Big News : रेलवे अस्पताल का टॉयलेट में सपा के रंग की लगाईं टाइल्स

  • गोरखपुर रेलवे अस्पताल के टॉयलेट का रंग देखकर समाजवादी पार्टी ने जताई आपत्ति
  • सरकार पर राजनीतिक द्वेष की भावना के तहत टॉयलट को पार्टी का रंग देने का आरोप


प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, गोरखपुर



उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शहर गोरखपुर से रेलवे अस्पताल के टॉयलेट की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इस तस्वीर पर समाजवादी पार्टी ने आपत्ति जताते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है। इसके लिए केंद्र एवं राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया है।


दरअसल, गोरखपुर में पूर्वोत्तर रेलवे का ललित नारायण मिश्र अस्पताल है। इसका संचालन रेलवे करता है, जहां रेलवे के अधिकारियों एवं कर्मचारियों का इलाज होता है। गोरखपुर रेलवे अस्पताल के टॉयलेट की दीवारों पर लाल और हरे रंग के टाइल्स लगाकर समाजवादी पार्टी के झंझे जैसा रंग दिया गया है। टॉयलेट की दीवारों को समाजवादी पार्टी के रंगे में रगे जाने पर आपत्ति जताई है। सपा ने सरकार पर राजनीतिक द्वेष की भावना के तहत ऐसा करने का आरोप लगया है।


समाजवादी पार्टी ने गुरुवार को ट्वीट करके आपत्ति जताई। ट्वीट में लिखा है कि यह दूषित सोच रखने वाले सत्ताधीशों द्वारा राजनीतिक द्वेष के चलते गोरखपुर रेलवे अस्पताल में शौचालय की दीवारों को सपा के रंग में रंगना लोकतंत्र को कलंकित करने वाली शर्मनाक घटना! एक प्रमुख राजनीतिक पार्टी के ध्वज के रंगो का अपमान घोर निंदनीय। संज्ञान ले हो कार्रवाई, तत्काल बदला जाए रंग।


दरअसल, गोरखपुर रेलवे अस्पताल के शौचालयों को लाल और हरे रंग की टाइलें लगाई गई हैं। फोटो वॉयरल होने पर समाजवादी पार्टी की ओर से भाजपा पर हमला किया जा रहा है। हालांकि, इस प्रकरण में यूपी सरकार या फिर भारतीय जनता पार्टी की ओर से कोई रिएक्शन नहीं आया है। राज्य में राज्यसभा चुनाव का राजनीतिक माहौल बना है। इसको लेकर भी तकरार बढ़ सकती है।


समाजवादी पार्टी ने इसे लेकर ट्विटर पर रेल मंत्री पीयूष गोयल और रेल मंत्रालय से भी शिकायत की है। फिलहाल सरकार की ओर से इस आरोप पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। और न ही दीवरों का रंग बदलने की कार्रवाई ही की गई है। लेकिन सपा के आरोपों के बाद ट्विटर पर भी इन रंगों के प्रयोग को लेकर काफी चर्चा हो रही है।


हालांकि नार्थ ईस्टर्न रेलवे ने समाजवादी पार्टी के ट्वीट का जवाब दिया है। उसमें कहा है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत यह टॉयलेट वर्षों पहले बनाए गए थे। इस टॉयलेट में लगे टाइल्स भी वर्षों पुराने हैं। इसका किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है।

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