SGPGI लखनऊ: 10 करोड़ बच्चों की सेहत का सवाल! SGPGI में 'पीडियाट्रिक एंडो क्लीनिक्स 2026' में जुटे विदेशी विशेषज्ञों ने साझा किए इलाज के गुर

SGPGI लखनऊ के पीडियाट्रिक एंडोक्रिनोलॉजी विभाग में 'पीडियाट्रिक एंडो क्लीनिक्स 2026' (PEC-2026) का सफल आयोजन। जानें बच्चों में हार्मोनल विकारों के इलाज और SGPGI द्वारा दी जा रही मुफ़्त सेवाओं की पूरी जानकारी।

SGPGI लखनऊ में बच्चों में हार्मोनल विकारों के सटीक इलाज पर मंथन

​प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ

संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI), लखनऊ के टेलीमेडिसिन ऑडिटोरियम में 'पीडियाट्रिक एंडो क्लीनिक्स 2026' (PEC-2026) का आयोजन किया गया। 17 और 18 अक्टूबर को आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यक्रम का संचालन पीडियाट्रिक एंडोक्रिनोलॉजी और एंडोक्रिनोलॉजी विभागों की ओर से संयुक्त रूप से किया गया।

​'पीडियाट्रिक एंडो क्लीनिक्स' का आयोजन हर वर्ष किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों से संबंधित हार्मोन संबंधी चिकित्सा (पीडियाट्रिक एंडोक्रिनोलॉजी) के क्षेत्र में आधुनिक ज्ञान और क्लिनिकल कौशल (Clinical Skills) को मजबूत करना है।

 राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का जुटाव

​इस वर्ष आयोजित 'PEC-2026' में पूरे भारत से एंडोक्रिनोलॉजी और पीडियाट्रिक एंडोक्रिनोलॉजी के लगभग 50 प्रशिक्षुओं (Trainees) और फेलो ने भाग लिया।

​कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी के रूप में विश्व प्रसिद्ध विशेषज्ञों ने शिरकत की और मार्गदर्शन साझा किया, जिसमें ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न ​प्रो. मार्गरेट ज़ाचारिन और ऑस्ट्रेलिया के मोनाश यूनिवर्सिटी ​डॉ. क्विन गुयेन रहे।

​ निदेशक पद्मश्री प्रो. आरके धीमन का वक्तव्य

​कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों और डॉक्टरों को संबोधित करते हुए SGPGI के निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर आरके धीमन ने कहा, ​उत्तर प्रदेश में बच्चों और किशोरों की आबादी लगभग 10 करोड़ है। इतनी विशाल जनसंख्या के लिए विशिष्ट पीडियाट्रिक केयर (Specialised Paediatric Care) की अत्यंत जरूरी है। इस क्षमता और विशेषज्ञता को विकसित करने के लिए PEC जैसे उच्चस्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम अत्यंत आवश्यक हैं। SGPGI में बनने वाला आगामी 'एडवांस्ड पीडियाट्रिक सेंटर' (Advanced Paediatric Centre) राज्य की वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश में पीडियाट्रिक एंडोक्रिनोलॉजी सेवाओं की नींव रखने और उन्हें मजबूती से स्थापित करने में प्रो. विजयलक्ष्मी भाटिया के ऐतिहासिक योगदान को भी विशेष रूप से रेखांकित किया।

​ SGPGI में पीडियाट्रिक एंडोक्रिनोलॉजी सेवाओं का गौरवशाली इतिहास

SGPGI में पीडियाट्रिक एंडोक्रिनोलॉजी विभाग की औपचारिक स्थापना वर्ष 2022 में हुई थी, लेकिन एंडोक्रिनोलॉजी विभाग की पीडियाट्रिक एंडोक्रिनोलॉजी इकाई वर्ष 1989 से ही बच्चों के लिए हार्मोन संबंधी चिकित्सा सेवाएं निरंतर प्रदान कर रही है।

​ऐतिहासिक उपलब्धि

इसी इकाई ने वर्ष 2001 में देश का पहला व्यवस्थित (Structured) पीडियाट्रिक एंडोक्रिनोलॉजी कोर्स शुरू किया था।

​विभाग द्वारा दिए जाने वाले प्रमुख इलाज

​यह विभाग बच्चों और किशोरों में हार्मोन संबंधी विकारों की विस्तृत श्रृंखला के लिए व्यापक देखभाल प्रदान करता है।

विकास और यौवन संबंधी विकार: शारीरिक लंबाई न बढ़ना (Short Stature) या समय से पहले/देर से यौवन आना।

मासिक धर्म समस्याएं: किशोरियों में अनियमित माहवारी व अन्य संबंधित विकार।

थायरॉयड और एड्रिनल रोग: बच्चों में थायरॉयड का असंतुलन और एड्रिनल ग्रंथि की बीमारियां।

यौन विकास के विकार (DSD): जन्मजात या जेनेटिक हार्मोन असंतुलन।

​हड्डियों और खनिजों की समस्याएं: जैसे बच्चों में कैल्शियम की कमी या बार-बार फ्रैक्चर होना।

​लाइफस्टाइल विकार: बचपन का मोटापा (Childhood Obesity) और बाल मधुमेह (Childhood Diabetes)।

​SGPGI द्वारा संचालित विशेष जन-स्वास्थ्य सेवाएं

​1. मुफ़्त ग्रोथ हार्मोन थेरेपी (Free Growth Hormone Therapy)

​ग्रोथ हार्मोन की कमी (GHD), टर्नर सिंड्रोम या प्राडर-विली सिंड्रोम जैसी स्थितियों का इलाज सामान्यतः काफी महंगा होता है और कई गरीब परिवारों की पहुंच से बाहर होता है। ​SGPGI का विभाग स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की 'राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति' (National Rare Disease Policy) के तहत, मेडिकल जेनेटिक्स विभाग की सहायता से पात्र बच्चों को यह महंगी ग्रोथ हार्मोन थेरेपी पूरी तरह मुफ़्त उपलब्ध कराता है।

​2. बच्चों के लिए डायबिटीज़ क्लिनिक व सपोर्ट ग्रुप

​समर्पित क्लिनिक: विभाग टाइप-1 और अन्य प्रकार की डायबिटीज़ से पीड़ित बच्चों और किशोरों के लिए एक विशाल डायबिटीज़ क्लिनिक संचालित करता है, जहां उत्तर प्रदेश के अलावा पड़ोसी राज्यों से आने वाले बच्चों को भी विशेषज्ञ चिकित्सा मिलती है।

डायबिटीज़ सपोर्ट ग्रुप: विभाग एक 'डायबिटीज़ सपोर्ट ग्रुप' चलाता है, जिसकी हर वर्ष आमने-सामने (In-Person) बैठकें होती हैं। यह ग्रुप डायबिटीज़ पीड़ित बच्चों और उनके अभिभावकों को सही शिक्षा, काउंसलिंग और आपसी सहयोग (Peer Support) देकर इस स्थिति को सही तरीके से मैनेज करने में मदद करता है।

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