UP के IAS अनुराग यादव और चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बीच तीखी बहस: ‘घर जाओ’ कहने पर मिला करारा जवाब

IAS Anurag Yadav vs Election Commissioner Gyanesh Kumar News चुनाव आयोग की बैठक में यूपी के आईएएस अनुराग यादव और चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बीच जोरदार बहस हुई। जानें क्यों आईएएस अनुराग ने कहा कि हमने सेवा में 25 साल दिए हैं और उन्हें ऑब्जर्वर पद से क्यों हटाया गया।

"हम नौकर हैं, गुलाम नहीं": चुनाव आयोग की बैठक में भिड़े IAS अनुराग यादव और चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, जानें क्या है पूरा विवाद

प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, कोलकाता

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर आयोजित एक हाई-प्रोफाइल वर्चुअल मीटिंग उस समय अखाड़े में तब्दील हो गई, जब उत्तर प्रदेश कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अनुराग यादव और चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बीच तीखी बहस हो गई। आत्मसम्मान और प्रोटोकॉल की इस लड़ाई ने अब प्रशासनिक हलकों में एक नई बहस छेड़ दी है।

विवाद की मुख्य वजह

यह घटना कोलकाता में आयोजित एक उच्च स्तरीय वर्चुअल मीटिंग के दौरान हुई। आईएएस अनुराग यादव को चुनाव आयोग ने कूच बिहार का चुनाव ऑब्जर्वर (पर्यवेक्षक) नियुक्त किया था।

जानकारी के मुताबिक, मीटिंग के दौरान चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने आईएएस अनुराग से किसी विशिष्ट मुद्दे पर जानकारी मांगी। अनुराग यादव को वह जानकारी उपलब्ध कराने में कुछ क्षणों की देरी हुई, जिस पर चुनाव आयुक्त भड़क गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ज्ञानेश कुमार ने सख्त लहजे में अनुराग से कहा- "घर वापस चले जाओ।"

IAS अनुराग का पलटवार: "25 साल दिए हैं इस सेवा को"

चुनाव आयुक्त की इस टिप्पणी पर आईएएस अनुराग यादव ने भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने पद की गरिमा और वरिष्ठता का हवाला देते हुए पलटवार किया। कहा, आप हमारे साथ ऐसा बर्ताव नहीं कर सकते। हमने इस आईएएस सेवा को अपने जीवन के 25 साल दिए हैं। आप इस लहजे में बात नहीं कर सकते। अनुराग यादव, जो वर्तमान में उत्तर प्रदेश शासन में प्रमुख सचिव (Principal Secretary) रैंक के अधिकारी हैं, ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक व्यवस्था में वरिष्ठता और मर्यादा का सम्मान होना चाहिए।

एक्शन में चुनाव आयोग

इस तीखी बहस के तुरंत बाद चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए आईएएस अनुराग यादव को ऑब्जर्वर के पद से हटा दिया है। आयोग का मानना है कि अनुशासन और कर्तव्य के प्रति तत्परता में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

ब्यूरोक्रेसी में छिड़ी बहस: समर्थन और विरोध

इस घटना के बाद नौकरशाही (Bureaucracy) दो फाड़ नजर आ रही है। हालांकि आयोग ने कार्रवाई की है, लेकिन सोशल मीडिया और प्रशासनिक ग्रुप्स में बड़ी संख्या में आईएएस अधिकारी अनुराग यादव के समर्थन में खड़े दिख रहे हैं।

समर्थकों का तर्क : अधिकारियों का कहना है कि उच्च पदों पर बैठे लोगों को अपने अधीनस्थों या सहकर्मियों के साथ सम्मानजनक भाषा का प्रयोग करना चाहिए। "घर चले जाओ" जैसे शब्दों का इस्तेमाल एक प्रमुख सचिव रैंक के अधिकारी के लिए अनुचित है।

आयोग का पक्ष : सूत्रों का कहना है कि चुनाव जैसे संवेदनशील समय में डेटा और जानकारी की त्वरित उपलब्धता अनिवार्य है, और इसमें देरी को लापरवाही माना जाता है।

कौन हैं आईएएस अनुराग यादव

अनुराग यादव उत्तर प्रदेश कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं। वह राज्य में कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और वर्तमान में प्रमुख सचिव स्तर पर कार्यरत हैं। उनकी छवि एक सुलझे हुए और अनुभवी अधिकारी की रही है।

सम्मान बनाम अनुशासन' की लड़ाई

यह घटना दिखाती है कि प्रशासनिक बैठकों में अब केवल काम का दबाव ही नहीं, बल्कि 'सम्मान बनाम अनुशासन' की लड़ाई भी तेज हो रही है। अब देखना यह है कि उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्रीय चुनाव आयोग इस मामले पर आगे क्या रुख अपनाते हैं।

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