सदा स्मरानाम ||

गंगेच यमुनेच गोदावरी सरस्वती नर्मदे सिंधु कावेरी।जलस्म्ये सन्निधिं कुरु ||

 ॐ ह्रीं गंगाय ॐ ह्रीं स्वाहा ||


तीर्थों का स्मरण करते हुये स्नान करें | तो ये बड़ा पुण्यदायी स्नान श्रावण पूर्णिमा (रक्षाबंधन) के दिन प्रभात को किया जाना चाहिये ऐसा वेद का आदेश है |

समाप्त.....


विद्यार्थी विशेष


विद्यार्थी पढ़ने में ज्यादा कमजोर हो तो –विद्यार्थी को सारस्वत मंत्र तो पिता देते ही है |

पर समझो कोई बच्चा कमजोर है ज्यादा... पढ़ नहीं सकता तो उसको सिखा दें ॐ हयग्रीवाय नम : ॐ हयग्रीवाय नम : ॐ हयग्रीवाय नम : ॐ हयग्रीवाय नम :अपने आराध्य को स्मरण करके जप करें  |


भगवान विष्णु के चौबीस अवतार थे उसमे हयग्रीव अवतार हैं | ये अग्निपुराण में अग्निदेव वशिष्ठ से कहते हैं |


विशेष - 11 अगस्त 2022 गुरुवार को हयग्रीव जयंती हैं ।


रक्षाबंधन के दिन

11 अगस्त 2022 गुरुवार को रक्षाबंधन है ।

यदि आप भी इस रक्षाबंधन पर धन व व्यापार से जुड़ी सभी परेशानियां खत्म करना चाहते हैं तो अपनाएं ये ज्योतिष शास्त्र के आसान उपाय...


रक्षाबंधन पर करें इन 10 में से कोई 1 काम, हमेशा भरी रहेगी तिजोरी


व्यापार वृद्धि के लिए


रक्षाबंधन के दिन महालक्ष्मी मंदिर में या घर पर ही देवी लक्ष्मी का पूजन कर दूध, चावल, केला व पंच मेवा से  बनी खीर देवी को अर्पण करें व बालकों में प्रसाद बांटे।


शत्रु ज्यादा परेशान कर रहे हों तो


शत्रु परेशान कर रहे हों तो रक्षाबंधन के दिन हनुमानजी को चोला चढ़ाकर, गुड़ का भोग लगाएं व गुलाब के फूल चढ़ाएं । इस समस्या का समाधान हो जाएगा।


दरिद्रता दूर करने के लिए


कोई भी ऐसा पौधा जो वटवृक्ष के नीचे उगा हुआ हो, राखी के दिन उसे अपने घर के किसी गमले में लाकर लगा लें। ऐसा करने से दरिद्रता दुर होती है और घर में स्थाई लक्ष्मी का निवास होता है।


पैसा वापस न मिल रहा हो तो


किसी ने आपसे पैसा उधार लिया हो और वापस न लौटा रहा हो तो रक्षाबंधन के दिन सूखे कपूर का काजल बनाकर एक कागज पर उसका नाम इस काजल से लिखकर एक भारी पत्थर से दबा दें।पैसा बहुत जल्दी वापस मिल जाएगा।


 बीमार रहते हों तो


यदि आप अक्सर बीमार रहते हैं तो रात को एक सिक्का सिरहाने रखें और सुबह उस सिक्के को श्मशान में बाहर से फेंक आएं।ये बीमारी की समस्या जल्द ही खत्म हो जाएगी।


व्यापार में सफलता न मिल रही हो तो


यदि आप व्यापार में लगातार असफल हो रहे हों तो रक्षाबंधन के दिन दोपहर में पांच कागजी नींबू, एक मुट्ठी काली मिर्च व एक मुट्ठी पीली सरसों के साथ रख दें।अगले दिन सुबह इन सभी चीजों को किसी सुनसान स्थान पर गाड़ दें।


ऋण मुक्ति के लिए


रक्षाबंधन के दिन गेहूँ के आटे में गुड़ मिलाकर पुए बनाएं और किसी हनुमान मंदिर में जाकर चढ़ाएं और गरीबों में बाँट दें।कर्ज से मुक्ति मिल जाएगी।


धन-समृद्धि के लिए


अगर आप अपार धन-समृद्धि चाहते हैं, तो रक्षाबंधन के दिन लाल रंग के मिट्टी के घड़े में नारियल रखकर उस पर लाल कपड़ा ढ़ककर झोली बांधकर बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें।


आर्थिक काम में असफलता मिल रही हो तो


सरसों के तेल में सिके गेहूँ के आटे व पुराने गुड़ से तैयार सात पुए, सात मदार (आक) के फूल, सिंदूर, आटे से तैयार सरसों के तेल का दीपक, पत्तल या अरंडी के पत्ते पर रखकर रक्षाबंधन की रात में किसी चौराहे पर रख कर कहें - हे मेरे दुर्भाग्य तुझे यही छोड़े जा रहा हूं कृपा करके मेरा पीछा ना करना।


कार्य सिद्धि के लिए


रक्षाबंधन के दिन गणेशजी के चित्र के सामने लौंग व सुपारी रखें।जब भी कहीं काम पर जाना हो, तो इस लौंग और सुपारी को साथ ले कर जाएं, तो काम सिद्ध होगा।

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