Prarabdh Dharm-Aadhyatm : आज का पंचांग (26 जनवरी 2022)

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26 जनवरी, दिन : बुद्धवार


विक्रम संवत : 2078 (गुजरात - 2077)


शक संवत : 1943


अयन : दक्षिणायन


 ऋतु : शिशिर


मास -  माघ (गुजरात एवं महाराष्ट्र के अनुसार - पौष)


पक्ष -  कृष्ण


तिथि - नवमी 27 जनवरी प्रातः 04:34 तक तत्पश्चात दशमी


नक्षत्र -  स्वाती सुबह 10:07 तक तत्पश्चात विशाखा


योग - गण्ड 27 जनवरी प्रातः 04:09 तक तत्पश्चात वृद्धि


राहुकाल - दोपहर 12:51 से दोपहर 02:15 तक


सूर्योदय - 07:18


सूर्यास्त - 18:23


दिशाशूल - उत्तर दिशा में


पंचक-


पंचक का आरंभ- 1 फरवरी 2022, मंगलवार को 06.45 मिनट से

6 फरवरी 2022, रविवार को 17.10 मिनट पर।


व्रत और त्योहार


एकादशी 


28 जनवरी : षटतिला एकादशी


प्रदोष  


30 जनवरी : रवि प्रदोष


व्रत पर्व विवरण -गणतंत्र दिवस


विशेष - नवमी को लौकी खाना गोमांस के समान त्याज्य है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

          

इन तिथियों व योगों का लाभ अवश्य लें


28 जनवरी - षट्तिला एकादशी (स्नान, उबटन, जलपान, भोजन, दान व होम में तिल के उपयोग से पाप-नाश)


31 जनवरी - सोमवती अमावस्या ( दोपहर 02:19 से 01 फरवरी सूर्योदय तक) (तुलसी की 108 परिक्रमा करने से दरिद्रता नाश)


05 फरवरी - वसंत पंचमी ( इस दिन सारस्वत्य मन्त्र का जप विशेष लाभदायी, अधिक-से-अधिक जप करें |)


07 फरवरी - माघ शुक्ल सप्तमी ( प्रात: पुण्यस्नान व व्रत करके गुरु-पूजन करने से सम्पूर्ण माघ-स्नान के फल व वर्षभर के रविवार व्रत के पुण्य की प्राप्ति तथा सम्पूर्ण पापों का नाश व सुख-सौभाग्य की वृद्धि )


09 फरवरी - बुधवारी अष्टमी (सूर्योदय से सुबह 08:32 तक)


12 फरवरी - जया एकादशी (व्रत से ब्रह्महत्यातुल्य पाप व पिशाच्यत्व का नाश)


13 फरवरी - विष्णुपदी संक्रान्ति (पुण्यकाल :सूर्योदय से दोपहर 12:53 तक) (ध्यान, जप व पुण्यकर्म का लाख गुना फल)


14 फरवरी - मात्रृ-पितृ पूजन दिवस, माघ शुक्ल त्रयोदशी इस दिन से माघी पूर्णिमा (16 फरवरी) तक प्रात: पुण्यस्नान तथा दान, व्रत आदि पुण्यकर्म करने से सम्पूर्ण माघ-स्नान का फल |)


वायु की तकलीफ में


वायु की तकलीफ है, जोडों का दर्द है तो 10-15 तुलसी के पत्ते, 1-2 काली मिर्च, 10-12 ग्राम गाय का घी मिलाकर खाया करें l वायु सम्बन्धी बीमारियों में आराम होगा l


दीर्घायु के लिए


2 ग्राम सौंठ में पानी मिलाकर रात को लोहे की कड़ाही के अंदर लेप करें l प्रातः काल वह सौंठ दूंध में मिलाकर पीने से दीर्घायुश की प्राप्ति होती है l

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