Balia News:अध्यात्म, उत्सर्ग, अवदान की प्रेरक भूमि बलिया अब नैसर्गिक मूल्यों व संवेदनाओं संग लिखेगी नया इतिहास

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142वें स्थापना दिवस पर कवि और साहित्यकारों ने युवाओं को बताया माटी का महात्म्य 



पर्यटन, प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित सूक्ष्म लघु उद्योगों, स्वरोजगार से बदली जा सकती है, बाढ़ की विभिषिका झेलने वाले जिले की तकदीर

प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, बलिया

बागी, बलिदानी बलिया, त्रयलोक की सिद्धभूमि और बलिया राष्ट्र है। ऐसे गौरवान्वित करने वाले विशेषणों से विभूषित होने वाले बलिया जनपद के वर्तमान स्वरूप का जन्म 01नवम्बर 1879 को हुआ था। यह बातें सोमवार को महर्षि भृगु मंदिर में सम्पन्न स्थापना दिवस समारोह में इतिहासकार शिवकुमार सिंह कौशिकेय ने कहीं। 


उन्होंने कहा कि पौराणिक काल की अनेकों युगांतरकारी घटनाओं की साक्षी रही है। इस विमुक्तभूमि, भृगुक्षेत्र, दर्दरक्षेत्र का प्रामाणिक इतिहास मिस्टर एचआर नेविल द्वारा संकलित गजेटियर के पृष्ठ 208 से प्रारंभ होता है। जिसके अनुसार समाधारित भगवान शंकर द्वारा जिले के कारों गांव में प्यार के देवता, देवसेनापति कामदेव जलाने का उल्लेख किया गया है। 


उन्होंने कहा कि बलिया नामकरण के संदर्भ में ब्रिटिश इतिहासकारों ने रामायण महाकाव्य के रचयिता महर्षि बाल्मीकी का आश्रम होने से बाल्मीकी आश्रम, बालमिकिया से बलिया होना बताया है। वहीं, कुछ विद्वानों ने इसका नामकरण बलुई भूमि से बलिया होना बताया है। स्थानीय विद्वानों ने भार्गव शुक्राचार्य द्वारा दानवीर राजा बलि की यज्ञ भूमि होने के कारण बलियाग से बलिया नाम पड़ने का जिक्र किया है। कुछ विद्वानों ने बुलि राजाओं की राजधानी होने के कारण बलिया होना बताया है।


वहीं, मिस्टर फुहरर ने वर्तमान बलिया शहर के दक्षिण गंगा तटीय धर्मारण्य में महर्षि भृगु, दर्दर, गर्ग, पराशर, वशिष्ठ, अत्रि विश्वामित्र, दुर्वासा, भारद्वाज आदि ऋषि-मुनियों के द्वारा तपस्या करने का उल्लेख किया गया है। श्री कौशिकेय ने कहा कि 1450-1200 ईसापूर्व से पहले भी यहाँ मानव बस्ती होने के पुरातात्विक प्रमाण मिलते हैं। 603 - 551ईसापूर्व तक यह भूभाग अध्यात्मम, राजनीति और व्यापार का प्रमुख केन्द्र रहा है। काशी, कोसल व मगध साम्राज्यों के पूज्य महाभारत महाकाव्य के रचयिता, हस्तिनापुर के उत्तराधिकारियों के जनक वेद व्यास की जन्मभूमि और कर्मभूमि यही थी।


वर्तमान बलिया जिले के भू भाग पर सदैव दिल्ली के बादशाहों की दृष्टि रहती थी। 1194 ईस्वी में कुतुबद्दीन ऐबक जिले के कुतुबगंज घाट आया था। 1202 ईस्वी में इख़्तियार मुहम्मद आया। श्री कौशिकेय ने बताया कि सबसे पहले सन् 1302 ई. में बख्तियार खिलजी ने बिहार और बंगाल के भू-भाग को काटकर बलिया नाम से राजस्व वसूली की ईकाई महाल बनाया था। 1493 ईस्वी में सिकन्दर लोदी आया, लेकिन सभी खाली हाथ लौटे। मध्ययुगीन इतिहास की पहली जल और थल की लड़ाई की साक्षी यह भूमि है। 1529 ईस्वी में बाबर और महमूद लोदी के बीच यह जंग कठौडा के घाघरा तट पर हुई थी।


श्री कौशिकेय ने कहा कि  01 नवम्बर 1879 ईस्वी को अवध के नायब वजीर आसुफदौला द्वारा ब्रिटिश सरकार को सौंप दिये गये। बनारस कमिश्नरी के गाजीपुर जिले की बलिया तहसील को गाजीपुर, आजमगढ़ और बिहार के शाहाबाद जिले की बिहिया परगना के भू-भाग को लेकर बलिया जिले की स्थापना की गई थी। उस समय इस जिले में बलिया, बाँसडीह और रसड़ा तीन तहसील बनायी गयी। पहले जिलाधीश के रुप में मिस्टर टीडी राबर्टस् की तैनाती की गयी थी। कवि सम्मेलन में शिवजी पाण्डेय रसराज, डाॅ. कादम्बिनी सिंह, डाॅ. राजेन्द्र भारती, डाॅ. जनार्दन चतुर्वेदी कश्यप, डाॅ. नवचंद तिवारी, डाॅ. फतेहचंद बेचैन, डाॅ. मनोज राजहंस ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ. जनार्दन राय एवं संचालन शशि प्रेमदेव ने किया।

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