आज गंगा सप्तमी के साथ गुरुवार और पुष्य नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है। जानें ऋषि जाह्नु और माँ गंगा की यह पौराणिक कथा और अपनी सुख-समृद्धि के लिए किए जाने वाले अचूक उपाय।
प्रारब्ध न्यूज आध्यात्म डेस्क
आज का दिन आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण और दुर्लभ है। आज वैशाख शुक्ल सप्तमी यानी गंगा सप्तमी के पावन अवसर के साथ-साथ गुरुवार और पुष्य नक्षत्र का एक अद्भुत संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में पुष्य नक्षत्र को 'नक्षत्रों का राजा' माना जाता है और जब यह गुरुवार को पड़ता है, तो यह 'गुरु-पुष्य योग' का निर्माण करता है, जो धन, सुख और समृद्धि के लिए सिद्ध माना गया है।
गुरु-पुष्य संयोग: सुख-समृद्धि के अचूक उपाय
आज रात्रि 9 बजे के बाद पुष्य नक्षत्र प्रारंभ होगा। इस शुभ घड़ी में अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और घर में बरकत लाने के लिए एक विशेष उपाय करें।
उपाय : एक पीले कपड़े में थोड़ी सी चने की दाल और एक गुड़ का टुकड़ा बांध लें।
अर्पण : इसे अपने घर के मंदिर में भगवान विष्णु या माँ लक्ष्मी के चरणों में अर्पित करें।
पाठ : यदि संभव हो, तो इस दौरान 'विष्णु सहस्रनाम' का पाठ अवश्य करें।
संग्रहण : अगले दिन इस पोटली को मंदिर से हटाकर अपने घर के अन्नागार या रसोई में जहाँ आप अनाज रखते हैं, वहाँ रख दें। मान्यता है कि इससे घर में कभी अन्न और धन की कमी नहीं होती।
गंगा सप्तमी: माँ गंगा के पुनर्जन्म की पावन कथा
गंगा सप्तमी को जाह्नू सप्तमी या गंगा जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इसी दिन माँ गंगा का पृथ्वी पर द्वितीय जन्म या पुनर्जन्म हुआ था।
पौराणिक संदर्भ: क्यों कहलाईं गंगा 'जाह्नवी'?
कथा के अनुसार, गंगा दशहरा के दिन माँ गंगा शिव की जटाओं से मुक्त होकर भागीरथ के पीछे-पीछे उनके पूर्वजों के उद्धार के लिए जा रही थीं। मार्ग में गंगा का वेग इतना प्रचंड था कि ऋषि जाह्नु का आश्रम जलमग्न हो गया। इससे क्रोधित होकर ऋषि जाह्नु ने अपनी तपस्या के बल पर गंगा के संपूर्ण जल को पी लिया।
वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन माँ गंगा को अपने कान के मार्ग से पुनः किया मुक्त
भगीरथ और समस्त देवताओं के अनुनय-विनय करने पर ऋषि जाह्नु का क्रोध शांत हुआ। उन्होंने वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन माँ गंगा को अपने कान के मार्ग से पुनः मुक्त किया। चूंकि ऋषि ने उन्हें अपनी संतान की तरह पुनर्जीवन दिया, इसलिए गंगा का नाम 'जाह्नवी' (जाह्नु की पुत्री) पड़ा।
गंगा सप्तमी का महत्व और स्नान
मान्यता है कि गंगा सप्तमी के दिन पवित्र नदी में स्नान करने से व्यक्ति के पिछले कई जन्मों के पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यदि आप गंगा तट पर नहीं जा सकते, तो घर में ही नहाने के पानी में गंगाजल डालकर स्नान करना भी उतना ही फलदायी माना जाता है।
गुरु-पुष्य योग जीवन में नई ऊर्जा का संचार करेगा
आज का दिन दान, पुण्य और मंत्र साधना के लिए श्रेष्ठ है। गंगा सप्तमी और गुरु-पुष्य योग का यह संगम आपके जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करेगा।

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