रायबरेली पुलिस ने बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ 9 करोड़ की धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के 5 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। जानें कैसे फर्जी सैलरी और दस्तावेजों के जरिए बैंक को लगाया जा रहा था चूना।
प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, रायबरेली
उत्तर प्रदेश की रायबरेली पुलिस ने बैंकिंग सेक्टर में सेंधमारी करने वाले एक शातिर अंतरजनपदीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह फर्जी नियुक्ति पत्र और कूटरचित वेतन पर्ची (Salary Slip) के माध्यम से बैंकों का भरोसा जीतकर करोड़ों रुपये का पर्सनल लोन हड़प रहा था। पुलिस ने इस मामले में मास्टरमाइंड समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
बैंक ऑफ बड़ौदा की तहरीर पर हुई कार्रवाई
इस प्रकरण का खुलासा करते हुए पुलिस अधीक्षक (SP) रवि कुमार ने बताया कि बैंक ऑफ बड़ौदा की मुख्य शाखा के प्रबंधक मुकेश ने 29 दिसंबर को शिकायत दर्ज कराई थी। बैंक के अनुसार, विभिन्न खातों के जरिए करीब 9 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया है। जांच के बाद गुरुवार को पुलिस ने दबिश देकर लखनऊ, सीतापुर और उन्नाव के रहने वाले पांच आरोपियों को धर दबोचा।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
राजेश सिंह (उन्नाव) – गिरोह का मास्टरमाइंड।
गोपाल सिंह व उसकी पत्नी राधिका देवी (लखनऊ)।
बबलू राठौर व कामिनी राठौर (सीतापुर) – कर्ज लेने वाले आरोपी।
मोडस ऑपेरंडी: 'ट्रेजर खाते' से जीतते थे बैंक का भरोसा
आरोपियों ने पूछताछ में बैंक को चूना लगाने के शातिर तरीके का खुलासा किया। गिरोह के सदस्य सबसे पहले बैंक ऑफ बड़ौदा में अपने रिश्तेदारों या परिचितों के खाते खुलवाते थे। इसके बाद खेल शुरू होता था। आरोपियों के दस्तावेजों में पता बदल दिया जाता था।
फर्जी नियुक्ति : जाली नियुक्ति पत्र तैयार कर खाताधारकों को सरकारी कर्मचारी दर्शाया जाता था।
फेक सैलरी क्रेडिट : बैंक को गुमराह करने के लिए आरोपी एक 'ट्रेजर खाते' से हर महीने इन खातों में वेतन के नाम पर पैसा भेजते थे।
बड़ा लोन : जब बैंक को यकीन हो जाता कि खाताधारक सरकारी कर्मचारी है और उसकी नियमित आय है, तो भारी-भरकम पर्सनल लोन स्वीकृत करा लिया जाता था।
अकेले बबलू और कामिनी राठौर के नाम पर 38 लाख रुपये का लोन लिया गया था, जिसे बाद में डकार लिया गया।
48 खाताधारकों पर गिरी गाज, जांच जारी
बैंक प्रबंधक की तहरीर पर पुलिस ने कुल 48 खाताधारकों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अब उन अन्य लोगों की तलाश कर रही है जिन्होंने इस साजिश में हिस्सा लिया। एसपी ने बताया कि जांच इस बिंदु पर भी केंद्रित है कि क्या कुछ लोगों के दस्तावेजों का इस्तेमाल उनकी जानकारी के बिना तो नहीं किया गया।
बैंक लोन लेने में आधिकारिक प्रक्रियाओं का करें पालन
बैंक लोन लेते समय हमेशा आधिकारिक प्रक्रियाओं का पालन करें। किसी भी व्यक्ति को अपने दस्तावेज (जैसे आधार कार्ड या पैन कार्ड) साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करें, ताकि आप अनजाने में किसी वित्तीय धोखाधड़ी का हिस्सा न बनें।

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