Prarabdh Dharm-Aadhyatm : आज का पंचांग (12 जुलाई 2022)

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दिनांक : 12 जुलाई, दिन : मंगलवार 


विक्रम संवत : 2079


शक संवत : 1944


अयन - दक्षिणायन


ऋतु - वर्षा ऋतु


मास - आषाढ़


पक्ष - शुक्ल


तिथि - त्रयोदशी सुबह 07:46 तक तत्पश्चात चतुर्दशी


नक्षत्र - मूल 13 जुलाई रात्रि 02:21 तक तत्पश्चात पूर्वाषाढा


योग - ब्रह्म शाम 04:59 तक तत्पश्चात इन्द्र


राहुकाल - शाम 04:04 से शाम 05:44 तक


सूर्योदय - 06:05


सूर्यास्त - 19:22


दिशाशूल - उत्तर दिशा में


पंचक


पंचक का आरंभ- 15 जुलाई 2022, शुक्रवार को 28.19 मिनट से

पंचक का समापन- 20 जुलाई 2022, बुधवार को 12.51 मिनट पर।


एकादशी


देवशयनी एकादशी जुलाई 10, 2022, रविवार


 कामिका एकादशी जुलाई 24, 2022, रविवार


प्रदोष


जुलाई 2022 का पहला प्रदोष व्रत 11 जुलाई, सोमवार को किया जाएगा। सोमवार को त्रयोदशी तिथि होने से ये सोम प्रदोष कहलाएगा। इस दिन का पूजा मुहूर्त इस प्रकार रहेगा- शाम 07:22 से रात 09:24 तक।


जुलाई 2022 का दूसरा प्रदोष व्रत 25 जुलाई, सोमवार को किया जाएगा। इस दिन का पूजा मुहूर्त इस प्रकार रहेगा- शाम 07:17 से रात 09:21 तक।


व्रत पर्व विवरण - चतुर्दशी क्षय तिथि


विशेष - त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

      

अद्भूत विद्वत्ता प्राप्ति योग


विद्यालाभ के लिए मंत्र


  ‘ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं वाग्वादिनि सरस्वति मम जिव्हाग्रे वद वद ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं नम: स्वाहा|’

यह मंत्र 13 जुलाई 2022 रात्रि 11:18 से रात्रि 11:45 बजे के वीच 108 बार जप लें और फिर मंत्रजप के बाद उसी दिन रात्रि 11:30 से 12 के बीच जीभ पर लाल चंदन से ‘ह्रीं’ मंत्र लिख दें |

 जिसकी जीभ पर यह मंत्र इस विधि से लिखा जायेगा उसे विद्यालाभ व अदभुत विद्वत्ता की प्राप्ति होगी |

              

गुरु का मानस-पूजन कैसे करें गुरु पूर्णिमा पर


गुरुपूनम की सुबह उठें । नहा-धोकर थोडा-बहुत धूप, प्राणायाम आदि करके श्रीगुरुगीता का पाठ कर लें ।

फिर इस प्रकार मानसिक पूजन करें

‘मेरे गुरुदेव ! मन-ही-मन, मानसिक रूप से मैं आपको सप्ततीर्थों के जल से स्नान करा रहा हूँ । मेरे नाथ ! स्वच्छ वस्त्रों से आपका चिन्मय वपु (चिन्मय शरीर) पोंछ रहा हूँ । शुद्ध वस्त्र पहनाकर मैं आपको मन से ही तिलक करता हूँ, स्वीकार कीजिये । मोगरा और गुलाब के पुष्पों की दो मालाएँ आपके वक्षस्थल में सुशोभित करता हूँ ।

आपने तो हृदयकमल विकसित करके उसकी सुवास हमारे हृदय तक पहुँचायी है लेकिन हम यह पुष्पों की सुवास आपके पावन तन तक पहुँचाते हैं, वह भी मनसे, इसे स्वीकार कीजिये । साष्टांग दंडवत् प्रणाम करके हमारा अहं आपके श्रीचरणों में धरते हैं ।

हे मेरे गुरुदेव ! आज से मेरी देह, मेरा मन, मेरा जीवन मैं आपके दैवी कार्य के निमित्त पूरा नहीं तो हर रोज 2 घंटा, 5 घंटा अर्पण करता हूँ, आप स्वीकार करना । भक्ति, निष्ठा और अपनी अनुभूति का दान देनेवाले देव ! बिना माँगे कोहिनूर का भी कोहिनूर आत्मप्रकाश देनेवाले हे मेरे परम हितैषी ! आपकी जय-जयकार हो ।’

इस प्रकार पूजन तब तक बार-बार करते रहें जब तक आपका पूजन गुरु तक, परमात्मा तक नहीं पहुँचे । और पूजन पहुँचने का एहसास होगा, अष्टसात्त्विक भावों (स्तम्भ 1 , स्वेद 2 , रोमांच, स्वरभंग, कम्प, वैवण्र्य 3, अश्रु, प्रलय 4 ) में से कोई-न-कोई भाव भगवत्कृपा, गुरुकृपा से आपके हृदय में प्रकट होगा ।

इस प्रकार गुरुपूर्णिमा का फायदा लेने की मैं आपको सलाह देता हूँ । इसका आपको विशेष लाभ होगा, अनंत गुना लाभ होगा 

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