SIR को लेकर लोकदल अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बड़े नेताओं के रिकॉर्ड भी सत्यापन के दायरे में आ रहे हैं तो गरीब, किसान, मजदूर और आम मतदाता के सामने चुनौती बढ़ सकती है। उन्होंने पात्र मतदाताओं के नाम उचित सत्यापन और सुनवाई के बिना न हटाने की मांग की। SIR 2026, Voter List, Sunil Singh, Lok Dal, Election Commission, Electoral Roll, SIR Verification, Voter Rights, Lucknow.
प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि देश के कई बड़े नेताओं और महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके लोगों के नाम और तस्वीरें भी SIR के दौरान सत्यापन से जुड़ी खबरों में सामने आ रही हैं। ऐसे में यह चिंता स्वाभाविक है कि जब दिग्गजों के रिकॉर्ड भी सत्यापन की प्रक्रिया में आ सकते हैं तो गरीब, मजदूर, किसान और आम मतदाता के सामने कितनी बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।
सुनील सिंह ने कहा कि मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियाद है। किसी भी पात्र नागरिक का नाम केवल दस्तावेजों की कमी, रिकॉर्ड में तकनीकी त्रुटि अथवा सत्यापन प्रक्रिया की जटिलता के कारण प्रभावित नहीं होना चाहिए। उन्होंने SIR की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम को लेकर कोई आपत्ति, विसंगति या सत्यापन की आवश्यकता सामने आती है, उन्हें अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।
दरअसल, निर्वाचन आयोग SIR के तहत मतदाता सूची के रिकॉर्ड का पुनरीक्षण कर रहा है। आयोग के आधिकारिक पोर्टल पर SIR-2026 के लिए मतदाता अपना नाम पिछले SIR के रिकॉर्ड में खोज सकते हैं। किसी नोटिस की स्थिति में संबंधित दस्तावेज ऑनलाइन जमा करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
हाल के दिनों में दिल्ली में SIR से संबंधित नोटिसों में कई प्रमुख नेताओं और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के नाम सामने आने की खबरें आई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, इन मामलों में मतदाता सूची और उपलब्ध रिकॉर्ड के बीच विसंगतियों के आधार पर सत्यापन की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। निर्वाचन अधिकारियों की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि नोटिस जारी होना अपने-आप मतदाता का नाम हटाए जाने का अर्थ नहीं है।
सुनील सिंह ने कहा कि सवाल किसी एक राजनीतिक दल या व्यक्ति का नहीं है, बल्कि गरीब के वोट, किसान के वोट, मजदूर के वोट और प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा का है।
उन्होंने कहा कि यदि बड़े और प्रभावशाली लोगों के नाम भी रिकॉर्ड के सत्यापन के दायरे में आ सकते हैं तो आम नागरिक के अधिकारों की सुरक्षा की जिम्मेदारी और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। SIR के दौरान प्रशासन और निर्वाचन अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम उचित सत्यापन और पर्याप्त सुनवाई के बिना न हटे।
उन्होंने मांग की कि SIR की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखी जाए और प्रत्येक पात्र मतदाता को अपने मताधिकार की रक्षा के लिए आवश्यक अवसर और प्रक्रिया संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

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