Kanpur Kidney Transplant Case: पुलिस की राडार पर आठ नए अस्पताल, मेरठ और गाजियाबाद के 'डॉक्टरों' की तलाश

Kanpur KidneyRacket कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट कांड में बड़ा खुलासा! 8 नए अस्पताल पुलिस की जांच के दायरे में आए हैं। फरार डॉ. रोहित और डॉ. अली की तलाश में गाजियाबाद और मेरठ में पुलिस टीमें तैनात। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, कानपुर 

उत्तर प्रदेश के कानपुर में अंतरराष्ट्रीय किडनी रैकेट के खुलासे के बाद पुलिस की कार्रवाई अब और आक्रामक हो गई है। कानपुर कमिश्नरेट पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इस काले धंधे की परतें खुलती जा रहीं हैं। ताजा जानकारी के मुताबिक, अब शहर के 8 अन्य अस्पताल पुलिस के रडार पर आ गए हैं। इन अस्पतालों में अवैध रूप से किडनी ट्रांसप्लांट किए जाने के सुराग पुलिस को मिले हैं।

नेटवर्क का विस्तार : आठ अस्पतालों को नोटिस

शुरुआती जांच में आहूजा, प्रिया और मेडलाइफ जैसे अस्पतालों के नाम सामने आए थे, लेकिन डीसीपी पश्चिम एसएम क़ासिम आबिदी ने स्पष्ट किया है कि यह नेटवर्क बहुत गहरा है। पुलिस को 8 और ऐसे अस्पतालों के बारे में जानकारी मिली है, जहां किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया संदिग्ध रही है।

पुलिस की कार्रवाई : इन सभी अस्पतालों के संचालकों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया गया है।

दस्तावेजों की जांच : पुलिस यह पता लगा रही है कि इन अस्पतालों में हुए पुराने ट्रांसप्लांट के लिए शासन से अनुमति ली गई थी या नहीं।

फरार डॉक्टरों की तलाश में दबिश

इस रैकेट के मुख्य सरगना के रूप में डॉ. रोहित और डॉ. अली के नाम सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार डॉ. रोहित का संबंध गाजियाबाद के इंदिरापुरम इलाके से है। वहीं, डॉ. अली का मुख्य ठिकाना मेरठ में होने की जानकारी मिली है।

डीसीपी पश्चिम के नेतृत्व में गठित टीमें इन दोनों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं। पुलिस का दावा है कि वे आरोपियों के बेहद करीब हैं और जल्द ही उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी।

'फ्लाइंग डॉक्टर' की तरह आता था डॉ. अली

गुरुवार को पुलिस के हत्थे चढ़े दो आरोपियों, कुलदीप राघव और राजेश कुमार ने पूछताछ में चौंकाने वाली जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि मेरठ का डॉ. अली विशेष रूप से अवैध ऑपरेशनों को अंजाम देने के लिए कानपुर आता था।

"यह गिरोह गरीब और भोले-भाले लोगों को पैसों का लालच देकर उनके अंगों का सौदा करता था। डॉ. अली जैसे 'विशेषज्ञ' अवैध रूप से इन ऑपरेशनों को पूरा करते थे।" - एसएम क़ासिम आबिदी, डीसीपी पश्चिम, कानपुर कमिश्नरेट।


प्रशासन सख्त : CMO ने गठित की गोपनीय टीमें

किडनी कांड की गूंज राजधानी लखनऊ (शासन) तक पहुंचने के बाद कानपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. हरिदत्त नेमी ने कड़ा रुख अपनाया है।

औचक निरीक्षण : सीएमओ के निर्देश पर कई गोपनीय टीमें निजी अस्पतालों का औचक निरीक्षण कर रही हैं।

रिकॉर्ड खंगालना : पिछले कुछ वर्षों में हुए सभी किडनी ट्रांसप्लांट ऑपरेशनों की वैधता, कागजात और डोनर-रिसीवर के संबंधों की बारीकी से जांच की जा रही है।

तकनीकी साक्ष्य : पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें अस्पतालों के सीसीटीवी फुटेज और ओटी (OT) रजिस्टर भी जब्त कर रही हैं।

अब तक की स्थिति

अब तक पुलिस इस मामले में 8 आरोपियों को जेल भेज चुकी है। पुलिस का मुख्य लक्ष्य अब उस 'मास्टरमाइंड' तक पहुंचना है जो गाजियाबाद, मेरठ और कानपुर के इस त्रिकोणीय नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा था। प्रशासन की इस कार्रवाई से शहर के निजी अस्पताल संचालकों में खलबली है।

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https://www.prarabdhnews.com/2026/04/kanpur-kidney-transplant-case-parul-tomar-ayush-chaudhary-referred-to-lucknow-rml.html?m=1

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