प्रारब्ध न्यूज़ ब्यूरो, लखनऊ
आज के डिजिटल दौर में व्हाट्सएप (WhatsApp) हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है। चैटिंग से लेकर बिजनेस डील्स तक, सब कुछ इसी प्लेटफॉर्म पर होता है। यूजर्स की प्राइवेसी और सुविधा को ध्यान में रखते हुए व्हाट्सएप अक्सर नए फीचर्स लाता रहता है। इसी कड़ी में कंपनी एक नया ‘यूजर आईडी' (WhatsApp User ID) फीचर टेस्ट कर रही है, जिससे अब आपको किसी से चैट करने के लिए अपना मोबाइल नंबर शेयर करने की जरूरत नहीं होगी।इस नए फीचर के सामने आते ही भारत सरकार और आईटी मंत्रालय (IT Ministry) पूरी तरह सतर्क हो गए हैं।
यूजर आईडी' (WhatsApp User ID) क्या है
अब तक व्हाट्सएप पर किसी से भी कनेक्ट होने के लिए आपको अपना 10 अंकों का मोबाइल नंबर देना पड़ता था। इससे कई बार प्राइवेसी का खतरा रहता था, खासकर महिलाओं और पब्लिक प्रोफेशनल्स के लिए।
नए 'User ID' फीचर के आने के बाद, हर यूजर इंस्टाग्राम या एक्स (ट्विटर) की तरह अपना एक यूनिक यूजरनेम (जैसे- @ramesh_9) बना सकेगा। सामने वाला व्यक्ति सिर्फ इस यूजर आईडी को सर्च करके आपसे चैट कर पाएगा, यानी आपका पर्सनल मोबाइल नंबर पूरी तरह छिपा रहेगा।
सरकार और आईटी मंत्रालय क्यों हुए सतर्क?
प्राइवेसी के लिहाज से यह फीचर जितना बेहतरीन दिख रहा है, सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह उतनी ही बड़ी सिरदर्दी बन सकता है। डिजिटल फ्रॉड और ऑनलाइन स्कैम्स के बढ़ते मामलों को देखते हुए “केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)” इस फीचर की सुरक्षा जांच (Security Audit) करने की तैयारी में है। सरकार की मुख्य चिंताएं निम्नलिखित हैं।
स्कैमर्स को छिपाने का नया हथियार-
बिना मोबाइल नंबर के सिर्फ यूजर आईडी के जरिए अकाउंट बनने से साइबर अपराधियों को अपनी असली पहचान छिपाने में आसानी होगी।
फेक प्रोफाइल्स की बाढ़-
एक बार यह फीचर रोलआउट होने के बाद नामचीन हस्तियों, बैंकों या सरकारी अधिकारियों के नाम पर 'फेक यूजर आईडी' बनाकर लोगों को चूना लगाना आसान हो सकता है।
ट्रैकिंग में मुश्किल-
साइबर क्राइम होने की स्थिति में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के लिए अपराधी के ओरिजिनल फोन नंबर को ट्रैक करना और उस तक पहुंचना अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।
क्या इस फीचर पर लग सकती है रोक?
फिलहाल सरकार इस फीचर को पूरी तरह बैन नहीं कर रही है, बल्कि इसके सुरक्षा मानकों (Security Protocols) की बारीकी से जांच कर रही है। आईटी मंत्रालय का साफ मानना है कि तकनीकी एडवांसमेंट का स्वागत है, लेकिन आम नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। व्हाट्सएप को इस फीचर को भारत में पूरी तरह लाइव करने से पहले सरकार के कड़े प्राइवेसी और वेरिफिकेशन नियमों पर खरा उतरना होगा।
निष्कर्ष-
सुविधा के साथ सतर्कता भी जरूरी
व्हाट्सएप का 'यूजर आईडी' फीचर यकीनन हमारी प्राइवेसी को एक नए लेवल पर ले जाएगा, लेकिन यह डिजिटल फ्रॉड के नए दरवाजे भी खोल सकता है। ऐसे में सरकार का सतर्क होना बिल्कुल जायज है। एक जिम्मेदार यूजर होने के नाते हमें भी किसी भी अनजान यूजर आईडी से आने वाले मैसेज या लिंक्स पर भरोसा करने से बचना होगा।
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