Prarabdh Dharm-Aadhyatm : आज का पंचांग (15 जुलाई 2022)

दिनांक : 15 जुलाई, दिन : शुक्रवार 


विक्रम संवत : 2079


शक संवत : 1944


अयन - दक्षिणायन


ऋतु - वर्षा ऋतु


मास - श्रावण (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार आषाढ़)


पक्ष - कृष्ण


तिथि - द्वितीया शाम 04:39 तक तत्पश्चात तृतीया


नक्षत्र - श्रवण शाम 05:31 तक तत्पश्चात धनिष्ठा


योग - प्रीति रात्रि 12:21 तक तत्पश्चात आयुष्मान्


राहुकाल - सुबह 11:05 से दोपहर 12:45 तक


सूर्योदय - 06:06


सूर्यास्त - 19:22


दिशाशूल - पश्चिम दिशा में


पंचक


पंचक का आरंभ- 15 जुलाई 2022, शुक्रवार को 28.19 मिनट से

पंचक का समापन- 20 जुलाई 2022, बुधवार को 12.51 मिनट पर।


एकादशी


 कामिका एकादशी जुलाई 24, 2022, रविवार


प्रदोष


जुलाई 2022 का दूसरा प्रदोष व्रत 25 जुलाई, सोमवार को किया जाएगा। इस दिन का पूजा मुहूर्त इस प्रकार रहेगा- शाम 07:17 से रात 09:21 तक।


व्रत पर्व विवरण - 


विशेष - द्वितीया को बृहती (छोटा  बैगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)


विघ्नों और मुसीबते दूर करने के लिए


16 जुलाई 2022 शनिवार को संकष्ट चतुर्थी (चन्द्रोदय रात्रि 10:02)


शिव पुराण में आता हैं कि हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी ( पूनम के बाद की ) के दिन सुबह में गणपतिजी का पूजन करें और रात को चन्द्रमा में गणपतिजी की भावना करके अर्घ्य दें और ये मंत्र बोलें -

ॐ गं गणपते नमः ।

ॐ सोमाय नमः ।


संक्रांति


16 जुलाई 2022 शनिवार  को संक्रांति (पुण्यकाल : सूर्योदय से सूर्यास्त तक)*

इसमें किया गया जप, ध्यान, दान व पुण्यकर्म अक्षय होता है ।


चतुर्थी‬ तिथि विशेष


चतुर्थी तिथि के स्वामी ‪भगवान गणेश‬जी हैं।

हिन्दू कैलेण्डर में प्रत्येक मास में दो चतुर्थी होती हैं।

पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्ट चतुर्थी कहते हैं।अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं।

शिवपुराण के अनुसार “महागणपतेः पूजा चतुर्थ्यां कृष्णपक्षके। पक्षपापक्षयकरी पक्षभोगफलप्रदा ॥

“ अर्थात प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि को की हुई महागणपति की पूजा एक पक्ष के पापों का नाश करनेवाली और एक पक्षतक उत्तम भोगरूपी फल देनेवाली होती है ।


कोई कष्ट हो तो


हमारे जीवन में बहुत समस्याएँ आती रहती हैं, मिटती नहीं हैं ।, कभी कोई कष्ट, कभी कोई समस्या | ऐसे लोग शिवपुराण में बताया हुआ एक प्रयोग कर सकते हैं कि, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (मतलब पुर्णिमा के बाद की चतुर्थी ) आती है | उस दिन सुबह छः मंत्र बोलते हुये गणपतिजी को प्रणाम करें कि हमारे घर में ये बार-बार कष्ट और समस्याएं आ रही हैं वो नष्ट हों |

छः मंत्र इस प्रकार हैं –

ॐ सुमुखाय नम: : सुंदर मुख वाले; हमारे मुख पर भी सच्ची भक्ति प्रदान सुंदरता रहे ।

ॐ दुर्मुखाय नम: : मतलब भक्त को जब कोई आसुरी प्रवृत्ति वाला सताता है तो… भैरव देख दुष्ट घबराये ।

ॐ मोदाय नम: : मुदित रहने वाले, प्रसन्न रहने वाले । उनका सुमिरन करने वाले भी प्रसन्न हो जायें ।

ॐ प्रमोदाय नम: : प्रमोदाय; दूसरों को भी आनंदित करते हैं । भक्त भी प्रमोदी होता है और अभक्त प्रमादी होता है, आलसी । आलसी आदमी को लक्ष्मी छोड़ कर चली जाती है । और  जो प्रमादी न हो, लक्ष्मी स्थायी होती है ।

ॐ अविघ्नाय नम:

ॐ विघ्नकरत्र्येय नम:

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