Prarabdh Dharm-Aadhyatm : आज का पंचांग (03 मार्च 2022)

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03 मार्च, दिन : गुरुवार


विक्रम संवत : 2078 (गुजरात - 2077)


शक संवत : 1943


अयन : उत्तरायण


ऋतु - वसंत ऋतु प्रारंभ


मास - फाल्गुन (गुजरात एवं महाराष्ट्र के अनुसार- माघ)


पक्ष - शुक्ल


तिथि - प्रतिपदा रात्रि 09:36 तक तत्पश्चात द्वितीया


नक्षत्र - पूर्व भाद्रपद 04 मार्च रात्रि 01:56 तक तत्पश्चात उत्तर भाद्रपद


योग - साध्य 04 मार्च रात्रि 03:29 तक तत्पश्चात शुभ


राहुकाल - दोपहर 02:19 से शाम 03:57 तक


सूर्योदय - 06:58


सूर्यास्त - 18:42


दिशाशूल - दक्षिण दिशा में


पंचक


पंचक का आरंभ 28 मार्च 2022, सोमवार को रात्रि 11.55 बजे से 

पंचक का समापन- 2 अप्रैल 2022, शनिवार को सुबह 11.21 बजे तक 


एकादशी


सोमवार, 14 मार्च 2022- आमलकी एकादशी

सोमवार, 28 मार्च 2022- पापमोचनी एकादशी


प्रदोष


15 मार्च, दिन: मंगलवार, भौम प्रदोष व्रत, पूजा मुहूर्त: शाम 06:29 बजे से रात 08:53 बजे तक


29 मार्च, दिन: मंगलवार, भौम प्रदोष व्रत, पूजा मुहूर्त: शाम 06:37 बजे से रात 08:57 बजे तक


पूर्णिमा


17 मार्च, दिन: गुरुवार: फाल्गुन पूर्णिमा


व्रत पर्व विवरण - 


विशेष - प्रतिपदा को कूष्माण्ड(कुम्हड़ा, पेठा) न खाये, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

          

प्रायश्चित जप


पूर्वजन्म या इस जन्म का जो भी कुछ पाप-ताप है, उसे निवृत्त करने के लिए अथवा संचित नित्य दोष के प्रभाव को दूर करने के लिए प्रायश्चितरूप जो जप किया जाता है उसे प्रायश्चित जप कहते हैं |कोई पाप हो गया, कुछ गल्तियाँ हो गयीं, इससे कुल-खानदान में कुछ समस्याएँ हैं अथवा अपने से गल्ती हो गयी और आत्म-अशांति है अथवा भविष्य में उस पाप का दंड न मिले इसलिए प्रायश्चित – संबंधी जप किया जाता है |


ॐ ऋतं च सत्यं चाभिद्धात्तपसोऽध्यजायत |

ततो रात्र्यजायत तत: समुद्रो अर्णव: ||

समुद्रादर्णवादधि संवत्सरो अजायत |

अहोरात्राणि विदधद्विश्वस्य मिषतो वशी ||

सूर्याचन्द्रमसौ धाता यथापूर्वमकल्पयत् |

दिवं च पृथिवीं चान्तरिक्षमथो स्व: || (ऋग्वेद :मंडल १०, सूक्त १९०, मंत्र १ - ३ )


इन वेदमंत्रों को पढ़कर त्रिकाल संध्या करें तो किया हुआ पाप माफ हो जाता है, उसके बदले में दूसरी नीच योनियाँ नहीं मिलतीं | इस प्रकार की विधि है |


लक्ष्मी कहा विराजती है


जहाँ भगवान व उनके भक्तों का यश गाया जाता है वहीँ भगवान की प्राणप्रिया भगवती लक्ष्मी सदा विराजती है | (श्रीमद् देवी भागवत )


मन चंचल हो तो


जब भी संध्या करने बैठे  सुबह या शाम को | तो 24 बार मन में राम नाम का उच्चारण करके फिर बैठे | खाली 24 बार, उँगलियों पर नहीं गिनना  1,2,3 मन में ही जपना मन में ही गिनती करना | मन चंचल हो तो इससे मन शांत हो जाता है  कई लोग बोलते हैं न हम जप करने बैठते हैं  मन नहीं  लगता | तो 24 बार करके बैठे | अपनी मन की आँखों के आगे अपने इष्ट अपने गुरु को रखें | कि मेरा मन जप में, ध्यान में, उपासना में लग जाये तो बड़ा भारी लाभ होता है | तो ब्रह्म राम ते नाम बड़, वरदायक वरदानी | ये नाम जो है वरदान देने वालो को भी वर देने वाला है |  ऐसी इस नाम में शक्ति है।  

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