Nari Shakti Vandan : नारी शक्ति वंदन अधिनियम; सशक्त राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है महिला सशक्तीकरण : प्रो. मंजुला उपाध्याय

Lucknow News : लखनऊ के नवयुग कन्या महाविद्यालय में 'सीता तत्व परिसंवाद' और 'नारी शक्ति वंदन' पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं सांस्कृतिक उत्सव का आयोजन किया गया। जानें मुख्य वक्ताओं के विचार और विजेताओं के नाम। Women Empowerment.

प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ

राजधानी के प्रतिष्ठित नवयुग कन्या महाविद्यालय में 'नारी शक्ति वंदन' अभियान के अंतर्गत एक भव्य आयोजन किया गया। अन्तर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान, अयोध्या (संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश) के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में "सीता तत्व परिसंवाद" और "रामायण शक्ति तत्व उत्सव" के माध्यम से भारतीय संस्कृति में नारी की शक्ति को रेखांकित किया गया।

तीन सत्रों में हुआ बौद्धिक व सांस्कृतिक संगम

महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर मंजुला उपाध्याय की अध्यक्षता में आयोजित यह कार्यक्रम तीन वैचारिक और सांस्कृतिक सत्रों में विभाजित था। कार्यक्रम का शुभारंभ मिशन शक्ति समिति की संयोजिका प्रो. नीतू सिंह, भारतीय भाषा संस्कृति और कला समिति एवं अहिल्याबाई होलकर समिति के संयुक्त तत्वावधान में हुआ।

वक्ताओं के विचार: रामायण के पात्र, नारी गरिमा

संगोष्ठी के प्रथम सत्र में विद्वानों ने रामायण में नारी की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।

श्रीमती शिल्पी सेन (वरिष्ठ पत्रकार) : उन्होंने कहा कि सीता के बिना राम 'मर्यादा पुरुषोत्तम' नहीं कहलाते। रामायण की महिला पात्र अपनी शक्तियों से राम के व्यक्तित्व को और प्रभावी बनाती हैं।

प्रो. भुवनेश्वरी भारद्वाज (डीन, अभिनव गुप्त संस्थान) : उनके अनुसार, राम और सीता केवल पात्र नहीं, बल्कि पुरुष और स्त्री तत्व का शाश्वत संयोग हैं। सीता का चरित्र नैतिक और मानवीय मूल्यों का वैश्विक प्रतीक है।

पद्मनाभ (वरिष्ठ साहित्यकार) : उन्होंने जोर दिया कि सीता जी ने आत्मसम्मान से कभी समझौता नहीं किया। धैर्य और कर्तव्यनिष्ठा के गुण आज के आधुनिक जीवन में भी उतने ही प्रासंगिक हैं।

अध्यक्षीय संबोधन: राष्ट्र निर्माण और नारी शक्ति

प्राचार्य प्रो. मंजुला उपाध्याय ने अपने संबोधन में कहा, "नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिला सशक्तिकरण को नए और आधुनिक आयाम प्रदान करेगा। जब नारी सशक्त होती है, तो राज्य की संरचना सुदृढ़ होती है, जिससे राष्ट्र का गौरव बढ़ता है।"

संभाषण प्रतियोगिता के परिणाम

द्वितीय सत्र में 'रामायण की विभिन्न नारी शक्ति पात्र' विषय पर छात्राओं के बीच संभाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई। निर्णायक मंडल में श्रीमती आशा श्रीवास्तव और प्रो. सुषमा त्रिवेदी शामिल रहीं।

विजेताओं की सूची

प्रथम स्थान : आस्था त्रिपाठी

द्वितीय स्थान : शांभवी गुप्ता

तृतीय स्थान : महिमा कनौजिया

सांत्वना पुरस्कार : लक्षिका किशोर एवं निधि वाजपेई

विजेताओं को स्मृति चिन्ह, प्रमाण पत्र और 'रामचरित मानस' की प्रतियां भेंट की गईं।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन

तृतीय सत्र में सांस्कृतिक उत्सव का आयोजन हुआ, जिसमें काव्योम फाउंडेशन के कलाकारों ने शबरी और मंदोदरी पर आधारित मार्मिक एकल अभिनय और नाटिका प्रस्तुत की। महाविद्यालय की छात्राओं ने रामायण की चौपाइयों का सुमधुर गायन किया और श्रीमती आशा श्रीवास्तव ने श्रीराम के 108 नामों की संस्कृत में प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. अपूर्वा अवस्थी एवं प्रो. सीमा सरकार द्वारा किया गया। अंत में शिक्षा शास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. सीमा पांडे ने धन्यवाद ज्ञापित किया। राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के साथ समागम का समापन हुआ।

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